नेपाल में सोशल मीडिया पर लगाए गए प्रतिबंध के खिलाफ जनरेशन जेड (Gen Z) के युवाओं का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा. नेपाल पुलिस के मुताबिक पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प में 9 लोगों की मौत हो गई है.
Source : MEDIA
By : DB News Update | Edited By : प्रिंस अवस्थी
Social Media Ban in Nepal: नेपाल में सोशल मीडिया पर लगाए गए प्रतिबंध के खिलाफ जनरेशन जेड (Gen Z) के युवाओं का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा. काठमांडू में फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया साइटों पर प्रतिबंध के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहा है. नेपाल पुलिस के मुताबिक पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प में 9 लोगों की मौत हो गई है.
संसद भवन के पास प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़प में सुरक्षा बलों ने गोलीबारी किए जाने की खबर है. जिससे 9 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई है और सैकड़ों लोग घायल बताए जा रहे हैं.
काठमांडू में हजारों युवाओं का जमावड़ा
काठमांडू की सड़कों पर हजारों छात्र-युवा उतर आए, जिसे अब “Gen Z रिवोल्यूशन” कहा जा रहा है. प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़कर प्रतिबंधित क्षेत्रों में घुसने की कोशिश की. हालात बिगड़ने पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे, वाटर कैनन का इस्तेमाल किया और कई जगहों पर फायरिंग की गई. हालात काबू से बाहर होते देख प्रशासन ने राजधानी के संवेदनशील इलाकों, खासकर संसद क्षेत्र में कर्फ्यू लागू कर दिया.
विरोध की असली वजह
सरकार ने 4 सितंबर को फेसबुक, ट्विटर (X), व्हाट्सऐप, यूट्यूब समेत 26 सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर प्रतिबंध लगा दिया था. कारण यह बताया गया कि इन कंपनियों ने नेपाल के सूचना और संचार मंत्रालय में रजिस्ट्रेशन नहीं कराया था. सरकार का कहना है कि यह कदम केवल “नियमों के पालन” के लिए है लेकिन युवाओं और विपक्षी दलों का मानना है कि यह असहमति की आवाज़ दबाने की कोशिश है.
ओली के नेतृत्व वाली सरकार ने प्रतिबंध हटाने की घोषणा की
विरोध प्रदर्शनों के बढ़ते ही, प्रधानमंत्री ओली के नेतृत्व वाली सरकार ने प्रतिबंध हटाने की घोषणा की. मंत्रिमंडल की बैठक के बाद, नेपाल के संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरुंग ने कहा कि सरकार ने संबंधित एजेंसियों को ‘जेन ज़ेड’ की मांगों के अनुसार सोशल मीडिया साइटों को फिर से शुरू करने की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया है. जेन ज़ेड ने ही काठमांडू के मध्य में संसद के सामने एक विशाल विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया था.
सोशल मीडिया पर प्रतिबंध
नेपाल ने फेसबुक और इंस्टाग्राम समेत कई सोशल मीडिया साइटों पर प्रतिबंध लगा दिया, क्योंकि उन्होंने संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में पंजीकरण नहीं कराया था. एक नोटिस में कहा गया कि सोशल मीडिया कंपनियों को 28 अगस्त से शुरू होकर एक सप्ताह के भीतर सरकार के साथ पंजीकरण कराना था. लेकिन मेटा (फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप), अल्फाबेट (यूट्यूब), एक्स (पूर्व में ट्विटर), रेडिट और लिंक्डइन में से किसी ने भी समय सीमा तक आवेदन जमा नहीं किया था.
प्रदर्शनकारियों के अपने तर्क
काठमांडू पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल में फेसबुक उपयोगकर्ताओं की संख्या लगभग 13.5 मिलियन और इंस्टाग्राम उपयोगकर्ताओं की संख्या लगभग 3.6 मिलियन है. इनमें से कई लोग अपने व्यवसाय के लिए सोशल मीडिया पर निर्भर हैं. नेपाल में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बंद होने के बाद, प्रभावित लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. सोशल मीडिया प्रतिबंध के खिलाफ प्रदर्शन धीरे-धीरे भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में तब्दील हो गया.
यही एकमात्र कारण नहीं
मीडिया से चर्चा के दौरान 24 वर्षीय छात्र युजान राजभंडारी ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया, “सोशल मीडिया पर प्रतिबंध से हमें गुस्सा आया है, लेकिन हमारे यहां इकट्ठा होने का यही एकमात्र कारण नहीं है. हम नेपाल में संस्थागत रूप ले चुके भ्रष्टाचार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.”
सरकार ने क्या कहा है?
सरकार द्वारा जारी एक बयान में कहा कि वह विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करती है और “इनकी सुरक्षा और निर्बाध उपयोग के लिए एक वातावरण बनाने” के लिए प्रतिबद्ध है. इससे पहले, सरकार ने टेलीग्राम तक पहुंच को अवरुद्ध कर दिया था, यह कहते हुए कि इस सुरक्षित प्लेटफॉर्म का उपयोग ऑनलाइन धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधियों के लिए किया जा रहा था. पिछले साल नेपाल सरकार ने टिकटॉक पर प्रतिबंध लगा दिया था. अगस्त में इस प्रतिबंध को हटा लिया गया, क्योंकि प्लेटफॉर्म ने नेपाली नियमों का पालन करने पर सहमति जताई थी.
