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अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से प्रारंभ, जानें… कब से शुरू करें रजिस्ट्रेशन

DB News
Last updated: 11/09/2026 10:35 PM
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6 Min Read
अमरनाथ यात्रा कब से हो रही शुरू जानें
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अमरनाथ यात्रा को लेकर अमरनाथजी श्राइन बोर्ड (SASB) ने तारीख सुनिश्चित कर दी है. यात्रा को सुगम बनाने के लिए पहले से तय कर लें रूट और उन स्थानों के धार्मिक महत्व को भी जान लें. यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन भी जल्द कराएं.

Source : DB News Update  

Contents
अमरनाथ यात्रा को लेकर अमरनाथजी श्राइन बोर्ड (SASB) ने तारीख सुनिश्चित कर दी है. यात्रा को सुगम बनाने के लिए पहले से तय कर लें रूट और उन स्थानों के धार्मिक महत्व को भी जान लें. यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन भी जल्द कराएं.अमरनाथ यात्रा के लिए कब से शुरू हो रहे रजिस्ट्रेशन?अमरनाथ यात्रा कब से प्रारंभ हो रही है?रहस्यमयी है अमरनाथ यात्राश्रावण मास में अत्यंत फलदायी है अमरनाथ यात्राअमरनाथ यात्रा के प्रमुख मार्गपहलगाम मार्ग:-अनंतनाग क्यों है प्रसिद्धबालटाल मार्ग:-धार्मिक महत्व

By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी

Amarnath Yatra 2026 Date Announced: प्रकृति की अनमोल धरोहर के रूप में पहचान बनातते जा रहे आध्यात्मक केन्द्र अमरनाथ यात्रा की शुरुआत जल्द प्रारंभ होने जा रही है. इस यात्रा की तारीख 3 जुलाई निश्चित हो चुकी है. यात्र के समापन की तारीख 28 अगस्त 2026 निर्धारित कर दी गई है. जिन लोगों को बर्फ की पहाड़ी पर यात्रा करने का शौक है, उनके लिए यह यात्रा आनंदित करने वाली रहेगी. इस यात्रा को शुरु करने पहले 29 जून को ज्येष्ठ पूर्णिमा पर पहली पूजा की जाएगी.  इसी के साथ अमरनाथ भोलेशंकर का दर्शन और पूजन करना प्रारंभ हो जाएगा.

अमरनाथ यात्रा के लिए कब से शुरू हो रहे रजिस्ट्रेशन?

जम्मू-कश्मीर की श्रंखला में विराजमान भगवान अमरनाथ यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन 15 अप्रैल 2026 से शुरू हो रहे हैं. करीब 57 दिन चलने वाली इस यात्रा के लिए जम्मू के भगवती नगर बेस कैम्प से पहला जत्था रवाना होगा. इसके बाद बारी-बारी से जत्था रवाना होंगे.

अमरनाथ यात्रा कब से प्रारंभ हो रही है?

अमरनाथ यात्रा जाने वाले यात्रियों के लिए वह शुभ दिन नजदीक आ गया है, जो प्रकृति की गोद में यात्रा करने के लिए आतुर हैं. यह यात्रा 3 जुलाई 2026 से प्रारंभ हो रही है और 28 अगस्त तक जारी रहेगी. इस यात्रा में केवल वही लोग रजिस्ट्रेशन कराएं, जो शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ्य हैं.

रहस्यमयी है अमरनाथ यात्रा

धार्मिक मान्यता है कि जम्मू-कश्मीर में विराजमान भगवान शिव का यह वह स्थान है जहां भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरत्व का रहस्य (अमर कथा) को सुनाया था. इस कारण इस गुफा को अत्यंत दिव्य और रहस्यमय माना जा रहा है. इस गुफा के कबूतर आज भी बर्फ के बीच विद्यमान हैं. जिन्हें अमरत्व का वरदान मिला हुआ है. किवंदतियों से पता चला है कि भगवान शंकर जब अमर कथा सुना रहे थे तो ये दोनों कबूतर भी उस कथा का श्रवण कर लिया था. जिसके बाद से हर वर्ष अमरनाथ यात्रा के दौरान हर किसी को इन दोनों कबूतर के दर्शन मिलते हैं.

श्रावण मास में अत्यंत फलदायी है अमरनाथ यात्रा

हिंदू धर्मिक मान्यता है कि श्रावण मास में इस अमरनाथ यात्रा का आयोजन होने से इसका महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि यह महीना स्वयंभू शिव भक्ति के लिए सर्वोत्तम माना जाता है. अमरनाथ गुफा के अंदर बर्फ से हिमलिंग स्वयं निर्मित होते हैं और इसका आकार चंद्रमा की कलाओं के अनुसार घटता-बढ़ता है. जिस कारण शिव भक्तों में इस यात्रा में जाने वालों की संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है.

अमरनाथ यात्रा के प्रमुख मार्ग

पहलगाम मार्ग:-

पहलगाम जम्मू से 315 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. अनंतनाग जिले में स्थित यह टाउन प्रमुख धर्मिक स्थलों में गिना जाता है. पहलगाम मार्ग, लिंडर रिवर एज, चंदनवाड़ी, पिस्‍सू टॉप, शेषनाग फॉल्स, शेषनाक लेक, संगम, अंत में बाबा अमरनाथ पहुंचता है.

अनंतनाग क्यों है प्रसिद्ध

ऐसी मान्यता है कि भगवान शंकर जब पार्वती को अमर कथा सुनाने ले जा रहे थे, तो उन्होंने छोटे-छोटे अनंत नागों को ‘अनंतनाग’ में छोड़ा, माथे के चंदन को ‘चंदनबाड़ी’ में उतारा, अन्य पिस्सुओं को ‘पिस्सू टॉप’ पर और गले के शेषनाग को ‘शेषनाग’ नामक स्थल पर छोड़ा था. ये सभी स्थल आज भी अमरनाथ यात्रा के दौरान दिखई पड़ते हैं.

बालटाल मार्ग:-

बालटाल रूट से अमरनाथ गुफा तक की दूरी 14 किमी है. इस मार्ग पर चलने से बाबा बर्फानी के दर्शन में 1 से 2 दिन में होते हैं. यह रास्ता छोटा तो है, लेकिन इसमें खड़ी चढ़ाई और संकरे, खतरनाक मोड़ होते हैं, यह पहाड़ी की चढ़ाई चुनौतीपूर्ण है. यह केवल युवाओं और स्वस्थ लोगों के लिए उपयुक्त है.

धार्मिक महत्व

जम्मू से बालटाल की दूरी 400 किलोमीटर है. बालटाल से शुरू होता है और डोमिअल, बरारी और संगम से होते हुए पवित्र गुफा तक पहुचता है. उत्तरी रास्ते में हमें अमरनाथ घाटी और अमरावाथी नदी भी देखने को मिलती है जो अमरनाथ ग्लेशियर से जुडी हुई है. इस नदी में श्रद्धालु स्नान करते हैं और पवित्रता का अनुभव करते हैं. बलटाल कैंप से तीर्थयात्री एक दिन में अमरनाथ गुफा की यात्रा कर वापस कैंप लौट सकते हैं.

Disclaimer: यह सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि DBNewsupdate.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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