मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल ने रजिस्टर्ड गोशालाओं को दी जाने वाली सरकारी सहायता को 20 रुपए प्रतिदिन/प्रति गाय से दोगुना करके 40 रुपए करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी.
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By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Cow Shelters, Madhya Pradesh: मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल ने निराश्रित गायों की समस्या के समाधन के लिए नीति को भी मंजूरी दी है और रजिस्टर्ड गोशालाओं को दी जाने वाली सरकारी सहायता को 20 रुपये प्रति पशु प्रति दिन से दोगुना कर 40 रुपये करने के प्रस्ताव को मंगलवार को मंजूरी दे दी.
गोआश्रय गोशाला स्थापना नीति को मिली मंजूरी
अधिकारियों ने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में गोआश्रय गोशाला स्थापना नीति को मंजूरी दी गई, जिसका उद्देश्य यह है कि निराश्रित गायों की समस्या से निपटना है. इस नीति का क्रियान्वयन पशुपालन और डेयरी विभाग द्वारा किया जाएगा. अधिकारियों के अनुसार, मंत्रिमंडल ने पंजीकृत गाय आश्रयों के लिए सरकारी सहायता को 20 रुपये प्रति पशु प्रति दिन से बढ़ाकर 40 रुपये करने का फैसला किया ताकि इस तरह की और सुविधाओं की स्थापना को प्रोत्साहित किया जा सके. पशुपालन विकास योजना का उद्देश्य पशुपालन और किसानों की आय बढ़ाना है. जिससे किसानों की आय में वृद्धि होगी.
गौशाला संचालन के लिए बनी जिला समन्वय समिति
जिले में निराश्रित गौवंश की जानकारी एकत्रित करना.
ऐसे संभावित क्षेत्र की जानकारी प्राप्त करना जहां निराश्रित गौवंश की वजह से दुर्घटना की स्थिति संभावित है.
गौशाला के निर्माण हेतु उपयुक्त स्थल का चयन करना.
गौशाला संचालन हेतु इच्छुक संस्थाओं से अभिरुचि प्राप्त करना तथा गौशाला के संचालन के लिये प्रभावी एजेंसी का चयन करना.
मॉडल एस्टीमेट को आधार बनाकर स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार गौशाला के डी.पी.आर. का अनुमोदन करना.
गौशाला निर्माण की प्रशासकीय स्वीकृति जिला कलेक्टर द्वारा जारी की जावेगी.
समस्त विभागों को गौशाला निर्माण एवं संधारण में उनके दायित्वों को स्पष्ट रूप से इंगित करना तथा उसका पालन सुनिश्चित करना.
परियोजना संचालन के लिये वित्तीय व्यवस्था का अनुश्रवण करना तथा वित्त की सामयिक उपलब्धता सुनिश्चित करना.
समिति द्वारा प्रत्येक माह में कम से कम एक बैठक करना अनिवार्य होगा. गौशालाओं के निर्माणाधीन अवधि में साप्ताहिक बैठक उपयुक्त रहेगी.
बैठक आहुत करना, बैठक की कार्यवाही विवरण अभिलिखित करना एवं संधारित करना, सहसचिव का दायित्व होगा.
निर्माण एजेंसी ग्राम पंचायत होगी एवं चूंकि बड़ी संख्या में गौशाला का निर्माण एक साथ प्रारंभ होगा, इसलिए जिला कलेक्टर, कार्यपालन यंत्री, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के अधीन एक समिति गठित करेंगे जो गौशाला निर्माण का सतत् निरीक्षण तथा मूल्यांकन करते रहेंगे.
गौशाला निर्माण की गुणवत्ता के लिये यह समिति उत्तरदायी होगी. मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत प्रत्येक सप्ताह इस समिति के साथ बैठक करेंगे तथा समीक्षा करेंगे.
गौशाला के लिए बनी कियान्वयन समिति
- गौशाला निर्माण और संचालन की सतत निगरानी एवं अनुश्रवण.
- अनुविभागीय स्तर पर विभागों के बीच समन्वय एवं स्थानीय समस्याओं का निराकरण.
- जिला समन्वय समिति के निर्देशों का पालन व क्रियान्वयन.
- जिलेवार निराश्रित गौवंश की संख्या पशुपालन विभाग द्वारा दी गई है एवं इसी को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक जिले को गौशाला निर्माण एवं संचालन के लक्ष्य निर्धारित है.
- गौशाला परियोजना के अंतर्गत निर्मित गौशालाओं की कार्यविधि एवं न्यूनतम मानकों के संबंध में विस्तृत निर्देश पशुपालन विभाग द्वारा जारी किये जा चुके हैं.
- गौशालाओं के निर्माण में लगने वाली राशि मनरेगा, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, वन विभाग, चारागाह विकास योजना की राशि तथा राज्य स्तर पर उपलब्ध पंचायत निधि एवं जिला / जनपद /ग्राम पंचायत में उपलब्ध निधि से किया जा सकेगा.
- ग्राम पंचायत गौशाला का निर्माण करने के साथ-साथ उसके संचालन के लिये भी उत्तरदायी होगी. विभिन्न मदों यथा चारा / भुसा की व्यवस्था, संधारण तथा अनुरक्षण आदि के लिए आवश्यक राशि पंच परमेश्वर पोर्टल के माध्यम से ग्राम पंचायतों को उपलब्ध कराई जावेगी.
- ग्राम पंचायत अगर गौशाला का संचालन किसी संस्था के माध्यम से करना चाहे तो वह समन्वय समिति को सूचित करेंगी. समन्वय समिति द्वारा संस्था की दक्षता एवं निष्ठा को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जायेगा. ग्राम पंचायत को
निम्न संस्थाओं के माध्यम से गौशाला संचालित करने की अनुमति समन्वय समिति द्वारा दी जा सकेगी. - स्वसहायता समूह अथवा स्वयं सेवी संस्था, जिसे संचालन का दायित्व सौंपा गया हो, उसे आवश्यक भुगतान ग्राम पंचायत ही करेगी. ग्राम पंचायत तथा ऐसी संस्था के बीच निर्धारित प्रारूप में अनुबंध निस्पादित किया जावेगा.
- ग्राम पंचायत यह सुनिश्चित करेगी कि गौशाला संचालन तथा चारागाह विकास में मनरेगा की स्वीकृत डी.पी.आर. के अनुसार वर्ष भर निर्धारित संख्या में श्रमिक उपलब्ध रहे.
- गौशाला जिस पंचायत में स्थित रहेगी, उसके आस-पास की पंचायतों तथा नगरीय क्षेत्रों के गोवंश को भी वहां आश्रय दिया जा सकेगा. परन्तु यह ध्यान रखा जाये कि गौशाला की क्षमता से अधिक संख्या में किसी भी स्थिति में मवेशी
नहीं रखें जायें. - इस संबंध में अगर कोई विवाद उत्पन्न होता है तो अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) उसका तत्काल समाधान करेंगे.
