धनतेरस 18 अक्टूबर दिन शनिवार को है. धनतेरस पर शनि का साया होने के कारण बर्तनों की खरीदारी करते समय सावधानी बरतें
Source : DB News Update
By : पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Dhanteras 2025: हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल 2025 में धनतेरस का त्योहार 18 अक्टूबर शनिवार के दिन पड़ रहा है. हलांकि शनिवार का दिन न्याय और कर्म के देवता माने जाते हैं. इस कारण धनतेरस पर शनि का साया है.
इस दिन खरीदारी करते समय कुछ खास बातों का विशेष ध्यान देने की जरूरत है, नहीं तो शनि की महादशा का सामना करना पड़ सकता है.
धनतेरस की पौराणिक कथा
धनतेरस कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन भगवान धनवन्तरि अमृत कलश के साथ सागर मंथन से उत्पन्न हुए हैं. इसलिए इस तिथि को धनतेरस के नाम से जाना जाता है. धन्वन्तरी जब प्रकट हुए थे तो उनके हाथो में अमृत से भरा कलश था. भगवान धन्वन्तरि कलश लेकर प्रकट हुए थे इसलिए ही इस अवसर पर बर्तन खरीदने की परम्परा है. कहीं कहीं लोकमान्यता के अनुसार यह भी कहा जाता है कि इस दिन धन (वस्तु) खरीदने से उसमें 13 गुणा वृद्धि होती है. इस अवसर पर धनिया के बीज खरीद कर भी लोग घर में रखते हैं. दीपावली के बाद इन बीजों को लोग अपने बाग-बगीचों में या खेतों में बोते हैं.
भक्तों को क्या करना चाहिए?
दीपावली की रात भी लक्ष्मी माता के सामने साबुत धनिया रखकर पूजा करें. अगले दिन प्रातः साबुत धनिया को गमले में या बाग में बिखेर दें. माना जाता है कि साबुत धनिया से हरा भरा स्वस्थ पौधा निकल आता है तो आर्थिक स्थिति उत्तम होती है. धनिया का पौधा हरा भरा लेकिन पतला है तो सामान्य आय का संकेत होता है. पीला और बीमार पौधा निकलता है या पौधा नहीं निकलता है तो आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है.
चांदी खरीदने के प्रथा
धनतेरस के दिन चांदी खरीदने की भी प्रथा है. अगर सम्भव न हो तो कोइ बर्तन खरिदे. इसके पीछे यह कारण माना जाता है कि यह चन्द्रमा का प्रतीक है जो शीतलता प्रदान करता है और मन में संतोष रूपी धन का वास होता है. संतोष को सबसे बड़ा धन कहा गया है. जिसके पास संतोष है वह स्वस्थ है सुखी है और वही सबसे धनवान है. भगवान धन्वन्तरि जो चिकित्सा के देवता भी हैं उनसे स्वास्थ्य और सेहत की कामना के लिए संतोष रूपी धन से बड़ा कोई धन नहीं है. लोग इस दिन ही दीपावली की रात लक्ष्मी गणेश की पूजा हेतु मूर्ति भी खरीदते हैं.
धनतेरस पर होती है 5 देवताओं की पूजा
कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है. धनतेरस के मौके पर मुख्य रूप से पांच देवताओं की पूजा-अर्चना की जाती है. जिसमें प्रमुख रूप से गणेश जी, मां लक्ष्मी, ब्रह्मा, विष्णु और महेश की पूजा होती है. लेकिन इस बार धनतेरस शनिवार के दिन होने के कारण शनि देव की पूजा भी अहम हो जाती है.
धनतेरस पर शनि का साया
इस साल धनतेरस शनिवार के दिन होने के कारण भूलकर भी कुछ खास वस्तुओं को खरीदने से बचना चाहिए. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस बार धनतेरस के मौके पर भूलकर भी लोहे से जुड़ी वस्तुओं को नहीं खरीदें.
दरअसल लोहे का संबंध शनि देव से होता है, इसलिए इस दिन घर में लोहे की वस्तुएं नहीं लानी चाहिए. इसके अलावा काले रंग की वस्तुएं और सरसों का तेल खरीदना भी अशुभ माना जाता है.
बर्तनों की खरीदारी से बचें
धनतेरस के शुभ अवसर पर ज्यादातर लोग स्टील के बर्तनों को खरीदते हैं, लेकिन यहां एक ध्यान देने वाली बात ये भी है कि, मार्केट में मिलने वाले स्टील के बर्तन लोहे युक्त होते हैं. ऐसे में बहुत से लोग बर्तनों की खरीदारी को लेकर असमंजस की स्थिति में हैं.
धनतेरस के मौके पर बर्तनों की खरीदारी करना शुभ माना जाता है. इसलिए बर्तन खरीदने के बाद उसे लाने की जगह उसमें जल, धनिया या मिठाई जरूर लाएं.
इसके अलावा शनिवार के दिन धनतेरस होने के कारण भूलकर भी चमड़े से बनी वस्तुओं को घर पर नहीं लाएं. इन बातों का अगर आप ध्यान रखते हैं, तो इस धनतेरस मां लक्ष्मी के साथ शनि देव की कृपा भी प्राप्त होगी.
Disclaimer: यह सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि DBNewsupdate.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
