दीपावली का त्योहार उमंग-उल्लास और भगवान श्रीराम के आगमन का प्रतीक है. इस दिन लक्ष्मी जी की पूजा का विशेष महत्व होता है.
Source : DB News Update
By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By : प्रिंस अवस्थी
Diwali 2025: हिंदू धर्म में दीपावली का त्योहार उमंग-उल्लास और रोशनी का प्रतीक है, जो हिंदू कैलेंडर के अनुसार कार्तिक महीने में मनाया जाता है. इस दिन देवी लक्ष्मी की पूजा करने का विधान बतलाया गया है. लोग अपने घरों को दीपों से रोशन करते हैं. यह त्योहार भगवान राम के अयोध्या लौटने की खुशी में मनाये जाने की परंपरा से भी जुड़ा हुआ है.
दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त
दीपावली के दिन 20 अक्टूबर को लक्ष्मी पूजा के लिए शाम 07:08 से रात 08:18 तक का समय शुभ माना गया है. वहीं इस दिन प्रदोष काल शाम 05:46 से रात 08:18 तक रहेगा. इस मुहूर्त में आप लक्ष्मी पूजन कर सकते हैं. कई लोग इस दिन लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति की स्थापना करते हैं.
माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए लगाएं भोग
दीपावली पर माता लक्ष्मी को बेसन के लड्डू का भोग लगाने की परंपरा है, क्योंकि लड्डू का प्रसाद प्रथम पूज्य भगवान श्रीगणेश जी को अत्यंत प्रिय है और दीपावली पर लक्ष्मी के साथ गणेश जी की भी पूजा करने का विधान है, इसलिए लड्डू का भोग लगाने से घर में संपन्नता आती है.
यह भोग देवी को भी प्रसन्न है, जिससे हमें धन-धान्य की प्राप्ति होती है, क्योंकि मिठाइयां जीवन की मिठास और समृद्धि का प्रतीक मानी गई हैं और शुद्ध घी से बने लड्डू शुभ होते हैं.
शुभता का प्रतीक
हिंदू धर्म में, लड्डू को शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना गया है. दिवाली जैसे शुभ अवसर पर लड्डू का भोग लगाने से घर में सुख-समृद्धि आती है.
पांच दिनों की भव्यता का अनुभव करें
दीपावली अंधकार पर प्रकाश की विजय, बुराई पर अच्छाई की विजय और अज्ञान पर ज्ञान की परम विजय का उल्लासपूर्ण उत्सव है. यह त्योहार पांच दिनों तक चलता है, जिनमें से प्रत्येक दिन अनूठे रीति-रिवाजों और उत्सवों से भरा होता है, जिनका आप प्रत्यक्ष अनुभव कर सकते हैं.
- परिवारों के साथ अपने घरों की सावधानीपूर्वक सफाई में शामिल हों, जो एक नई शुरुआत का प्रतीक है. धनतेरस के उत्साह को देखें, जहां शुभ खरीदारी आने वाले वर्ष में समृद्धि का स्वागत करती है. बाजारों की चहल-पहल और स्थानीय लोगों द्वारा अपने घरों को रंग-बिरंगी सजावटों से सजाने के माहौल को महसूस करें.
- दूसरे दिन घर से बाहर निकलें और चारों ओर के अद्भुत नजारे से मंत्रमुग्ध हो जाएं. घर अनगिनत टिमटिमाते दीयों से जगमगाते हैं, जो प्रकाश का एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करते हैं. दरवाजों पर बनाई गई जटिल रंगोली को देखें, जो सौभाग्य का स्वागत करने वाली रंगीन कलाकृति है.
- तीसरे दिन, लक्ष्मी पूजा की पवित्र परंपरा में भाग लें. परिवार देवी लक्ष्मी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और आने वाले वर्ष में धन और सफलता के लिए आशीर्वाद मांगने के लिए एक साथ आते हैं. जीवंत पूजा समारोहों को देखें, जो भक्ति और आशा का एक आकर्षक प्रदर्शन है.
- दिवाली रिश्तों को मजबूत करने और नई शुरुआत का जश्न मनाने का समय है. परिवारों के साथ जुड़ें और प्रियजनों के साथ उपहार और मिठाइयों का आदान-प्रदान करें, खुशियां फैलाएं और एकजुटता की भावना को बढ़ावा दें। हंसी, संगीत और हार्दिक शुभकामनाओं से भरे उत्सव के माहौल में डूब जाएं.
- दिवाली का अंतिम दिन भाई-बहनों के विशेष बंधन को समर्पित है. भाई दूज के दिल को छू लेने वाले त्योहार को देखें, जहाँ भाई-बहन एक-दूसरे के प्रति अपने प्यार और प्रतिबद्धता को दोहराते हैं. परिवारों के साथ मिलकर ऐसी यादगार यादें बनाएं जो आने वाले वर्षों तक संजोई रहेंगी.
भगवान श्री गणेश को प्रिय
प्रथम पूज्य भगवान श्रीगणेश को लड्डू अत्यंत प्रिय हैं. बेसन के लड्डू का भोग लगाने से भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं और अपनी कृपा बरसाते हैं, जिससे घर-परिवार में खुशहाली और संपन्नता बनी रहती है.
लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने का माध्यम
दिवाली के दिन माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है और उन्हें प्रसन्न करने के लिए बेसन के लड्डू का भोग लगाना शुभ माना गया है. इससे धन की वृद्धि होती है और आर्थिक तंगी दूर होती है.
मनोकामनाओं की होती है पूर्ति
मान्यता है कि जब आप देवताओं को प्रसन्न करते हैं, तो वे आपकी मनोकामनाएं पूरी करते हैं. बेसन के लड्डू का भोग चढ़ाने से आपकी सभी इच्छाएं पूरी हो सकती हैं और आपको मनवांछित फल की प्राप्ति होती है.
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