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सावन के झूले की परंपरा भगवान शिव और राधा रानी से जुड़ी है, जानें वजह

DB News
Last updated: 22/09/2025 11:47 AM
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सावन के महीने में झूला झूलने की परंपरा न सिर्फ धार्मिक महत्व रखती है बल्कि पति-पत्नी के प्रेम और पारिवारिक सामंजस्य को भी मजबूत बनाती है.

By : DB न्यूज अपडेट | Edited By : प्रिंस अवस्थी

Contents
सावन के महीने में झूला झूलने की परंपरा न सिर्फ धार्मिक महत्व रखती है बल्कि पति-पत्नी के प्रेम और पारिवारिक सामंजस्य को भी मजबूत बनाती है.सौन्दर्यता का प्रतीक है सावनभगवान शिव नें माता पार्वती को जुलाया था झूलाराधा-रानी से जुड़ा है झूला-झूलने की परंपराझूला-झूलने के फायदे

Sawan ka Jhula 2025 : हिन्दू धर्म में सावन का महीना पवित्रता का प्रतीक है. सावन के महीने में न केवल वर्षा ऋतु के आगमन के आगाज को दर्शाता है, बल्कि यह भक्ति, आध्यात्मिक शक्ति और उत्सव मनाने के महीनें के रूप में भी जाना जाता है. श्रावण मास से ही हिंदुओं के सभी तीज-त्योहार शुरू हो जाते हैं और चारों तरफ भक्ति का माहौल निर्मित हो जाता है. सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित है. इस पूरे महीने भगवान शिव और माता पार्वती को प्रसन्न करने के लिए भक्तजन पूजा-अर्चना करने में मग्न रहते हैं और व्रत-कथा कराते हैं.

सौन्दर्यता का प्रतीक है सावन

सावन का महीना एक ओर जहां भक्ति और उत्सव के लिए जाना जाता है, वहीं दूसरी ओर यह महीना अपनी हरियाली, ठंडी हवाओं और झीलों में खिलते कमल के फूलों की महक से सुगंधित हो जाता है. इस महीने में प्रकृति का सौंदर्य अपने चरम स्तर पर होता है. सावन के महीने में कुंवारी कन्याओं और सुहागिन महिलाओं द्वारा अपने हाथों में मेहंदी लगाने ओर पेड़ों पर झूले डालने की भी परंपरा है. इस महीने विवाहित महिलाएं सोलह श्रृंगार करती है.

भगवान शिव नें माता पार्वती को जुलाया था झूला

पौराणिक मान्यता है कि भगवान भोलेनाथ ने माता पार्वती को झूला-झुलाया था. व्यावहारिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो सावन के महीने में जब चारों ओर हरियाली होती है, उस समय हर व्यक्ति का मन अनायास ही प्रसन्न एवं प्रफुल्लित हो जाता है. इस प्रसन्न चित्त में अगर भगवान को याद किया जाए तो बिना प्रयास के ही ईश्वर का आशीर्वाद प्राप्त हो जाता है.

राधा-रानी से जुड़ा है झूला-झूलने की परंपरा

पौराणिक मान्यता के अनुसार, यह भी कहा जाता है सावन के महीने में भगवान कृष्‍ण ने राधा रानी को झूला-झुलाया था. इसके बाद से लोगों ने सावन में झूला-झूलना प्रारंभ कर दिया. आपको बता दें कि सावन में झूला-झूलने से परिवार के सदस्‍यों में एकता बनी रहती है. पति-पत्‍नी के बीच प्‍यार बढ़ता है. वहीं झूला झूलने से दिमाग को भी शांति मिलती है.

झूला-झूलने के फायदे

  • सावन माह में ये परंपरा पति-पत्नी के बीच प्रेम और सामंजस्य बढ़ाने का प्रतीक मानी जाती है.
  • जो पति अपनी पत्‍नी को सावन के महीने में झूला झुलाते हैं, उनका वैवाहिक जीवन प्‍यार से भर जाता है.
  • मंदिर और घर पर अपने इष्ट देव को झूला-झुलाने के लिए झूला लगाए जाते हैं. मंदिर में विराजमान देवी-देवताओं को झूले में झुलाया जाता है.

Disclaimer: यह सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि DBNewsupdate.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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