अप साइड दूसरा साइट गेज रिपेलेशमेंट कार्य के चलते लिया गया बंद करने का निर्णय, रेलवे के अिधकारियों ने सुरक्षा की दृष्टि से बंद करने का लिया निर्णय
Source : DB News Update
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Railway News, जबलपुर. पश्चिम मध्य रेल, जबलपुर मंडल के अंतर्गत जबलपुर शहर सिविल लाइन से रानीताल और कलेक्ट्रेट को जोड़ने वाला पुल नंबर 2 के अप साइड का दुसरा हाइट गेज रोड ट्रैफिक से डैमेज हो गया था, जिसे टेम्प्रेप्री लगाकर रोड यातायात चालू किया गया था.
अब उसे स्थाई बनाया जाएगा. इसके लिए सहायक मंडल इंजीनियर जबलपुर उपमंडल के कार्यक्षेत्र के अंतर्गत कार्य कराया जाएगा. इस पुल की Existing हाइट गेज से 7.50 मीटर दूर कैरब्स के तरफ शिफ्ट किया जाएगा. जिसकी Existing Bridge से दूरी 20.50 मीटर रहेगी. इसी के चलते एक दिन दिनांक 29. जून 2025 को प्रात: 10.00 से रात्रि 23.00 बजे तक पुल नं.-2 से सड़क यातायात बंद रहेगा.
वैकल्पिक व्यवस्था अंडरपास का करें उपयोग
रेल प्रशासन ने वाहन चालकों से अपील की है कि इस दौरान आने-जाने वाले की वैकल्पिक व्यवस्था अंडरपास पुल नंबर एक एवं पुल नंबर दो से आवागमन किया जा सकता है. जिससे कार्य सुचारू रूप से किया जा सके और आम आदमी के आवागमन में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े. रेलवे के अधिकारियों ने यह व्यवस्था सुरक्षा की दृष्टि से की है.
शहर के सबसे व्यस्त मार्गों में शामिल है पुल नंबर-2
रेलवे पुल नंबर-दो शहर के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग है. यह कलेक्ट्रेट, एम्पायर टॉकीज, हाईकोर्ट, मंडला रोड और मुख्य रेलवे स्टेशन तक पहुंचने का अहम रास्ता है. प्रतिदिन हजारों छोटे और बड़े वाहन इस पुल से गुजरते हैं.
पुल की चौड़ाई कम होने के कारण यहां सुबह और शाम के समय लंबा जाम लगना आम बात हो गई है। कई बार ऊंचे वाहन हाइट गेज से टकरा जाते हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। रात के समय भारी वाहन फंसने पर घंटों तक यातायात प्रभावित रहता है और लोगों को वैकल्पिक मार्गों से लंबा चक्कर लगाकर गंतव्य तक पहुंचना पड़ता है।
मदन महल अंडरब्रिज में हर बारिश के साथ लौटती है जलभराव की समस्या
मदन महल रेल अंडरब्रिज की स्थिति भी कम चिंताजनक नहीं है. बारिश शुरू होते ही यहां पानी भर जाता है और आवागमन पूरी तरह बंद करना पड़ता है. इस वर्ष पहली ही बारिश में एक कार अंडरब्रिज में फंस गई थी. इसके बाद दुर्घटनाओं से बचाव के लिए प्रशासन ने अंडरब्रिज के मुहाने पर बैरियर लगा दिया.
इसके बावजूद स्थायी जल निकासी की व्यवस्था अब तक नहीं हो सकी है. उल्लेखनीय है कि कटनी में इसी तरह की समस्या का समाधान पंप लगाकर किया जा चुका है, लेकिन जबलपुर में अब तक ऐसा कोई स्थायी इंतजाम नहीं किया गया है.
बकाया भुगतान बना विवाद की वजह
नगर निगम से राशि मिलने के बाद रेलवे ने पुल नंबर-दो के विस्तार का कार्य शुरू किया था, लेकिन निर्माण की धीमी गति और बाद में कोरोना काल के कारण परियोजना की लागत बढ़ गई. रेलवे के अनुसार कार्य पूरा करने के लिए करीब दो करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च होने का अनुमान है. अतिरिक्त राशि की मांग करते हुए रेलवे ने निर्माण कार्य रोक दिया.
हल्के वाहन निकलने के लिए जबलपुर में बने हैं 4 अंडरब्रिज
भारतीय रेलवे के मानकों के अनुसार, सामान्यतः सीमित ऊंचाई वाले सबवे या रेलवे अंडरब्रिज की मानक ऊंचाई 4.50 मीटर (लगभग 14.7 फीट) से 5.0 मीटर के बीच रखी जाती है, ताकि मध्यम आकार के व्यावसायिक वाहन भी आसानी से निकल सकें. जबलपुर शहर में रेलवे लाइन के नीचे से गुजरने वाले चार प्रमुख अंडरब्रिज (अंडरपास) हैं. शहर के आंतरिक इलाकों (जैसे मदन महल और रेलवे स्टेशन के समीपवर्ती अंडरपास) में भारी वाहनों के प्रवेश को रोकने और सुरक्षा बनाए रखने के लिए लोहे के हाइट गेज लगाए गए हैं, जिनकी ऊंचाई 3.5 मीटर से 4.5 मीटर के बीच सेट की गई है. इस वजह से यहां से केवल हल्के वाहन, कार और ऑटो ही गुजर सकते हैं.
चौड़ाई बढ़ाने पर दिया जा रहा जोर
जबलपुर शहर की यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने के उद्देश्य और भारी वाहनों के दबाव को करने के लिए अंडरपास चौड़े किए जा रहे हैं, जिससे जाम की स्थिति निर्मित न हो सके. अभी हाल में जाम की समस्या को देखते हुए रेलवे और नगर निगम द्वारा अंडरब्रिज नंबर दो सहित अन्य अंडरपास की चौड़ाई को बढ़ाकर 11 मीटर करने पर काम किया गया है. अंडरब्रिज में होने वाले जलभराव और ट्रैफिक जाम से निजात दिलाने के लिए जबलपुर में हाल ही में मदन महल रेलवे स्टेशन के ठीक ऊपर से गुजरने वाले 7 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड फ्लाईओवर (केबल-स्टे ब्रिज) का निर्माण किया गया है, जिसकी अपनी वर्टिकल ऊंचाई लगभग 12 मीटर है.
