साल 2025 का अंतिम चंद्र ग्रहण रविवार (7 सितंबर) रात देशभर में देखा गया. करीब तीन घंटे तीस मिनट तक पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती रही.

By : DB News Update | Edited By : प्रिंस अवस्थी
Chandra Grahan 2025: पितृपक्ष पर वर्ष 2025 का अंतिम चंद्र ग्रहण रविवार (7 सितंबर) को देर रात देशभर में देखा गया. करीब 3 घंटे 30 मिनट तक पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती रही, जिसके कारण चांद लालिमा लिए हुए नजर आया. इस अद्भुत नजारे को आमतौर पर ‘ब्लड मून’ कहा जाता है. खगोल विज्ञान के जानकारों के अनुसार, इस दौरान पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच स्थित रही, जिससे चांद पर सीधी रोशनी नहीं पहुंच पाई. यही वजह रही कि चांद का रंग गहरा लाल दिखाई दिया.

सोशल मीडिया में वायरल हुई तस्वीरें
चन्द्र ग्रहण की दुर्लभ तस्वीरें देश के अलग-अलग हिस्सों से सामने आ रही हैं. दिल्ली-एनसीआर, लखनऊ, गुवाहाटी, चेन्नई और तिरुवनंतपुरम जैसे शहरों से लोगों ने चांद की अनोखी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल की हैं. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार भारत ही नहीं, बल्कि थाईलैंड, चीन, हांगकांग, जापान और ऑस्ट्रेलिया में भी लोगों ने इस खगोलीय घटना को बड़े उत्साह से देखा.
खगोल प्रेमियों ने भी देखा चांद का रंग
देश-विदेश के खगोल प्रेमियों ने टेलिस्कोप और अन्य वैज्ञानिक उपकरणों की मदद से चांद के बदलते रंगों को कई मिनट तक देखते रहे. विशेषज्ञों के अनुसार, चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और सूर्य की रोशनी सीधे चांद तक नहीं पहुंच पाती. इस वजह से चांद का रंग लाल हो जाता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह घटना खगोलीय अध्ययन के लिए बेहद अहम अवसर है.
चमकीला दिखाई दिया चांद
वैज्ञानिकों के मुताबिक, एशिया और ऑस्ट्रेलिया से देखने वालों के लिए यह अनुभव सबसे खास रहा. इसका कारण यह था कि चंद्र ग्रहण, चंद्रमा के पेरिगी (Perigee) पर पहुंचने से ठीक 2.7 दिन पहले हुआ.
पेरिगी वह स्थिति है जब चंद्रमा अपनी कक्षा में पृथ्वी के सबसे नजदीक होता है. इसी वजह से इस बार चांद सामान्य से बड़ा और अधिक चमकीला दिखाई दिया.


