राज्य शासन ने जबलपुर और सतना जिले के 3 गांव का नाम बदल दिया है. कुंडम अब कुण्डेश्वर धाम से पहचाना जाएगा, राज्य शासन ने अधिसूचना जारी की.
Source : DB News Update
By DB News update/edited by-supriya
एमपी न्यूज. जबलपुर. राज्य शासन ने जबलपुर और सतना जिले के 3 गांव का नाम बदल दिया है. जबलपुर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले ग्राम कुंडम का नाम परिवर्तित कर कुण्डेश्वर धाम कर दिया है ।
भारत सरकार के गृह मंत्रालय से प्राप्त अनापत्ति के के अनुसरण में राज्य शासन के राजस्व विभाग द्वारा इस बारे में अधिसूचना 26 जुलाई के राजपत्र में प्रकाशित कर दी गई थी।
कुंडम का नाम परिवर्तित कर कुण्डेश्वर धाम करने के साथ ही राज्य शासन ने सतना जिले के ग्राम कूँची का नाम बदलकर चंदनगढ़ और सतना जिले के रामपुर बघेलान तहसील के ग्राम कुड़िया का नाम बदलकर कर्णपुर किया है । राजस्व विभाग द्वारा इसकी अधिसूचना प्रकाशित कर दी गई है ।
नाम बदलने से मिलेगी प्रसिद्धि
सिहोरा विधानसभा के वर्तमान विधायक संतोष वरकडे का कहना है कि “यह मांग बहुत पहले की गई थी. हालांकि इससे बहुत परिवर्तन नहीं होगा, लेकिन यदि भगवान शिव के नाम से इस जगह का नाम रखा जा रहा है, तो इस जगह को थोड़ी प्रसिद्धी मिलेगी और सरकार की नजर में कम से कम यह जगह आ जाएगी. जिससे इस स्थान के विकसित होने की संभावनाएं बन जाएगी.
सरकार ने नाम क्यों बदला गया समझ नहीं आया?
राज्य सरकार ने इस जगह का नाम क्यों बदला है. यह किसी की समझ में नहीं आ रहा है. सिहोरा नगर पंचायत के कांग्रेस नेता अमोल चौरसिया का कहना है कि “कुडम सिहोरा विधानसभा का एक जनपद पंचायत है. सिहोरा के लोगों की मांग थी कि सिहोरा को जिला बनाया जाए. कुंडम का नाम बदलने की कभी किसी ने मांग ही नहीं की ऐसी स्थिति में राज्य सरकार ने इस जगह का नाम क्यों बदला यह उनकी समझ के परे है.
बुनियादी सुविधाओं से आज भी वंचित है जबलपुर का कुंडम
राज्य सरकार ने जबलपुर की कुंडम तहसील का नाम बदलकर कुंडेश्वर धाम कर दिया है. राज्य सरकार ने केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय से अनापत्ति लेकर यह नाम परिवर्तन किया है. बता दें कि कुंडम गांव एक छोटा सा आदिवासी गांव है. यहां 70% आबादी आदिवासी गोंड समाज की है. यह गांव जबलपुर से 35 किलोमीटर दूर है. जबलपुर से अमरकंटक जाते समय बीच में यह कस्बा पड़ता है. यह जबलपुर के बेहद पिछड़े इलाकों में से एक है. यहां अभी भी लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान रहते हैं. ज्यादातर लोग खेती-बाड़ी और मजदूरी करके ही अपना भरण पोषण करते हैं.
भगवान शंकर के नाम की वजह से पड़ा कुंडेश्वर नाम
कुंडम में भगवान शंकर का एक मंदिर है. जिसे कुंडेश्वर धाम के नाम से जाना जाता है. इस मंदिर में एक बहुत पुरानी काले रंग के पत्थर से बनी भगवान शंकर की मूर्ति विराजित है. इसी मंदिर के पास में एक कुंड है. जिससे नर्मदा नदी की एक सहायक नदी हिरण निकली है. इसलिए इस जगह को लोग एक पवित्र स्थान के रूप में मानते हैं और यहां पूजा अर्चना करने के लिए आते हैं.
एमपी का नाम बदलने पर न्यायालय ने किया फैसला
उत्तर प्रदेश सरकार की तर्ज पर एमपी में भी जिलों, शहरों, कस्बों, गांवों के नाम बदले जा रहे हैं। इसी गहमागहमी में प्रदेश के नाम में बदलाव की भी चर्चा चल पड़ी। और तो और, इसके लिए जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका तक लगा दी गई। इसमें मध्यप्रदेश को संक्षिप्त रूप से मप्र या एमपी लिखे जाने की खिलाफत की गई थी। इस पर सुनवाई करते हुए मप्र हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए दायर याचिका निरस्त कर दी। कोर्ट ने कहा कि मध्यप्रदेश को मप्र या एमपी लिखे जाने से उसका नाम नहीं बदलता बल्कि राज्य की पहचान और आसान हो जाती है। हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए यह भी कहा कि इस मामले में क्या जनहित निहित है, याचिकाकर्ता यह नहीं बता पाए।
चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा एवं जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने कहा कि न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व में शब्दों के संक्षिप्तीकरण प्रयुक्त किए जाते हैं। यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ़ अमेरिका को यूएसए और यूनाइटेड किंगडम को यूके लिखा जाता है। इस मत के साथ कोर्ट ने मध्यप्रदेश को संक्षिप्त रूप से मप्र या एमपी लिखे जाने के खिलाफ दायर याचिका निरस्त की।
