Rahul Gandhi: हाथरस में रेप पीड़िता के परिवार से मिलने के लिए राहुल गांधी उनके घर पहुंच चुके हैं. बताया जा रहा है कि पीड़ित परिवार ने उन्हें पत्र लिखकर अपनी परेशानियों के बारे में बताया था.
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By : DB News Update | Edited by :प्रिंस अवस्थी
Rahul Gandhi Hathras Visit: लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी हाथरस पहुंच चुके हैं. यहां वे रेप पीड़िता के परिवार से मिले. सूत्रों के मुताबिक पीड़ित परिवार ने जुलाई में राहुल गांधी से संपर्क किया था और उन्हें बताया था कि घटना के बाद यूपी सरकार की ओर से जो नौकरी का वादा, घर का वादा वो पूरा नहीं हुआ. पीड़ित परिवार को सुरक्षा मिली हुई है. उनका कहना है कि वे सुरक्षा की वजह से कैद हैं. पीडित परिवार से मुलाकात के दौरान राहुल गांधी ने प्रशासन के अधिकारी को बुलाया है. राहुल गांधी की हाथरस यात्रा को लेकर कानून व्यवस्था कड़ी की गई है. हाथरस के बूलगढी गांव में सुरक्षा को देखते हुए अतिरिक्त पुलिसबलों की तैनाती की गई है.
चार साल पुराना मामला
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के हाथरस दौरे के बाद चार साल बाद एक बार फिर यह मुद्दा सुर्खियों में आ गया है. 14 सितंबर 2020 को हाथरस में एक युवती से उसी के गांव के कुछ लोगों ने रेप किया था, जिसकी इलाज के दौरान मौत हो गई थी. इस मामले में एक आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई.
कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने 3 अक्टूबर, 2020 को परिवार से मुलाकात की थी और घोषणा की थी कि वे मृतका को न्याय दिलाने के लिए लड़ेंगे. 30 अक्टूबर की सुबह उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया. उसके परिवार ने आरोप लगाया कि स्थानीय पुलिस ने उन्हें रात के अंधेरे में अंतिम संस्कार करने के लिए मजबूर किया था.
हाथरस की बिटिया कांड के पीड़ित परिवार का वीडियो कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया X पर 12 मिनट का जारी किया है. वीडियो के साथ राहुल गांधी ने लिखा कि “हाथरस रेप पीड़िता के परिवार के हताशा से भरे एक-एक शब्द को ध्यान से सुनिए और महसूस कीजिए. ये आज भी दहशत में हैं. इनकी स्थिति इस बात की पुष्टि करती है कि दलितों को न्याय मिलना बेहद मुश्किल हो गया है. हम इस परिवार के साथ हैं – इनके घर का रिलोकेशन करेंगे और हर ज़रूरी सहायता देंगे.”
वीडियो में दर्द छिपा रहा
ये सब नहीं होता तो बेटी की शादी कर देती. मेरी बेटी बहुत सीधी थी. इन लोगों ने अफवाह उड़ाई… वो लड़कों से बात करती थी. वो शॉपिंग के लिए ले जाता था. जिसे किसी से कोई मतलब नहीं रहता था. उसे इतना पता नहीं था कि फोन पर इंग्लिश में नंबर आ गया तो पूछने आती थी, भाभी जी ये देखिए किसका नंबर है. उस इंसान के लिए कैसे आरोप लगा सकते हैं.
हम लोगों को बहुत टॉर्चर किया गया. हम लोगों को दिखा दिया गया है कि घर दिया गया है,नौकरी दी गई है. ऐसा कुछ नहीं हुआ है. हम लोग चार साल से जेल जैसी जिंदगी जी रहे हैं. हम लोगों को बंद कर दिया गया है. सामान लेने के लिए लेटर लिखना पड़ता है. आरोपी छूटकर आ गए हैं. बेटी का दर्द उठाने की हमें सजा मिली है.
दलित के लिए न्याय की कोई उम्मीद नहीं
मृतका के परिजन ने कहा- एक आरोपी जेल में है. 3 छूट कर बाहर आ गए हैं. मामले में बहन का बयान हटा दिया गया है. कोर्ट का ऑर्डर है कि परिवार को घर और नौकरी दिया जाए. लेकिन वो भी नहीं मिला है. गांव में एससी जाति के 4 घर हैं. दो घर के लोग डर की वजह से यहां से चले गए हैं. सीबीआई ने चार्जशीट में 4 को दोषी माना है. दलित के लिए न्याय की कोई उम्मीद नहीं है.
बॉडी रात में क्यों जलाई गई?
देश-दुनिया ने देखा है, बॉडी रात में क्यों जलाई गई. हम छोटी जाति से हैं तो इसमें तो मेरा क्या कसूर है. जब सबूत मिटा दिया गया तो हम कैसे साबित कर पाएंगे. प्रशासन ने जो लापरवाही की, उन पर भी कार्रवाई नहीं की गई. ये कैसी नारी सुरक्षा है. संविधान के हिसाब से कुछ नहीं चल रहा है. सरकार अपनी मर्जी से चलाई जा रही है. जिस दिन जजमेंट हुआ, उस दिन तीन बार में जजमेंट हुआ. जज का भी चेहरा उतरा हुआ था. ऐसा लग रहा था कि पीछे कोई बैठा हुआ है, दबाव बना रहा था. उनके सारे संगठन वहां बैठे हुए थे. गाड़ी में मिठाई और फूल मालाएं थी.
