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Madhya Pradesh

एमपी जबलपुर नगर निगम में इंजीनियरिंग कैडर की दुर्गति

DB News
Last updated: 09/02/2026 11:25 PM
DB News
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6 Min Read
नगर निगम जबलपुर में अजब-गजब के कारनामें
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भृत्य, हेल्पर, दैनिक वेतन भोगी और पार्ट टाइम डिप्लोमाधारी, आईटीआई, इलेक्ट्रिकल व मैकेनिकल के डिप्लोमाधारियों के हाथों में सिविल का काम

Source : DB News Update  

Contents
भृत्य, हेल्पर, दैनिक वेतन भोगी और पार्ट टाइम डिप्लोमाधारी, आईटीआई, इलेक्ट्रिकल व मैकेनिकल के डिप्लोमाधारियों के हाथों में सिविल का कामइन इंजीनियरों की पदस्थापना चर्चितइन विसंगतियों के कारण बन रही विकराल स्थितिशासन के कैडर की धज्जियां उड़ींपड़ोसियों के बीच आपसी मनमुटाव भी बढ़ेकर्मचारियों में भी बढ़ रहा असंतोष

By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी

Jabalpur Municipal Corporation News: एमपी जबलपुर नगर निगम में अजब-गजब के कारनामे देखने को मिल रहे हैं. यहां इंजीनियर कैडर की दुर्गति है. किसी विभाग में चपरासी को अधिकारी की कुर्सी सौंप दी गई है तो किसी हेल्पर, चपरासी को इंजीनियर बना दिया गया है. मामला जब शहर विकास से जुड़ा हो और शहर के भविष्य की प्लॉनिंग की जाना हो, ऐसी स्थिति में नगर निगम के उच्च अिधकारी हास्यास्प्रद निर्णय ले रहे हैं. जबलपुर नगर निगम के मुख्यालय और जोन कार्यालय में पदस्थ इंजीनियरों के रिकॉर्ड देखकर पता चल रहा है कि जिम्मेदार अधिकारियों ने गंभीरता पूर्वक निर्णय नहीं लिया है. जिसके चलते उनकी बिछाई बिसात से हर कोई हैरान है. शहर विकास से जुड़े इन इंजीनियरों के क्वालिफिकेशन और मूल पद (कैडर) पर गौर किया जाए तो पता चलता है कि जिनसे हर साल नगर निगम क्षेत्र की नाली, सड़क, फुटपाथ जैसी मूलभूत सुविधा जैसे विकास काम कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है. उन उपयंत्री, सहायक यंत्री भृत्य और हेल्पर हैं और वे  पार्षद, महापौर मद और अन्य मद सहित करोड़ों का मूल्यांकन कर रहे हैं. नगर निगम सीमा क्षेत्र के जितने भी काम हैं. वे सब ऐसे काम हैं जो आने वाले वर्षों में रोड मॉडल साबित होंगे. आज के इंजीनियर जो खाका तैयार करके देंगे, उसी आधार पर शहर का विकास होगा. इसके बाद भी नगर निगम के उच्च अिधकारी अपनों को उपकृत करने के चक्कर में लापरवाही पूर्वक निर्णय ले रहे हैं, यह समझ से परे है.

इन इंजीनियरों की पदस्थापना चर्चित

नगर निगम संभाग क्रमांक-5 बल्देवबाग में पदस्थ पी. हनुमंत राव का मूल पद चपरासी का है और उसे प्रभारी उपयंत्री बनाकर बैठाया गया है. वहीं जल प्रदाय विभाग के उपयंत्री जुगलकिशोर मेवारी का मूल पद हेल्पर का है. संपदा और लोककर्म प्रयोगशाला उपयंत्री का पद चपरासी प्रमोद अग्रवाल के जिम्मे है. संभाग क्रमांक- 15 सुहागी में पदस्थ पी. एण्डूकोण्डलू का मूल पद नाकेदार है, जिसे उपयंत्री का प्रभार सौंपा गया है. इसी प्रकार संभाग क्रमांक-10 में पदस्थ रोहित पटेल इलेक्ट्रीशियन आईटीआई योग्यता रखते हैं, लेकिन प्रभारी उपयंत्री जल का प्रभार सौंपा गया है, जबकि वे स्थायीकर्मी हैं. वहीं डिप्लोमा मैकेनिकलधारी नीलेश साहू स्थायी कर्मी को उपयंत्री बना दिया गया है. इसके अलावा अशोक कुमार वर्मा स्थायी कर्मी को जलप्रदाय का उपयंत्री बनाया गया है. इतना ही नहीं मनोज कुमार तिवारी जो बीए कला अर्थशास्त्र से हैं, उन्हें भी उपयंत्री का प्रभार सौंपा गया है. इसके अलावा कई पार्ट टाइम डिप्लोमाधारियों को उपयंत्री और सहायक यंत्री का प्रभार सौंपा गया है, जानकारों के अनुसार यह नियम विरुद्ध है.

इन विसंगतियों के कारण बन रही विकराल स्थिति

दरअसल नगर निगम में जितने भी अिधकारी-कर्मचारी की जरूरत होती है, उनकी भर्ती प्रक्रिया कैडर के अनुसार होती है. कैडर के अनुसार भर्ती हुए कर्मचारी-अधिकारी को साइड लाइन कर दिया जाता है और जो चतुर्थ श्रेणी का कर्मचारी अर्दली करते हुए अधिकारी को प्रसन्न कर लेता है, उसे बड़ी जिम्मेदारी सौंप दी जाती है, जिसके कारण नगर निगम में विकराल स्थिति निर्मित होती जा रही है. इससे शहर विकास भी प्रभावित हो रहा है.

शासन के कैडर की धज्जियां उड़ीं

प्रदेश सरकार द्वारा बनाई गई कर्मचारियों और अिधकारियों की कैडर व्यवस्था की धज्जियां उड़ाकर रख दी गई हैं. नगर निगम जबलपुर में कैडर व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त नजर आ रही है. तभी तो चपरासी को अधिकारी और अधिकारी को चपरासी की जिम्मेदारी सौंपी गई है और फस्ट ग्रेड और सेकेंड ग्रेड के कर्मचारी उदासीन हैं. उनके पास कैडर के अनुसार काम ही नहीं है. जिसके कारण नगर निगम में जन समस्या का समाधान नहीं हो रहा है और शहर विकास भी प्रभावित हो रहा है.

पड़ोसियों के बीच आपसी मनमुटाव भी बढ़े

बिना कैडर के इंजीनियरिंग का काम देख रहे इन इंजीनियरों के कारण ही आज शहर के हालात खराब होते जा रहे हैं. ये इंजीनियर बिना प्लॉनिग के काम किए जा रहे हैं. हालात ये हो चुके हैं कि गली-मोहल्ले में बनने वाली सड़क और नालियों को बार-बार तोड़ने की नौबत बन रही है. आड़ी-तिरछी नालियों के कारण पड़ोसियों में आए दिन विवाद भी हो रहे हैं. बावजूद इसके नगर निगम के जिम्मेदार न सचेत हो रहे हैं और न ही ऐसे इंजीनियरों को उनके मूल पद पर भेजा जा रहा है. क्षेत्रीय रसूखदारों के दबाव के कारण ये इंजीनियर निर्माण कार्य में उल्टे सीधे निर्णय ले रहे हैं.

कर्मचारियों में भी बढ़ रहा असंतोष

कैडर के बिना बांटी जा रही रेवड़ी के कारण विभागों में भी कर्मचारियों के बीच असंतोष बढ़ता जा रहा है. जो कर्मचारी योग्यता के बाद भी उचित पद से वंचित हैं, उनकी कहीं सुनवाई भी नहीं हो रही है. कर्मचारी निगमायुक्त से लेकर महापौर तक सभी से शिकायत कर चुके हैं, इसके बाद भी मलाईदार पदों पर चहेतों की नियुक्ति बंद नहीं हो रही है. मलाई के फेर में भृत्यों को ऐसे पद सौंपे जा रहे हैं, जिससे निगम की व्यवस्थाएं भी चरमरा चुकी हैं. इस मामले में जनप्रतिनिधि भी मौन हैं.

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