मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा स्लीमनाबाद टनल कटनी, रीवा, सतना, मैहर और पन्ना जिलों के लिए अमृतधारा बनेगी, प्रधानमंत्री मोदी का मुख्यमंत्री ने माना आभार. मुख्यमंत्री ने टनल के अवलोकन के बाद स्लीमनाबाद में प्रेस वार्ता की.
Source : DB News Update
Written By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Sleemanabad Tunnel News: मध्य प्रदेश की जीवन रेखा नर्मदा अब सोनभद्र की नगरी कटनी होते हुए रीवा, सतना, मैहर और पन्ना जिले में प्रवेश करने जा रही हैं. यहां की भूमि को अपने पवित्र जल से सींचकर कृषि क्षेत्र में अमूलचूक परिवर्तन देखने को मिलेगा. हलांकि पौराणिक कथाओं के अनुसार ऐसी मान्यता है कि नर्मदा और राजकुमार सोनभद्र (सोन नदी) एक-दूसरे से प्रेम करते थे और उनका विवाह तय हो गया था. विवाह से पूर्व प्रतिष्ठत कुल की नर्मदा अपनी दासी व सहेली ‘जुहिला’ (यह आदिवासी नदी मंडला के पास बहती है) को अपना प्रेम संदेश देकर सोनभद्र के पास भेजा. सोनभद्र जुहिला के रूप-सौंदर्य को देखकर मोहित हो गए और उसे ही नर्मदा समझ बैठे. जब नर्मदा को इस विश्वासघात का पता चला, तो वे अत्यधिक क्रोधित और आहत हुईं. प्रतिष्ठत कुल की नर्मदा यह अपमान सहन न कर सकीं और मंडप छोड़कर उलटी दिशा पश्चिम की ओर में चली गईं.
शोनभद्र को अपनी गलती का एहसास हुआ तो वह भी नर्मदा के पीछे भागा यह गुहार लगाते हुए ‘लौट आओ नर्मदा’… लेकिन नर्मदा को लौटना नहीं था सो वह नहीं लौटी. लेकिन एक बार फिर नर्मदा का आशिर्वाद विन्ध्यवासियों को मिलने जा रहा है.
12 किमी की बनाई गई टनल
स्लीमनाबाद टनल लगभग 12 किलोमीटर लंबी बनाई गई है. यह परियोजना 1600 करोड़ से अधिक की लागत से निर्मित हुई है. यह महत्वाकांक्षी परियोजना मध्यप्रदेश की सिंचाई व्यवस्था और जल प्रबंधन के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि साबित होगी. इस सुरंग के माध्यम से बिना पंप के मां नर्मदा का जल सोन बेसिन तक पहुंचेगा, जिससे लगभग 2.45 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होगी.
विंध्य की धरती संसाधनों से होगी समृद्ध-सीएम
एमपी के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर कहा कि विंध्य क्षेत्र हर प्रकार के संसाधनों से समृद्ध है, लेकिन कुछ स्थानों पर पानी की कमी की चुनौती सामने आती है. स्लीमनाबाद टनल कटनी, रीवा, सतना, मैहर और पन्ना जिलों के लिए अमृतधारा बनेगी. भगवान श्रीराम के आशीर्वाद से चित्रकूट क्षेत्र और विंध्य की वैली के इन पांच जिलों के कुल ढाई लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई का रकबा बढ़ेगा. लोगों के लिए पेयजल की समस्या का समाधान होगा. कई स्थानों पर इसमें बिजली भी बनाई जाएगी. यह परियोजना राज्य में सिंचाई का रकबा बढ़ाने के संकल्प की पूर्ति में निर्णायक भूमिका निभाएगी. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों की ओर से टनल परियोजना के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि परियोजना के लिए 1600 करोड़ रुपए की राशि में केंद्र सरकार ने लगभग 275 करोड़ की राशि प्रदान की. राज्य सरकार की प्रतिबद्धता के बलबूते आज यह चुनौतीपूर्ण टनल परियोजना पूरी होने की ओर बढ़ रही है. किसानों और क्षेत्र के व्यापारियों के लिए यह टनल एक वरदान की तरह है. लगभग 12 किलोमीटर लंबी यह परियोजना भविष्य में इंजीनियरिंग के क्षेत्र में केस स्टडी सिद्ध होगी. भीषण भूकंप आने पर भी टनल 100 साल तक सुरक्षित रहेगी. कई स्थानों पर टनल की गहराई जमीन से नीचे 120 फीट तक भी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्लीमनाबाद टनल के अवलोकन के बाद मीडिया से चर्चा में यह जानकारी दी.
मां नर्मदा, गंगा बेसिन में भी हरियाली लाएंगी
मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि नर्मदा नदी तो खंभात की खाड़ी में जाकर मिलती है, लेकिन यह विज्ञान का चमत्कार ही है कि अब मां नर्मदा इस ऐतिहासिक टनल के माध्यम से गंगा बेसिन में सोन नदी के आसपास के अंचल में भी हरियाली लाएगी. एक समय ऐसा भी आया जब लगा कि टनल तैयार होना असंभव जैसा है. लेकिन जब संकल्प बड़ा होता है और पवित्र मन से कार्य किया जाए तो सफलता निश्चित रूप से मिलती है. बार-बार कठिन चट्टानों की चुनौतियां आने के बावजूद नर्मदा टनल को पूरा करने के संकल्प के साथ पूरी टीम काम करती रही. राज्य में एक समय पर सिंचाई का रकबा केवल साढ़े 7 लाख हेक्टेयर था. हमारी सरकारों में यह रकबा बढ़ाकर 44 लाख हेक्टेयर हुआ, जो पिछले ढाई साल में बढ़ाकर 65 लाख हेक्टेयर हो गया है. किसान कल्याण वर्ष में नर्मदा टनल परियोजना किसानों के लिए बड़ी सौगात है. आगामी तीन माह में रबी की फसल के लिए किसानों को एक लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हो जाएगा.
बघेलखंड-बुंदेलखण्ड क्षेत्र भविष्य में पंजाब हरियाणा को टक्कर देगा
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सोन कछार का 152 क्यूबिक डिस्चार्ज से सतना जिले में 1 लाख 4 हजार 970 हेक्टेयर, मैहर जिले में 54 हजार 227 हेक्टेयर, कटनी जिले में 21 हजार 823 हेक्टेयर, रीवा जिले में 3 हजार 532 हेक्टेयर और पन्ना जिले में 448 हेक्टेयर सहित कुल 1 लाख 85 हजार हेक्टेयर कमांड एरिया में सिंचाई की सुविधा मिलेगी. इसके साथ ही नहरों के निर्माण का कार्य तेजी से हो रहा है. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि टनल परियोजना में एक ओर जहां टनल के माध्यम से नर्मदा नदी बहेगी तो दूसरी ओर ऊपर से कटनी नदी प्रवाहित होगी. यह टनल परियोजना बुंदेलखंड और बघेलखंड के लिए बड़ी सौगात है, जो जनता की अपेक्षाओं की पूर्ति करेगी. चुनौतिपूर्ण परिस्थितियों में सिंचाई विभाग ने सराहनीय कार्य किया है. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों से अपील की है कि वे किसी भी कीमत पर अपनी जमीन न बेचें। यह क्षेत्र भविष्य में पंजाब और हरियाणा को पीछे छोड़ेगा. इस क्षेत्र से पलायन रुकेगा और आर्थिक रूप से समृद्धि आएगी. हमारी सरकार किसान कल्याण वर्ष में बड़े-बड़े संकल्प पूरा करते हुए आगे बढ़ रही है.
इंजीनियर-टेक्निशियन और मजदूर, सफलता के लिए संघर्ष करते रहे
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 8 घंटे की तीन शिफ्ट में टनल बनाने के लिए काम शुरू किया गया. वर्ष 2015 तक कुल 1406 मीटर टनल बोरिंग होने से इसकी गति बढ़ाने की आवश्यकता थी. लेकिन वर्ष 2016 से टनल के अपस्ट्रीम छोर से जर्मनी से लाई गई आधुनिक मशीन से खुदाई की गई। इसके बाद चुनौतियां बढ़ती चली गईं, लेकिन इंजीनियर, टेक्नीशियन और मजदूर सुरक्षा के मानकों को ध्यान में रखते हुए कार्य में लगे रहे. टनल निर्माण के लिए लंबा संघर्ष रहा है और अब वर्ष 2026 में सफलता मिली है. टनल तैयार होने के बाद अप स्ट्रीम और डाउन स्ट्रीम में लगभग ढाई लाख हेक्टेयर सिंचाई का रकबा बढ़ेगा प्रेस से संवाद के समय नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी, सांसद विष्णुदत्त शर्मा, सांसद सतना गणेश सिंह, विधायक सर्वश्री संजय सत्येन्द्र पाठक, संदीप जायसवाल, प्रणय प्रभात पाण्डेय, धीरेन्द्र बहादुर सिंह, अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, संभागायुक्त श्री धनंजय सिंह, आयुक्त जनसंपर्क श्री मनीष सिंह, आईजी प्रमोद वर्मा, कलेक्टर श्री आशीष तिवारी, पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा तथा अधिकारी गण उपस्थित थे.
फैक्ट फाइल
- स्लीमनाबाद टनल कटनी, रीवा, सतना, मैहर और पन्ना 5 जिलों के कुल ढाई लाख हेक्टेयर सिंचाई का रकबा बढ़ेगा.
- 1600 करोड़ रुपये से अधिक की राशि से बनी 12 किलोमीटर लंबी टनल परियोजना.
- टनल की गहराई कई स्थानों पर 120 फीट तक है.
- इंजीनियरिंग के क्षेत्र में केस स्टडी बनी यह परियोजना.
- किसानों और व्यापारियों के लिए स्लीमनाबाद टनल वरदान सिद्ध होगी .

