अमित शाह के बयान पर विपक्ष ने खोला मोर्चा, संसद के दोनों सदनों में हंगामा, अमित शाह ने कांग्रेस को संविधान की चर्चा के दौरान घेरा था और कहा था कि कांग्रेस मुस्लिमों को आरक्षण देना चाहती है. इसलिए 50 प्रतिशत सीमा को बढ़ाने की बात कर रही है.
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By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Parliament Winter Session : कांग्रेस ने अमित शाह के बयान की निंदा करते हुए माफी की मांग की है. इसे लेकर राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्चुन खरगे ने भी केंद्रीय गृह मंत्री पर हमला बोला है. विपक्ष के हंगामे के बाद लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है. बता दें कि अमित शाह ने कांग्रेस को संविधान की चर्चा के दौरान घेरा था और कहा था कि कांग्रेस मुस्लिमों को आरक्षण देना चाहती है. इसलिए 50 प्रतिशत सीमा को बढ़ाने की बात कर रही है.
मंगलवार को शाह के द्वारा दिए गए जवाब पर हंगामा
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मंगलवार को राज्यसभा में संविधान पर चर्चा का जवाब दिया. इस दौरान उन्होंने कई बड़ी बातें कहीं. केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि हमारा लोकतंत्र पाताल से भी गहरा है. वहीं उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि अभी हाल में हुए चुनाव में हमने अजीबो-गरीब नजारा देखा. इतने साल चुनाव हुए लेकिन मैंने आज तक किसी को आम सभाओं में संविधान को लहराते नहीं देखा.
राज्यसभा में केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि हमारा लोकतंत्र पाताल से भी गहरा है. उन्होंने कहा कि दुनिया सबसे ज्यादा विस्तृत और लिखित संविधान है. दो साल 18 महीने तक विस्तृत चर्चा हुई. शायद ही दुनिया का कोई संविधान होगा जो देश की जनता को कमेंट के लिए दिया गया.
म 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हैं- शाह
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “हमारे देश की जनता और हमारे संविधान ने उन लोगों को करारा जवाब दिया है जो कहते थे कि हम कभी आर्थिक रूप से स्वतंत्र नहीं हो पाएंगे. आज हम 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हैं, हमने ब्रिटेन को पीछे छोड़ दिया है.”
राज्यसभा में अमित शाह की बड़ी बातें
अमित शाह ने कहा कि दुनिया सबसे ज्यादा विस्तृत और लिखित संविधान है. दो साल 18 महीने तक विस्तृत चर्चा हुई. शायद ही दुनिया का कोई संविधान होगा जो देश की जनता को कमेंट के लिए दिया गया.
अमित शाह ने कहा कि संसद के दोनों सदनों में हुई बहस देश के युवाओं के लिए शिक्षाप्रद होगी. इससे देश के लोगों को यह समझने में भी मदद मिलेगी कि किस पार्टी ने संविधान का सम्मान किया है और किसने नहीं. मैं सरदार पटेल को धन्यवाद देता हूं क्योंकि उनके संघर्ष के कारण ही देश दुनिया के सामने मजबूती से खड़ा है.
कब से मिल रहा है आरक्षण?
ओबीसी समुदाय के शैक्षिक और आर्थिक पिछड़ेपन का अध्ययन करने के लिए बी. पी मंडल के नेतृत्व में मंडल आयोग का गठन किया गया था. मंडल आयोग की स्थापना 1 जनवरी 1979 को हुई थी जब मोरारजी देसाई देश के प्रधानमंत्री थे. 1980 में इस आयोग ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की. इसने ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण की सिफारिश की, लेकिन, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की सरकारों ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की.
हालांकि, 1989 में तत्कालीन प्रधानमंत्री वी. पी. सिंह ने मंडल आयोग की सिफ़ारिशों को लागू करने का निर्णय लिया. इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई लेकिन, सर्वोच्च अदालत ने कुछ बदलावों के साथ इसकी सिफ़ारिशों को हरी झंडी दिखा दी. 3,743 जातियों को मिलाकर उन्हें ओबीसी में 27 फीसदी आरक्षण दिया गया. उसी मंडल आयोग ने मुस्लिम समुदाय की कुछ जातियों को भी ओबीसी में शामिल किया.
बाद में जब 1994 में शरद पवार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने मंडल आयोग की सिफ़ारिशें महाराष्ट्र में लागू की. महाराष्ट्र में ओबीसी को 19 फीसदी आरक्षण दिया गया. इसमें भी महाराष्ट्र में मुस्लिम समुदाय की कुछ जातियों को ओबीसी से आरक्षण मिला हुआ है.
मुस्लिम आरक्षण को लेकर अब तक क्या हुआ?
शरद पवार के मुख्यमंत्री रहते हुए कार्यकाल में मंडल आयोग लागू होने से मुस्लिम समुदाय की कुछ जातियों को ओबीसी में आरक्षण मिला. लेकिन, उसके बाद भी शैक्षिक और आर्थिक पिछड़ेपन के आधार पर पूरे मुस्लिम समुदाय के लिए आरक्षण की मांग जोर पकड़ने लगी.
इसके लिए प्रदेश में आंदोलन भी हुए. आखिरकार, साल 2009 में राज्य की तत्कालीन गठबंधन सरकार ने मुस्लिम समुदाय के शैक्षिक, सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन की जांच के लिए महमूद उर रहमान समिति की स्थापना की.
21 अक्टूबर 2013 को समिति ने मुस्लिम समुदाय के लिए 8 फीसदी आरक्षण की सिफारिश की थी. 2014 के चुनावों के लिए, पृथ्वीराज चव्हाण सरकार ने 9 जुलाई 2014 को मुस्लिम समुदाय को शिक्षा और नौकरियों में 5 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए एक अध्यादेश पारित किया.
इसी दिन मराठा समुदाय को आरक्षण भी दिया गया था. मराठा आरक्षण हाई कोर्ट में नहीं टिक पाया. हालांकि, हाई कोर्ट ने मुस्लिम समुदाय को दिए गए शैक्षणिक आरक्षण की वैधता को बरकरार रखा है.
