सावन का महीना शुरू हो चुका है. इस पवित्र महीने में शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पण करने का अपना महत्व होता है.
Source : DB News Update
By : DB न्यूज अपडेट | Edited By : प्रिंस अवस्थी
Sawan 2025: सावन का महीना शुरू हो चुका है. ऐसे में इस महीने शिव भगवान को बेलपत्र चढ़ाना शुभ माना जाता है. इस पवित्र महीने में शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पण करने का अपना एक अलग महत्व होता है. शिवलिंग में 5 जगह बेलपत्र रखने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है.
सावन के महीने में 5 जगह बेलपत्र अर्पण करने से सभी तरह की मनोकामनाएं पूर्ण होती है. इसके साथ ही भगवान शिव का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है.
शिवलिंग में 5 जगह बेलपत्र रखने से प्राप्त होती है शिव कृपा
- सावन के महीने में पहला बेलपत्र भगवान शिव के वाहन नंदी महाराज को अर्पण करना चाहिए.
- दूसरा बेलपत्र भगवान गणेश जी को अर्पण करना चाहिए.
- तीसरा बेलपत्र शिवलिंग के नीचे अर्पित करना चाहिए.
- चौथी बेलपत्र जहां से पानी शिवलिंग पर गिर रहा है, उस पात्र में डालना चाहिए.
- पांचवा बेलपत्र शिवलिंग के ऊपर चढ़ाना चाहिए.
बेलपत्र अर्पित करने के 5 स्थान
पहली बेलपत्र जलाधारी के बीच में स्थित अशोक सुंदरी के स्थान पर अर्पित की जाती है .(यहाँ डंडी का मुख नीचे की ओर होता है).
दूसरी बेलपत्र माता पार्वती के प्रतीक स्वरूप जलाधारी के गोल भाग या हस्त कमल पर रखी जाती है.
तीसरी बेलपत्र सीधे भगवान शंकर के मुख्य शिवलिंग के ऊपर समर्पित की जाती है, जिसका डंडी का भाग आपकी विपरीत दिशा में होना चाहिए.
चौथी बेलपत्र उस स्थान पर अर्पित की जाती है जहाँ से जल बहकर नीचे जमीन पर गिरता है.
पांचवी बेलपत्र भगवान शिव के वाहन नंदी के उस पैर के पास रखी जाती है जो थोड़ा सा उठा हुआ होता है.
बेल पत्र चढ़ाने का उपाय
ज्योतिषाचार्य की मानें तो 5 या 6 या 7 सोमवार तक लगातार बेल पत्र चढ़ाना है. हर शिवलिंग पर अपने परिवार के लिए स्थान होता है. उन सभी स्थानों पर बेल पत्र चढ़ाना है. पहले एक बेल पत्र शिवलिंग की जलहरी के सीधे हाथ पर रखना है. दूसरा बेल पत्र जलहरी के उल्टे हाथ की तरफ रखना है. एक बेल पत्र शिवलिंग के मुहाने या अंतिम सिरे पर रखना है. एक बेल पत्र उस स्थान पर रखना है जिसे हस्त कमल कहते हैं. और अंतिम बेल पत्र शिवलिंग के ऊपर रखना है और जल चढ़ाना है.
जो पहले बेल पत्र शिवलिंग के सीधे हाथ की तरफ है वो गणेशजी का स्थान बताया गया है. उल्टे हाथ की तरफ अर्पित किया गया बेल पत्र कार्तिकेय जी के लिए है. जो बेल पत्र शिवलिंग की जलहरी के अंतिम सिरे पर है वो अशोक सुंदरी के लिए हैं. हस्त कमल पर चढ़ाया गया बेल पत्र माता पार्वती के लिए बताया गया है. और, शीर्ष पर अर्पित बेल पत्र भगवान शिव के लिए है. वीडियो में जो नजर आ रहा है उसके मुताबिक बेल पत्र पूरे खुले हुए तीन बेल पत्र वाली डंठल हर स्थान पर अर्पित की गई है. साथ ही बेल पत्र अर्पित करने के बाद पांचों स्थान पर जल अर्पित करना है. अंतिम बेल पत्र चढ़ाने के बाद पात्र में रखा पूरा जल चढ़ा देना है.
भगवान शिव को क्यों पसंद है बेलपत्र ?
शिवपुराण के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान जब हलाहल विष निकला था तो भगवान शिव ने इस विष को अपने कंठ में धारण कर लिया था. इसके प्रभाव से उनका मस्तिष्क गरम होने लगा. जिसके बाद देवताओं ने भगवान शिव को जल चढ़ाना शुरू किया. साथ ही तासीर में ठंडा बेलपत्र के पत्ते भी चढ़ाए. इसके बाद ही भगवान शिव का मस्तिष्क ठंडा हुआ. यही वजह है कि भगवान शिव को बेलपत्र बहुत प्रिय है.
बेलपत्र चढ़ाने के नियम
- पूजा से पहले बेलपत्र को स्वच्छ जल से धो लें.
- यथासंभव तीन पत्तियों वाला साबुत बेलपत्र अर्पित करें.
- कटा-फटा, सूखा या कीड़े लगा बेलपत्र चढ़ाने से बचें.
- बेलपत्र को श्रद्धा और स्वच्छता के साथ अर्पित करें.
- बेलपत्र अर्पित करते समय “ॐ नमः शिवाय” या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है.
- पूजा के दौरान भगवान शिव को जल, गंगाजल, दूध और बेलपत्र अर्पित कर विधि-विधान से आराधना करें.
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