वोट चोरी के आरोप को लेकर मामला और ज्यादा गंभीर होने वाला है, विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने पर विचार कर रहा है.
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By : DB News Update | Edited By : प्रिंस अवस्थी
Election Commission: वोटर वेरिफेकशन और वोट चोरी के आरोप पर विपक्ष संसद में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी में जुट गया है. कांग्रेस के राज्यसभा सांसद सैयद नसीर हुसैन ने भी न्यूज एजेंसी ANI से कहा कि पार्टी जरूरत पड़ने पर महाभियोग प्रस्ताव समेत सभी लोकतांत्रिक तरीकों का इस्तेमाल करने के लिए तैयार है. हालांकि अभी तक कोई औपचारिक चर्चा नहीं हुई है.
इधर, संसद में सोमवार को भी लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष का हंगामा जारी रहा. विपक्ष ने लोकसभा में बिहार वोटर वेरिफिकेशन को लेकर नारेबाजी की. सांसदों ने वोट चोर गद्दी छोड़ और वी वॉन्ट जस्टिस के नारे लगाए.
लोकसभा स्पीकर की चेतावनी के बावजूद हंगामा जारी रहा. इसके चलते लोकसभा दोपहर 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी. इधर, राज्यसभा भी विपक्ष के हंगामे के बाद दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी गई है.
इसके साथ ही INDIA गठबंधन के नेता सोमवार (18 अगस्त) शाम को उपराष्ट्रपति उम्मीदवार को लेकर भी चर्चा कर सकते हैं.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या बोला चुनाव आयोग
चुनाव आयोग ने रविवार (17 अगस्त) को प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी. उसने कहा था कि वोट चोरी का आरोप झूठा है और इससे न आयोग डरता है और न ही मतदाता. आयोग ने लोगों से अपील की थी कि वे अपने मतदान के अधिकार का जरूर इस्तेमाल करें. चुनाव आयोग ने इससे पहले राहुल गांधी के खिलाफ सख्ती दिखाते हुए उनसे सबूत मांगे थे.
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस में राहुल गांधी के सवालों का जवाब देते हुए उनके आरोपों को बेबुनियाद करार दिया. मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा, “इनकी जाँच बिना हलफ़नामा दाख़िल किए नहीं हो सकती है. या तो राहुल गांधी हलफ़नामा दें या फिर देश से माफ़ी माँगें. उन्हें 7 दिनों के अंदर हलफनामा देना होगा या पूरे देश से माफ़ी मांगनी होगी, नहीं तो समझा जाएगा कि ये आरोप (वोटर लिस्ट में गड़बड़ी) बेबुनियाद हैं.”
उन्होंने कहा कि “वोट चोरी” जैसे शब्दों का इस्तेमाल करोड़ों मतदाताओं और लाखों चुनाव कर्मचारियों की ईमानदारी पर हमला है. महाराष्ट्र को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि समय रहते जब ड्राफ़्ट सूची थी, तो आपत्ति दर्ज क्यों नहीं कराई और नतीजों के बाद ही गड़बड़ी की बात क्यों सामने लाई गई.
बिहार पर उन्होंने कहा, “वहां 2003 में भी एसआईआर हुआ था और उसकी तारीख़ थी 14 जुलाई से 14 अगस्त. तब भी सफलतापूर्वक हुआ था और इस बार भी सफलतापूर्वक हुआ है. एसआईआर प्रक्रिया को चोरी या हड़बड़ी में कराने जैसी बातें कहकर भ्रम फैलाया जा रहा है.”
रविवार को चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ़्रेंस से पहले कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल ने बिहार के सासाराम से ‘वोटर अधिकार यात्रा’ की शुरुआत की. इस दौरान राहुल गांधी ने एक बार फिर आरोप लगाया, कि बीजेपी और चुनाव आयोग मिलकर ‘वोट चोरी’ कर रहे हैं और ‘बिहार में स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न (एसआईआर) वोट चोरी करने की कोशिश’ है.
मुख्य चुनाव आयुक्त को नियुक्त करने और पद से हटाने की प्रक्रिया क्या है?
भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त को नियुक्त करने और उन्हें पद से हटाने की प्रक्रिया क्या है. यह जानना ज़रूरी हो जाता है. आइए जानते हैं कि सीईसी को लेकर कांग्रेस क्या आरोप लगा रही है और रविवार को अपनी प्रेस कॉन्फ़्रेंस में सीईसी ने क्या कहा?
राहुल गांधी ने 7 अगस्त को वोटर लिस्ट में गड़बड़ी को लेकर एक घंटे से ज़्यादा का प्रज़ेंटेशन दिया था. उन्होंने दावा किया कि लोकसभा चुनावों के साथ-साथ महाराष्ट्र और हरियाणा के विधानसभा चुनावों में भी ‘वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर धांधली’ की गई है.
बिहार में हो रहे मतदाता गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर राहुल गांधी और बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव चुनाव आयोग पर आरोप लगाते रहे हैं. दोनों नेताओं का कहना है कि ये वोट काटने की साजिश है.
उस वक्त चुनाव आयोग ने उनके आरोपों को ‘गुमराह’ करने वाला बताया था. चुनाव आयोग का कहना था कि अगर राहुल गांधी ‘वोट चोरी’ के अपने दावे को सही मानते हैं तो उन्हें शपथ पत्र पर हस्ताक्षर कर देना चाहिए.
हालांकि इसके बाद भी कांग्रेस और विपक्ष चुनाव आयोग पर ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाता रहे. मानसून सत्र के दौरान विपक्ष ने इस पर बहस की मांग भी की.
कैसे होती है सीईसी की नियुक्ति?
देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की ज़िम्मेदारी चुनाव आयोग की होती है. इसके प्रमुख यानी मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति करते हैं.
इसके लिए तीन सदस्यों की एक चयन समिति सिफारिश करती है. इस समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता या लोकसभा में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के नेता और केंद्रीय मंत्रिपरिषद के एक सदस्य होते हैं.
चयन समिति को उम्मीदवारों के नामों के प्रस्ताव कैबिनेट सचिव की अगुवाई में एक सर्च कमिटी देती है.
चुनाव आयुक्त की नियुक्ति, उनका कार्यकाल और उन्हें पद से हटाने की प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 324 और ‘मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023’ के प्रावधानों के तहत होती है.
इस क़ानून के अनुसार जिन्हें इन पदों पर नियुक्त किया जाता है, उनका अतीत में सरकार में सचिव-स्तर के पदों पर कार्यरत रहना ज़रूरी होता है. साथ ही उनके पास चुनाव प्रबंधन का अनुभव भी होना चाहिए.
इनकी नियुक्ति छह वर्ष के कार्यकाल या 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो, के लिए की जाती है. हालांकि, अगर कोई शख़्स छह साल से पहले 65 साल का हो रहा हो तो उनका कार्यकाल तभी तक रहेगा.
मुख्य चुनाव आयुक्त को वही सुविधाएं और लाभ मिलते हैं जो सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को दिए जाते हैं.
इसी साल फ़रवरी महीने में ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया था. चुनाव आयोग के सदस्यों की नियुक्ति के लिए बने नए क़ानून के तहत पद संभालने वाले वो पहले सीईसी बने थे.
