एमपी के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बयान से तहलका, शहरी विकास और नगर प्रशासन को लेकर दिए गए बयान ने राज्य की सियासत में तहलका मचा दिया है.
Source : Facebook/ Kailash Vijayvargiya
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
MP Kailash Vijayvargiya News: शहरी विकास से जुड़ी कई योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार से पर्याप्त बजट की दरकार है. पूर्व में कई घोषणाएं राजनीतिक मजबूरियों के चलते की गई थीं, लेकिन अब उन घोषणाओं को जमीन पर उतारना एक बड़ी चुनौती बन गया है. एमपी सरकार के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के शहरी विकास और नगर प्रशासन को लेकर बयान दिया है,, जिसके बाद से सियासी गलियारों में हलचल मच गई है. भोपाल में आयोजित शहरी विकास की एक क्षेत्रीय समीक्षा बैठक के दौरान मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शहरीकरण तेजी से बढ़ रहा है और इसके साथ ही नागरिक सुविधाओं की मांग भी लगातार बढ़ी है. ऐसे में सड़कों, जलप्रदाय, सीवरेज, आवास और ट्रैफिक जैसी बुनियादी जरूरतों को पूरा करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है.
केन्द्र सरकार से सहयोग की अपेक्षा
हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिए कि केवल राज्य के संसाधनों से सभी योजनाओं को समय पर पूरा कर पाना आसान नहीं है और इसके लिए केंद्र सरकार के सहयोग की आवश्यकता है. मंत्री के इस बयान को राजनीतिक विश्लेषक आने वाले समय में योजनाओं की गति और बजट प्रबंधन से जोड़कर देख रहे हैं.
जनता के वादों को पूरा नहीं कर पा रही सरकार- कांग्रेस
मंत्री विजयवर्गीय के इस बयान के बाद विपक्ष ने सरकार पर सीधा हमला बोला है. कांग्रेस प्रवक्ता अभिनव बारोलिया ने कहा कि बीजेपी सरकार बड़े-बड़े वादे और घोषणाएं करके सत्ता में आई थी, लेकिन अब जनता से किए गए वादों को पूरा नहीं कर पा रही है.
उन्होंने इसे “मोदी की गारंटी” पर सवाल बताते हुए कहा कि मंत्री के बयान से साफ है कि सरकार अब जनता को बुनियादी सुविधाएं देने में असमर्थ नजर आ रही है. अभिनव बारोलिया ने कहा कि चुनाव के समय किए गए दावों और हकीकत के बीच बड़ा अंतर सामने आ रहा है.
बीजेपी ने किया कांग्रेस के आरोपों को खारिज
वहीं बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज किया है. बीजेपी प्रवक्ता अजय यादव ने कहा कि कांग्रेस बेवजह राजनीति कर रही है. उन्होंने दावा किया कि बीजेपी सरकार में कोई भी जनकल्याणकारी योजना बंद नहीं हुई है और राज्य सरकार तथा केंद्र सरकार मिलकर जनता के हित में लगातार काम कर रही हैं. अजय यादव ने कांग्रेस को अपने कार्यकाल की “बंटाधार सरकार” याद करने की नसीहत देते हुए कहा कि विकास के मुद्दे पर राजनीति करने के बजाय सकारात्मक सहयोग करना चाहिए.
कुल मिलाकर, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बयान ने शहरी विकास को लेकर चल रही तैयारियों, बजट की चुनौतियों और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है. अब देखना होगा कि आने वाले समय में सरकार इन चुनौतियों से कैसे निपटती है और जनता को किए गए वादों को किस हद तक पूरा कर पाती है.
विवादों से रहा है कैलाश विजयवर्गीय का नाता
कैलाश विजयवर्गीय अपने ही दिए बयानों में उलझ जाते हैं.
कैलाश विजयवर्गीय के बयानों से पार्टी असहज भी हो जाती है.
इंदौर दूषित जल कांड में भी उन्होंने पार्टी की मुश्किलें बढ़ाई थी.
कैलाश विजयवर्गीय पश्चिम बंगाल के रहे हैं प्रभारी
गौरतलब है कि कांग्रेस ने यह भी कहा है कि आरोपों को छिपाने के मामले में पूर्व में उम्मीदवारों की सदस्या रद्द हुई है. हालांकि बीजेपी ने अभी तक इस मामले पर प्रतिक्रिया नहीं दी है. वहीं, कांग्रेस के विजयपुर सीट से विधायक मुकेश मल्होत्रा केस की जानकारी छुपाने के मामले में ही कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे हैं.
एक बार फिर चर्चा में मंत्री
विजयवर्गीय स्वयं कैबिनेट मंत्री हैं, इंदौर उनका कर्म क्षेत्र है, लेकिन वह समझने को तैयार नहीं दिखते कि कााउंसिल ऑफ मिनिस्टर यानी कैबिनेट में अधिकार के मामले में मंत्रियों में ज्यादा अंतर नहीं होता है. विजयवर्गीय भी बतौर मंत्री उतने ही सक्षम हैं, आवश्यकता प्रबल इच्छा शक्ति की है.
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय आए दिन असंतुष्ट भाव में जिस तरह रोना-धोना करते हैं, वह उनके लंबे राजनीतिक सफर पर भी प्रश्न चिह्न खड़े करता है. साथ ही यह संदेश भी मजबूत करता है कि वह हासिल किए हुए उत्तरदायित्व का निर्वहन नहीं कर पा रहे हैं. जनता के प्रति जवाबदेही में कमजोर पड़ रहे हैं.
ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि कैलाश विजयवर्गीय अपना पद क्यों नहीं छोड़ देते? पद पर बने रहना, काम न होने की दुहाई देना और विरोध के नए-नए तरीके भी अपनाना, उनके लिए ज्यादा मुश्किलें खड़ी करेगा, बजाय सरकार या भारतीय जनता पार्टी को कठघरे में खड़ा करने के.
