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ReligionUttar Pradesh

प्रयागराज में मकर संक्रांति पर्व पर 60 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी

DB News
Last updated: 14/01/2026 11:07 PM
DB News
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माघ मेला 2026 एकादशी के दिन प्रशासनिक आंकड़े जारी किए, त्रिवेणी संगम के पास कल्पवासियों की संख्या भी लाखों में पहुंची

Source : DB News Update  

Contents
माघ मेला 2026 एकादशी के दिन प्रशासनिक आंकड़े जारी किए, त्रिवेणी संगम के पास कल्पवासियों की संख्या भी लाखों में पहुंचीलाखों भक्त कल्पवासी कर रहे कठिन तपस्या​शारीरिक तपस्या​आहार के कड़े नियम​मानसिक और व्यवहारिक नियम​आध्यात्मिक दिनचर्यामाघ मेले में अनेक रंग-रूप में दिखे संत-महंत15 फरवरी तक रहेगा माघ मेला

By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी

magh mela 2026: प्रयागराज माघ मेला 2026 का प्रमुख पर्व मकर संक्रांति के दिन लाखों श्रद्धालु त्रिवेणी संगम और गंगा तट पहुंचे और आस्था की डुबकी लगाई. स्नान करने वालों में देश भर से आए श्रद्धालुओं के अलावा साधु-संत और कल्पवासी भी शामिल रहे, जिन्होंने सुबह गंगा तट जाकर स्नान किया और गंगा जी का पूजन किया. प्रशासनिक आंकड़े बताए जा रहे हैं कि मकर संक्रांति पर्व के अवसर पर 60 लाख से ज्यादा श्रद्धालु गंगा तट पहुंचे और गंगा स्नान किया.

लाखों भक्त कल्पवासी कर रहे कठिन तपस्या

प्रयागराज (इलाहाबाद) में माघ मेले और कुंभ के दौरान कल्पवास को सबसे कठिन आध्यात्मिक साधनाओं में से एक माना गया है. इसे “गृहस्थ जीवन में संन्यास” का अभ्यास कहा जाता है. कल्पवास आमतौर पर पौष पूर्णिमा से माघ पूर्णिमा तक (एक महीने) चलता है.

​इसके नियम इसलिए कठिन माने जाते हैं क्योंकि कल्पवासी को कड़ाके की ठंड में अपनी सुख-सुविधाएं त्यागकर एक ऋषि की तरह जीवन बिताना होता है. कल्पवास करने वालों के लिए सबसे कठिन नियम बताए गए हैं.

​शारीरिक तपस्या

​दिन में तीन बार स्नान:

कल्पवासी को माघ महीने की भीषण ठंड में भी दिन में तीन बार (सूर्योदय से पहले, दोपहर और शाम) गंगा या संगम में स्नान करना अनिवार्य होता है.

​रेत पर शयन (जमीन पर सोना):

गद्दे या पलंग का त्याग करना होता है. कल्पवासी को जमीन पर चटाई या कुश बिछाकर सोना पड़ता है.

​स्थान सीमा:

संकल्प लेने के बाद कल्पवासी पूरे एक महीने तक मेला क्षेत्र (संगम तट) छोड़कर कहीं बाहर (शहर या घर) नहीं जा सकते हैं.

​आहार के कड़े नियम

​एक समय भोजन:

कल्पवासी को दिन में केवल एक ही बार भोजन करने की अनुमति होती है. बाकी समय सिर्फ फलाहार या जल पर रहना होता है.

​स्वयं पाक (खुद बनाना):

भोजन सात्विक होना चाहिए और अक्सर नियम यह होता है कि कल्पवासी अपना भोजन खुद पकाते हैं. (इसे ‘स्वयं पाकी’ कहते हैं).

​वर्जित वस्तुएं:

प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा, तंबाकू और पान पूरी तरह वर्जित हैं.

​मानसिक और व्यवहारिक नियम

​ब्रह्मचर्य:

मन, वचन और कर्म से पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना सबसे महत्वपूर्ण शर्त है.

​मौन और सत्य:

कम बोलना, झूठ न बोलना और किसी की निंदा (चुगली) न करना. इसे “वाचा संयम” कहते हैं.

​क्रोध त्याग:

किसी भी परिस्थिति में गुस्सा नहीं करना है और धैर्य बनाए रखना है.

​आध्यात्मिक दिनचर्या

​तुलसी और जौ का रोपण:

अपनी कुटिया या टेंट के बाहर तुलसी का पौधा लगाना और जौ बोना होता है, जिसकी रोज पूजा करनी होती है.

​सत्संग और दान:

अपना अधिकांश समय भजन, कीर्तन और संतों के प्रवचन सुनने में बिताना होता है. अपनी क्षमता अनुसार ‘अन्नदान’ करना भी नियम का हिस्सा है.

​पिंडदान

अपने पितरों की शांति के लिए तर्पण और पिंडदान करना.

​ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति इन नियमों का पालन करते हुए 12 वर्षों तक माघ मेले में कल्पवास करता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है. यह शरीर और मन दोनों को ‘डिटॉक्स’ करने की एक प्राचीन वैदिक प्रक्रिया है.

माघ मेले में अनेक रंग-रूप में दिखे संत-महंत

माघ मेले के अवसर पर संतों के अद्भुत दर्शन हुए. कोई कांटे लेटकर तपस्या कर रहा है तो कोई कड़ाके की ठंड में अग्नि के सहारे समय व्यतीत कर रहा है. कई संतों के ठाठ भी भी देखने को मिल रहे हैं. जो लग्जरी गाड़ियों से माघ मेला क्षेत्र में भ्रमण करते हुए श्रद्धालुओं को दर्शन दे रहे हैं.

15 फरवरी तक रहेगा माघ मेला

माघ मेला 2026 कुल 44 दिनों का है. यानी 3 जनवरी से 15 फरवरी तक आयोजित किया जा रहा है. इस अवधि में छह प्रमुख स्नान पर्व होंगे. जिसमें पहला स्नान पौष पूर्णिमा पर, जबकि दूसरा बड़ा पर्व मकर संक्रांति आज 15 जनवरी को मनाया गया.

Disclaimer: यह सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि DBNewsupdate.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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