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DB News Update | Divya Bhumi News > Blog > Religion > आरती क्या है और कैसे करनी चाहिए! जानें…
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आरती क्या है और कैसे करनी चाहिए! जानें…

DB News
Last updated: 11/03/2026 12:12 AM
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हिंदू धर्म में भगवान की आरती का विशेष महत्‍व बतलाया गया है. कोई भी पूजा बिना आरती के संपन्‍न नहीं मानी जाती है.

By : पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By: प्रिंस अवस्थी

Contents
हिंदू धर्म में भगवान की आरती का विशेष महत्‍व बतलाया गया है. कोई भी पूजा बिना आरती के संपन्‍न नहीं मानी जाती है.स्कन्दपुराण में कहा गया है:-तीन बार पुष्पांजलि देनी चाहिएपांच अंगों की करनी चाहिए आरती21 बार आरती घुनाने  का विधानजानें आरती लेने के भाव को आरती लेने का सही तरीकाभगवान की कृपा प्राप्त होती है

Importance Of Aarti: हिंदू धर्म में मान्यता है कि भगवान की पूजा-पाठ में जो भी कमी रह जाती है. उस कमी की पूर्ति भगवान की आरती करने से पूरी की जा सकती है. ऐसी मान्यता है कि भगवान का आशिर्वाद आरती के  बिना संभव भी नहीं है. आरती को ‘आरत्रिका’ अथवा ‘आरर्तिका’ और ‘नीराजन’ भी कहते हैं. पूजा के अन्त में आरती की जाती है. पूजन में जो त्रुटि रह जाती है, आरती से उसकी पूर्ति हो जाती है.

स्कन्दपुराण में कहा गया है:-

मन्त्रहीनं क्रियाहीनं यत् पूजनं हरेः ।

सर्वे सम्पूर्णतामेति कृते नीराजने शिवे ।।

अर्थ-पूजन मन्त्रहीन और क्रियाहीन होने पर भी नीराजन (आरती) कर लेने से उसमें सारी पूर्णता आ जाती है.’

तीन बार पुष्पांजलि देनी चाहिए

आरती में पहले मूलमन्त्र (भगवान् या जिस देवता का जिस मन्त्र से पूजन किया गया हो, उस मन्त्र) के द्वारा तीन बार पुष्पाञ्जलि देनी चाहिए और ढोल, नगारे, शंख, घड़ियाल आदि महावाद्यों के तथा जय-जयकार के शब्द के साथ शुभ पात्र में घृत से या कपूर से विषय संख्या की अनेक बत्तियां जलाकर आरती करनी चाहिए.

ततश्च मूलमन्त्रेण दत्त्वा पुष्पाञ्जलित्रयम् ॥

महानीराजनं कुर्यान्महावाद्यजयस्वनैः ॥

प्रज्वालयेत् तदार्थ च कर्पूरण घृतेन वा ।

आरार्तिकं शुभे पात्रे विषमानेकवार्तिकम् ॥

साधारणतः पाँच बत्तियों से आरती की जाती है, इसे ‘पञ्चप्रदीप’ भी कहते हैं. एक, सात या उससे अधिक वत्तियों से आरती की जाती है. कुंकुम, अगर, कपूर, चन्दन, रुई और घी अथवा हरी दर्शन एक, पाँच या सात बत्तियाँ बनाकर शंख, घण्टा आदि बाजे बजाते हुए आरती करनी चाहिए.

पांच अंगों की करनी चाहिए आरती

आरती के पाँच अंग होते हैं. प्रथम दीपमाला के द्वारा, दूसरे जलयुक्त शंख से, तीसरे धुले हुए वस्त्र से, चौथे आम और पीपल आदि के पत्तों से और पाँचवें साष्टांग दण्डवत् से आरती करें.

21 बार आरती घुनाने  का विधान

आरती उतारते समय सर्वप्रथम भगवान की प्रतिमा के चरणों में उसे चार बार घुमायें, दो बार नाभिदेश में, एक बार भगवान् की प्रतिमा के चरणों में उसे चार बार घुमायें, दो बार नाभिदेश में, एक बार मुखमण्डल पर और सात बार समस्त अंगों पर घुमायें.

यथार्थ में आरती पूजन के अन्त में इष्टदेवता की प्रसन्नता के हेतु की जाती है. इसमें इष्टदेव की दीपक दिखाने के साथ ही उनका स्तवन तथा गुणगान किया जाता है.

कदलीगर्भसम्भूतं कर्पूरं च प्रदीपितम् ।

आरार्तिक्यमहं कुर्वे पश्य मे वरदो भव ॥

जानें आरती लेने के भाव को 

भगवान की आरती होने के बाद भक्तगण दोनों हाथों से आरती लेते हैं. आखिर आरती लेते समय इस तरह का भाव क्यों आता है ? यह जानना बहुत जरूरी है. पहला भाव ये होता है कि जिस दीपक की लौ ने हमें अपने आराध्य के नख-शिख के इतने सुंदर दर्शन कराएं हैं, उसको हम सिर पर धारण करते हैं. दूसरा भाव ये होता है कि जिस दीपक की बाती ने भगवान के अरिष्ट हरे हैं, जलाए हैं, उसे हम अपने मस्तक पर धारण करते हैं.

आरती लेने का सही तरीका

आरती लेने का सही तरीका ये होता है कि आरती की लौ को हाथ से लेकर पहले सिर पर घुमाएं और उसके बाद उस आरती की लौ को अपने माथे की ओर धारण करें. जिससे इस बात का आभाष हो कि आरती की आभा हमारे मन-मस्तिष्क को ऊर्जा से भर रही है. अक्सर देखा गया है कि अधिकांश लोग आरती को औपचारिकता पूर्वक ग्रहण करते हैं और उसके महत्व से अनभिज्ञ रहते हैं.

भगवान की कृपा प्राप्त होती है

आरती के माध्यम से भगवान का आशिर्वाद प्राप्त होता है. भगवान की सच्ची श्रद्धा के साथ पूजन-अर्चन करने के बाद उनकी आरती करने की इसी कारण विधान बताया गया है. आरती का महत्व उतना ही है, जितना की नवग्रह पूजन, कलश पूजन, नारियल का अर्पण करने का है. पूजा का सच्चा फल आरती लेने के बाद ही मिलता है. इसलिए सभी भक्तों को बड़ी श्रद्धा के साथ आरती ग्रहण करना चाहिए और भगवान का आशिर्वाद प्राप्त करना चाहिए.

Disclaimer: यह सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि DBNewsupdate.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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