धनतेरस यानी दिवाली के 5 दिन के पर्व की शुरुआत का मुख्य त्योहार. इस दिन लक्ष्मी पूजन के अलावा खरीदारी का विशेष महत्व है.
Source : DB News Update
By : DB न्यूज अपडेट | Edited By : प्रिंस अवस्थी
Dhanteras 2026 Date: धनतेरस नाम “धन” और “तेरस” शब्दों से आया है, कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष के 13वें दिन यानी त्रयोदशी को धनतेरस मनाई जाती है. इसे भगवान धनवंतरी जयंती के तौर पर भी जाना जाता है, क्योंकि इसी दिन धनवंतरी देव समुद्र से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे. हिंदू धर्म के मुताबिक धनतेरस से दिवाली के पंच पर्व की शुरुआत हो जाती है. ये दिन धन समृद्धि के देव कुबेर, मां लक्ष्मी और आरोग्य के देवता भगवान धनवन्तरि को समर्पित है. इसके साथ अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति के लिए यम दीप दान करते हैं. साथ ही खरीदारी के लिए ये सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि (आयुर्वेद के देवता) अपने हाथों में अमृत का कलश लेकर प्रकट हुए थे. यही कारण है कि इस दिन को धन और आरोग्य का प्रतीक माना जाता है.
2026 में धनतेरस कब ?
इस साल धनतेरस 06 नवंबर 2026 शुक्रवार को है. इस धनत्रयोदशी भी कहते हैं. माना जाता है कि अगर स्थिर लग्न (वृषभ लग्न) के दौरान धनतेरस पूजा की जाये तो लक्ष्मीजी घर में ठहर जाती है. धनतेरस पर खरीदारी का महत्व है, और सूर्यास्त के बाद ही पूजन करने शुभ होता है.
धनतेरस 2026 में शुभ मुहूर्त
साल 2026 में धनतेरस का त्योहार 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा.
त्रयोदशी तिथि का आरंभ:
6 नवंबर 2026 को शाम 05:46 बजे से
त्रयोदशी तिथि की समाप्ति: 7 नवंबर 2026 को शाम 04:36 बजे तक
धनतेरस पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त (प्रदोष काल): शाम 05:32 बजे से रात 08:09 बजे तक (अवधि: 2 घंटे 37 मिनट)
धनतेरस पर सोना खरीदने का मुहूर्त
धनतेरस पर सोना खरीदना, घर में देवी लक्ष्मी को आमन्त्रित करने के समान माना जाता है. धनत्रयोदशी के दिन सोना खरीदने का शुभ मुहूर्त 06 नवंबर को दोपहर 05.48 बजे से अगले दिन दोपहर 04:36 पी एम तक रहेगा.
धनतेरस पर खरीदारी और परंपराएं
धनतेरस के दिन कुछ विशेष चीजें खरीदना बेहद शुभ माना जाता है, जिससे घर में सुख-समृद्धि आती है. जीवन में उन्नति के द्वार खुलते हैं. व्यक्ति के जीवन में वैभव, संपत्ति में बढ़ोत्तरी होती है.
सोना, चांदी और बर्तन: इस दिन पीतल, चांदी या तांबे के बर्तन खरीदना शुभ होता है.
झाड़ू की खरीदारी: धनतेरस के दिन झाड़ू खरीदना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसे देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है जो घर से दरिद्रता को दूर करती है.
यम दीपम (Yama Deepam): धनतेरस की शाम को घर के मुख्य द्वार पर मृत्यु के देवता यमराज के लिए दक्षिण दिशा में एक दीपक (चौमुखी दीया) जलाया जाता है, ताकि अकाल मृत्यु का भय टल सके.
आरोग्य का प्रतीक है धनतेरस
ऐसी मान्यता है कि भगवान धन्वंतरि का प्राकट्यआयुर्वेद के जनक थे. पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान इसी त्रयोदशी तिथि को भगवान धन्वंतरि अवतरित हुए थे. वे अपने चार हाथों में आयुर्वेद के ग्रंथ, औषधियां, शंख और अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे.
जीवन का पहला सुख निरोगी काया
भगवान धन्वंतरि को देवताओं का वैद्य (डॉक्टर) और आयुर्वेद का देवता माना जाता है. इसलिए इस दिन उनकी पूजा मुख्य रूप से अच्छे स्वास्थ्य, लंबी आयु और बीमारियों से मुक्ति के लिए की जाती है. इसी कारण इस दिन को “राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस” (National Ayurveda Day) के रूप में भी मनाया जाता है.
धन का प्रतीक माना गया है धनतेरस
धनतेरस के इस दिन धन के देवता कुबेर जी और सुख-समृद्धि की देवी लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई वस्तु (विशेषकर सोना, चांदी, पीतल या तांबा) में 13 गुना वृद्धि होती है. यह खरीदारी केवल भौतिक धन को नहीं, बल्कि घर में आने वाली बरकत और संपन्नता को दर्शाती है.
स्वास्थ्य और धन का संबंध
शास्त्रों में माना गया है कि “पहला सुख निरोगी काया, दूजा सुख घर में हो माया.” यानी यदि स्वास्थ्य अच्छा नहीं होगा, तो संसार का सारा धन-वैभव बेकार है. धनतेरस का त्योहार हमें यही याद दिलाता है कि जीवन में धन जितना जरूरी है, उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण हमारा स्वास्थ्य (आरोग्य) है. इसलिए स्वास्थ्य की तरफ ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है.
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