देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर ने ताइवान के छह अलग-अलग विश्वविद्यालयों के साथ किया एमओयू, मिंग ची प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय और काऊशुंग आइएसयू जीएमसी संस्थान के बीच एमओयू. अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा का अनावरण भी किया गया.
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Written By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
नई दिल्ली.विश्व में सेमी-कंडक्टर और चिप-डिजाइन क्षेत्र के सिरमौर ताइवान के साथ देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इन्दौर द्वारा शैक्षणिक और अनुसंधान संबंधी गतिविधियों के लिए किए जा रहे एमओयू से मध्यप्रदेश के विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और निवेशकों के लिए प्रगति के नए द्वार खुलेंगे। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय ने ताइवान के छह अलग-अलग विश्वविद्यालयों के साथ एमओयू किया है।
एमओयू क्रियान्वयन में कोई कठिनाई नहीं
राज्य सरकार की हरसंभव कोशिश होगी कि ताइवान के साथ प्रदेश के संबंध प्रगाढ़ हों और शासन स्तर पर एमओयू क्रियान्वयन में कोई कठिनाई नहीं आए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर द्वारा टिकाऊ भविष्य के लिए पर्यावरण प्रबंधन विषय पर इंदौर में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के शुभारंभ कार्यक्रम को समत्व भवन भोपाल से वर्चुअली संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री की वर्चुअल उपस्थिति में इन्दौर में आई-शु यूनिवर्सिटी ताइवान तथा देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इन्दौर के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए साथ ही विश्वविद्यालय में स्वामी विवेकानंद तथा भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा का अनावरण भी किया गया।
जैसे हम स्वयं की चिंता करते हैं वैसे ही ब्रह्मांड की चिंता करें
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि टिकाऊ भविष्य के लिए पर्यावरण प्रबंधन विषय पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन वर्तमान परिदृश्य में बहुत महत्वपूर्ण है। हमारी संस्कृति पर्यावरण के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए हमें प्रेरित करती है, हमारे वेद यह शिक्षा देते हैं कि जैसे हम स्वयं की चिंता करते हैं वैसे ही ब्रह्मांड की चिंता करें। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर नवाचार करने में अग्रणी रहा है इस उद्यमशीलता के लिए विश्वविद्यालय बधाई का पात्र है।
पर्यावरण की दृष्टि से मध्य प्रदेश पर्याप्त संपन्न है। विश्व के सम्मुख मौजूद पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना करने के लिए केंद्र के साथ-साथ राज्य सरकार भी हर स्तर पर प्रयास कर रही है। भारतीय संस्कृति में पर्यावरण संरक्षण और जन-जन में पर्यावरण की प्रति संवेदनशीलता विकसित करने के अनेक बिंदु समाहित हैं।
ताइवान में मालवा की अनूठी परंपराओं, संस्कृति और विरासत को प्रदर्शित किया
सेमीकंडक्टर चिप डिजाइन परियोजनाओं के संभावित प्रभाव और प्रयोज्यता पर प्रतिनिधिमंडल का व्यापक शोध उनके दृष्टिकोण की गंभीरता को उजागर करता है। दोनों क्षेत्रों के चयनित प्रोफेसरों और छात्रों की भागीदारी इस उद्यम की सहयोगात्मक और समावेशी प्रकृति पर जोर देती है। संस्कृति का भी आदान-प्रदान ताइवान में मालवा की अनूठी परंपराओं, संस्कृति और विरासत को प्रदर्शित किया जाएगा।
सांस्कृतिक और ऐतिहासिक आयामों को विस्तार मिलेगा। भारतीय संस्कृति, नृत्य, कला, अनुष्ठान और ऐतिहासिक विरासत का आदान-प्रदान किया जाएगा। वहीं, विश्वविद्यालय के विद्यार्थी भी ताइवान की संस्कृति और परंपराओं से अवगत कराकर उन्हें समृद्ध बनाना है।
मिंग ची प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय और काऊशुंग आइएसयू जीएमसी संस्थान के बीच एमओयू
इन संस्थानों से करेंगे अनुबंध राष्ट्रीय ताइपे प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (ताइचुंग), काऊशुंग की राष्ट्रीय पिंग तुंग विश्वविद्यालय, ताइचुंग की राष्ट्रीय चिन-यी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, ताइपे की मिंग ची प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय और काऊशुंग आइएसयू जीएमसी संस्थान के बीच एमओयू किया जाएगा।
इनके साथ हुआ एमओयू
कुलपति डॉ रेणु जैन के नेतृत्व में 05 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ताइवान गया था. वहां डीएवीवी ने ताइचुंग के राष्ट्रीय ताइपे प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, काऊशुंग के राष्ट्रीय पिंग तुंग विश्वविद्यालय, ताइचुंग की राष्ट्रीय चिन-यी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, ताइपे की मिंग ची प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय और काऊशुंग आईएसयू जीएमसी संस्थान के साथ एमओयू किया. डीएवीवी के इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, आईईटी स्कूल ऑफ डेटा साइंस और स्कूल ऑफ कंप्यूटर साइंस सहित अन्य विभाग इस एमओयू में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.
अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा का अनावरण
मुख्यमंत्री की वर्चुअल उपस्थिति में इन्दौर में आई-शु यूनिवर्सिटी ताइवान तथा देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इन्दौर के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए साथ ही विश्वविद्यालय में स्वामी विवेकानंद तथा भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा का अनावरण भी किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि टिकाऊ भविष्य के लिए पर्यावरण प्रबंधन विषय पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन वर्तमान परिदृश्य में बहुत महत्वपूर्ण है। हमारी संस्कृति पर्यावरण के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए हमें प्रेरित करती है, हमारे वेद यह शिक्षा देते हैं कि जैसे हम स्वयं की चिंता करते हैं वैसे ही ब्रह्मांड की चिंता करें।
