भाद्रपद की चतुर्थी तिथि यानी 14 सितंबर से गणेश उत्सव की शुरुआत होगी. दस दिवसीय गणेशोत्सव में पूजा के लिए किन सामग्रियों की जरूरत होगी, इसकी लिस्ट अभी से तैयार कर लें.
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By : DB News Update | Edited By : प्रिंस अवस्थी
Ganesh Chaturthi Puja Samagri: गणेश चतुर्थी का त्योहार भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्दशी तक चलती है. 10 दिवसीय गणेशोत्सव के दौरान पूजा पंडाल, मंदिर और घर-घर बप्पा की मूर्ति स्थापित कर पूजा-अर्चना की जाती है. बता दें कि इस साल गणेश चतुर्थी की शुरुआथ 14 सितंबर सोमवार से हो रही है, जिसका समापन 25 सितंबर 2026 दिन शुक्रवार को होगा.
भगवान गणेश की पूजा-उपासना में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न है. इसके लिए श्रद्धालुओं को पहले से ही पूजन सामग्री तैयार कर लेना चाहिए. ताकि पूजा के दौरान किसी चीज की कमी से पूजा अधूरी न रह जाए.
यदि आप पूजा सामग्री पहले से ही तैयार रखेंगे तो स्थापना और पूजन में कोई विघ्न-बाधा नहीं आएगी. इनमें से कई चीजें आप गणेश चतुर्थी के पहले भी लाकर रख सकते हैं तो वहीं फूल, माला, पत्तियां और फल-मिठाई पूजा वाले दिन या एक दिन पूर्व भी ला सकते हैं.
गणेश मूर्ति का सही आकार कितना होना चाहिए?
घर के लिए छोटा आकार: घर के मंदिर या पूजा स्थान के लिए गणेश जी की मूर्ति का आकार बहुत बड़ा नहीं होना चाहिए. क्योंकि घर पर स्थापित मूर्ति की पूजा और नियम धर्म अलग-अलग होते हैं. इसलिए शास्त्रों गणेश मूर्ति की साइज भी निर्धारित है.
अंगूठे से लेकर 9 इंच तक: धार्मिक शास्त्र और वास्तु के अनुसार, घर में रखने वाली मूर्ति का आकार कम से कम हमारे अंगूठे की लंबाई (लगभग 1-2 इंच) से लेकर अधिकतम 9 इंच (लगभग एक बीता) तक होना चाहिए.
बड़ी मूर्तियों के नियम: 9 इंच से बड़ी मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा और दैनिक पूजा के नियम बहुत कड़े होते हैं, जिनका पालन सामान्य गृहस्थ जीवन में करना कठिन होता है. इसलिए बड़े आकार की मूर्तियां केवल सार्वजनिक पंडालों या मंदिरों के लिए ही उपयुक्त मानी जाती हैं.
गणेश चतुर्थी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 14 सितंबर 2026 को सुबह 07:06 बजे से
चतुर्थी तिथि की समापन: 15 सितंबर 2026 को सुबह 07:44 बजे तक
गणपति स्थापना व पूजा का मध्याह्न मुहूर्त: सुबह 11:02 बजे से दोपहर 01:31 बजे तक (अवधि: 2 घंटे 29 मिनट)
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:52 बजे से दोपहर 12:41 बजे तक
त्योहार की समयावधि और महत्व
गणेश चतुर्थी के दिन घरों और बड़े-बड़े पंडालों में भगवान गणेश की मिट्टी की सुंदर मूर्तियों की स्थापना (प्रतीकात्मक रूप से बप्पा का स्वागत) की जाती है और 10 दिन तक श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना करने के बाद, 11वें दिन यानी अनंत चतुर्दशी को बप्पा की मूर्तियों का विसर्जन किया जाता है, जिसके साथ उन्हें विदा किया जाता है. ऐसी मान्यता है कि इन 10 दिनों के दौरान भगवान गणेश साक्षात धरती पर आकर अपने भक्तों के दुखों को हर लेते हैं और जाते समय अपने साथ सारी परेशानियां ले जाते हैं.
गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन निषेध
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा के दर्शन नहीं करने चाहिए, क्योंकि इस दिन चंद्र दर्शन करने से व्यक्ति पर झूठे कलंक या आरोप (मिथ्या कलंक) लगने का डर रहता है.
चंद्रमा न देखने का समय- 14 सितंबर को सुबह 09:06 बजे से रात 08:04 बजे तक
गणपति स्थापना की सरल विधि
- अपने घर के उत्तर-पूर्व कोने (ईशान कोण) या पूजा स्थल को साफ करके वहां गंगाजल छिड़कें.
- एक लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और उस पर अक्षत (चावल) का आसन बनाएं.
- शुभ मुहूर्त के दौरान भगवान गणेश की मूर्ति को चौकी पर स्थापित करें.
- स्थापना के समय “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें.
- बप्पा को दूर्वा (दूब घास), मोदक, लड्डू, लाल चंदन, फूल और फल अर्पित कर धूप-दीप से आरती करें.
गणेश चतुर्थी पूजा सामग्री लिस्ट (Ganesh Pujan Item List)
गणेश जी की मिट्टी की प्रतिमा
पूजा का आसन या लकड़ी की चौकी
चौकी पर बिछाने के लिए लाल या पीला कपड़ा
भगवान के लिए वस्त्र, जनेऊ का जोड़ा,
मिट्टी और पीतल या तांबे का कलश,
नारियल और आम के पत्ते
अक्षत (चावल)
दूर्वा घास, केले के पत्ते, पान के पत्ते
लाल-पीले पुष्प, गेंदे का फूल और माला
धूप, दीपक, रुई, घी, कपूर और माचिस
पान, सुपारी, लौंग, इलायची
रोली, हल्दी, कुमकुम, सुपारी, पंचमेवा, लाल चंदन
प्रसाद के लिए मोदक, लड्डू और फल
पंचामृत के लिए (दूध, दही, शहद, घी और शक्कर)
शुद्ध जल और गंगाजल
शंख और घंटी
आरती की थाली
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