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DB News Update | Divya Bhumi News > Blog > Religion > कांवड़ यात्रा 2026 में कब शुरू ? शिव जी को जल किस दिन चढ़ेगा, जान लें दोनों तारीख
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कांवड़ यात्रा 2026 में कब शुरू ? शिव जी को जल किस दिन चढ़ेगा, जान लें दोनों तारीख

DB News
Last updated: 06/09/2026 11:22 AM
DB News
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8 Min Read
कांवड़ यात्रा एक धार्मिक यात्रा है जो 2026 में इस दिन से प्रारंभ हाे रही है.
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2026 में सावन 30 जुलाई से प्रारंभ हो रहा है इसके साथ ही कांवड़ यात्रा भी शुरू हो जाएगी. कांवड़िए सावन शिवरात्रि पर जल चढ़ाते हैं और कांवड़ यात्रा संपन्न होती है.

Source : DB News Update  

Contents
2026 में सावन 30 जुलाई से प्रारंभ हो रहा है इसके साथ ही कांवड़ यात्रा भी शुरू हो जाएगी. कांवड़िए सावन शिवरात्रि पर जल चढ़ाते हैं और कांवड़ यात्रा संपन्न होती है.कांवड़ यात्रा कब से शुरुकांवड़ यात्रा क्या है?कैसी होती है कांवड़?डाक कांवड़ यात्राखड़ी कांवड़ यात्राकावंड़ यात्रा में इन नियमों का पालन करना जरूरीमंत्रों का जाप जरूर करें

By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा  | Edited By: प्रिंस अवस्थी

Kanwar Yatra 2026 Start Date: सावन का महीना हिंदुओं के लिए सबसे पवित्र और भगवान शिव शंकर की आराधना करने का पवित्र माह है. सावन के महीनें पवित्र नदियों से जल भरकर शिवलिंग पर जलाभिषेक करने का महत्व है. इसी के चलते भगवान भोलेनाथ के भक्त गंगा, यमुना, नर्मदा आदि नदियों का जल कांवड़ में भरकर शिवधाम तक ले जाते हैं और जलाभिषेक करते हैं. वर्ष 2026 में कांवड़ा यात्रा 30 जुलाई 2026 से शुरू होगी. प्राय: देखा गया है कि सावन माह में सावन सोमवार, महाशिवरात्रि के अलावा कांवड़ यात्रा कब से प्रारंभ होगी? इसको लेकर भगवान भोलेनाथ के भक्त बहुत ही उत्सुक रहते हैं और सोशल मीडिया में कांवड़ यात्रा के संबंध जानने का प्रयास करते हैं. चूंकि पवित्र नदियों का जल लाने के लिए अपने आसपास के शिव मंदिर या फिर सिद्ध स्थान तक लंबी यात्रा करते हैं और भगवान शिवलिंग का अभिषेक करते हैं.

कांवड़ यात्रा कब से शुरु

कांवड़ यात्रा 2026 की शुरुआत सावन माह के पहले दिन से शुरू हो जाती है. इस साल कांवड़ यात्रा 30 जुलाई से आरंभ हो जाएगी और सावन शिवरात्रि 11 अगस्त 2026 पर समाप्त होगी. इसी दिन भक्तजन गंगाजल, नर्मदा जल, यमुना जल से शिवलिंग का अभिषेक करेंगे और भगवान शिवजी का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे.

कांवड़ यात्रा क्या है?

सावन महीने के प्रत्येक दिन जप, तप और व्रत के लिए महत्वपूर्ण हैं. कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालु दूर-दूर से गंगा तट, नर्मदा तट और अन्य पवित्र नदी के किनारे पहुंचते हैं और नदी में विधि-विधान से स्नान, पूजा करते हैं. इसके बाद कांवड़ के दोनों ओर रखे जाने वाले कलश में गंगाजल, नर्मदा, यमुना जल भरते हैं और उसे कांवड़ में स्थापित करते हैं. इसके बाद कांवड़ यात्रा में शामिल भक्त नंगे पैर और भगवान शिव के भक्ति गीतों का गान करते हुए लंबी यात्रा पर निकल पड़ते हैं. लंबी यात्रा के बाद जब अपने क्षेत्र के शिव मंदिर पहुंचते हैं और वहां विराजमान शिवलिंग पर गंगा-नर्मदाजल अर्पित कर भोलेनाथ का अभिषेक करते हैं.

कैसी होती है कांवड़?

कांवड़ बनाने के लिए एक विशेष प्रकार की लकड़ी या बांस का इस्तेमाल किया जाता है. उसे श्रद्धालु अपनी मंशानुसार आकर्षक ढंग से सजाते हैं. रंग-बिरंगी पताकाएं, धार्मिक झंडे, फूल-मालाएं, घंटियां और चमकदार सजावट से सुसज्जित कांवड़ के दोनों सिरों पर कलश बांधे जाते हैं. कांवड़ के कलश में पवित्र नदी का जल भरकर अपने कंधों पर उठाकर पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ यात्रा तय करते हैं.

कितनी तरह की होती है कांवड़ यात्रा ?

  • कांवड़ यात्रा में श्रद्धालु अपनी शारीरिक क्षमता और सुविधा के अनुसार यात्रा में हिस्सा लेते हैं.
  • गंगाजल लेने के लिए जाते समय और वापस लौटते वक्त भक्त रास्ते में आवश्यकतानुसार विश्राम कर सकते हैं.
  • कांवड़ियों की सेवा के लिए विभिन्न स्थानों पर शिविर और सेवा शिविर लगे होते हैं.
  • शिविर में भोजन, पेयजल, चिकित्सा और ठहरने जैसी सुविधाएं उपलब्ध होती हैं.
  • कांवड़ियों की यात्रा सुलभ, सुरक्षित बनाने के लिए शिविर में व्यापक व्यवस्थाएं होती हैं.
  • शिविर में विश्राम करने के बाद श्रद्धालु पुनः अपनी यात्रा शुरू कर सकते हैं और भगवान शिव के मंदिर तक पहुंचते हैं.
  • दांडी कांवड़ यात्रा
  • दांडी कांवड़ यात्रा को सबसे कठिन और तपस्वी स्वरूप माना गया है.
  • इस यात्रा में भक्त गंगाजल लेने के बाद दंडवत प्रणाम करते हुए आगे बढ़ते हैं.
  • प्रत्येक दंडवत के बाद वे उसी स्थान तक पहुंचते हैं जहां तक उनके हाथ आगे बढ़े होते हैं.
  • उसके बाद फिर दोबारा लेटकर अगला चरण पूरा करने का विधान है.
  • दण्डवत प्रक्रिया को लगातार दोहराते हुए वे लंबी दूरी तय की जाती है.
  • दण्डवत कांवड़ यात्रा अत्यधिक कठिन होने के कारण इस यात्रा को पूरा करने में कई सप्ताह और कभी-कभी पूरा महीना भी लग सकता है.

डाक कांवड़ यात्रा

  • डाक कांवड़ को कांवड़ यात्रा का तेज और अनुशासित स्वरूप माना गया है.
  • इस यात्रा में शामिल कांवड़िए गंगाजल लेने के बाद बिना रुके अपने गंतव्य तक पहुंचने का संकल्प लेते हैं.
  • यात्रा के दौरान वे कहीं ठहरते नहीं हैं और लगातार आगे बढ़ते रहते हैं.
  • ऐसे कांवड़ियों के लिए मंदिरों और प्रशासन द्वारा विशेष प्रबंध किए जाते हैं, ताकि वे सीधे शिवलिंग तक पहुंचकर जलाभिषेक कर सकें.
  • इस यात्रा में गति, संकल्प और अनुशासन का विशेष महत्व होता है.

खड़ी कांवड़ यात्रा

  • खड़ी कांवड़ यात्रा में कांवड़ को जमीन पर रखने की अनुमति नहीं होती.
  • खड़ी कांवड़ यात्रा में नियम का पालन करने के लिए श्रद्धालु समूह बनाकर यात्रा करते हैं.
  • जब एक व्यक्ति थक जाता है, तो दूसरा साथी कांवड़ संभाल लेता है और यात्रा जारी रहती है.
  • इस प्रकार कांवड़ लगातार गतिमान रहती है. यह यात्रा आपसी सहयोग, समर्पण और सामूहिक भक्ति का अनूठा उदाहरण मानी जाती है.

कावंड़ यात्रा में इन नियमों का पालन करना जरूरी

  • कांवड़ यात्रा पर जाते समय चमड़े की बनी चीजों का स्पर्श न करें और अपने साथ भी नहीं ले जाना चाहिए.
  • कांवड़ यात्रा में चमड़े का पर्स, बेल्ट, जूते और चप्पल पहनकर या साथ में नहीं ले जाना चाहिए.
  • चमड़ा जानवर की खाल से बनता है ऐसे में इससे हत्या का आरोप लगता है.
  • कावंड़ यात्रा में अपशब्दों व गाली का प्रयोग नहीं करना चाहिए.
  • यात्रा करते समय किसी भी व्यक्ति के प्रति मन में गलत विचार भी नहीं लाने चाहिए.
  • कावंड़ यात्रा में सभी लोगों से भोले का नाम लेते हुए मिलना चाहिए और खान-पान का विशेष ध्यान रखना चाहिए.
  • कावंड़ यात्रा में मांसाहार का सेवन नहीं करना चाहिए.
  • प्याज-लहसुन से भी परहेज करना चाहिए.
  • यात्रा के दौरान जमीन पर ही सोना चाहिए.
  • शराब, सिगरेट, पान मसाला आदि चीजों से दूर रहना चाहिए.

मंत्रों का जाप जरूर करें

कावंड़ यात्रा पैदल जाते समय ओम नम: शिवाय का जाप अवश्य करना चाहिए. संभव हो तो नंगे पैर ही कावंड़ यात्रा करें. जल्द मनोकामना पूरी करने के लिए कांवड़ यात्रा के दौरान शिव जी के मंत्रों का जाप करना चाहिए. आप भोलेनाथ के जयकारों के साथ भी यात्रा कर सकते हैं.

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