पंजीयन से शासन के खाते में जमा हुई 300 करोड़ से ज्यादा की राशि, जबलपुर के हिस्से का विकास शुल्क प्रदेश सरकार द्वारा होल्ड कर लिया गया है, जिसके कारण शहर में सभी विकास कार्य ठप पड़े हुए हैं।
Source : DB News Update
Written By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
MP जबलपुर. प्रदेश सरकार के खजाने में जिला पंजीयक कार्यालय जबलपुर द्वारा मुद्रांक शुल्क के रूप में 535 करोड़ रुपए जमा कराए गए हैं। इस मुद्रांक शुल्क में नगरीय निकाय का हिस्सा भी जुड़ा होता है, जिसे अप्रैल माह में रिलीज करना होता है, लेकिन जबलपुर के हिस्से का विकास शुल्क प्रदेश सरकार द्वारा होल्ड कर लिया गया है, जिसके कारण शहर में सभी विकास कार्य ठप पड़े हुए हैं।
आउटसोर्स एजेंसियों और ठेकेदारों का भुगतान तक नहीं हो रहा है। आए दिन नगर निगम मुख्यालय में हड़ताल और नारेबाजी हो रही है। अपनी कमी को छिपाने के लिए नगर निगम के अिधकारी आउटसाेर्स और ठेकेदारों पर ठीकरा फोड़ रहे हैं, जिससे नगर निगम की तरफ से कोई खामी नजर न आए, जबकि हकीकत यह है कि नगर निगम का खजाना पूरी तरह से खाली है और एडीबी, सीवर प्रोजेक्ट, हुडको आदि से लिए गए कर्ज का भुगतान भी नहीं हो पा रहा है।
नगर निगम की स्थिति अत्यंत दयनीय
एक तरफ नगर निगम के पास 2030 तक लोन चुकाने का बोझ है, वहीं दूसरी ओर आउटसोर्स एजेंसियों का करोड़ों रुपए भुगतान बकाया है। शासन स्तर से किसी प्रकार की मदद नहीं मिलने से नगर निगम की माली हालत खराब होती जा रही है, इस दिशा में कोई प्रयास नहीं हो रहे हैं।
करोड़ों में भुगतान लंबित
स्वच्छता का काम अटक गया है, आउटसोर्स कर्मचारियों का भुगतान नहीं हो पा रहा है। इसी तरह विद्युत देयक एवं स्वच्छता में लगे वाहनों के डीजल देयकों का भुगतान करनेे में कठिनाई हो रही है। साथ ही कर्मचारियों का वेतन हर माह 15 करोड़ से ज्यादा का हो रहा है। सेवानिवृत्त कर्मचारियों के मद में भी भुगतान लगभग 4 करोड़ का बकाया है। इस सबकी भरपाई कहाँ से होगी, कुछ कहा नहीं जा सकता है।
85 करोड़ भी नहीं मिले
विगत दिनों नगर निगम कमिश्नर द्वारा नगरीय प्रशासन विभाग काे पत्र लिखा गया था, क्योंकि नगरीय प्रशासन विभाग ने नगर निगम जबलपुर को मिलने वाली अनुदान राशि में कटौती कर दी थी। इस कटौती पर आपत्ति दर्ज करते हुए निगमायुक्त ने जबलपुर के हिस्से में आने वाली राशि की माँग की थी, लेकिन नगरीय प्रशासन विभाग भोपाल की तरफ से जबलपुर नगर निगम से इस संबंध में कोई पत्राचार नहीं किया गया, जबकि जबलपुर के हिस्से के यदि 85 करोड़ रु. मिल जाते तो विकास कार्य की बाधाएँ समाप्त हो जातीं।
यहाँ से लिया गया कर्ज
> संस्था राशि वार्षिक किश्त
> एडीबी 350 करोड़ 18 करोड़
> एमपीयूडीसीएल 30.40 करोड़ 3 कराेड़
> सीवर प्रोजेक्ट 80 करोड़ 4 करोड़
> हुडको 95.25 करोड़ 4.00 करोड़
मुद्रांक शुल्क लोन की किस्त के समय मिल जाएगा
जबलपुर शहर से शासन के खाते में जमा हो रहा मुद्रांक शुल्क का हिस्सा जबलपुर नगर निगम को मिलना है, इसके लिए पत्राचार किया गया था। शासन स्तर पर इस राशि को लोन की किस्त देने की तारीख के पहले दे दिया जाएगा। इसके अलावा कोई भी अनुदान राशि शासन द्वारा नहीं दी गई है।
जबलपुर के विकास कार्यों पर पड़ रहा असर
शासन स्तर से मुद्रांक शुल्क समय पर नहीं दिए जाने के कारण जबलपुर के सारे प्रोजेक्टों पर असर साफ देखा जा सकता है। शहर की नाले-नालियों तक का निर्माण नहीं हो पा रहा है। विभागीय अधिकारियों के पास हमेशा की तरह बजट का रोना है। नगर निगम के किसी भी विभाग में प्रदेश सरकार से सहायता नहीं मिलने से प्रभावित हैं। यहां की दयनीय हालत बड़े समय से बनी हुई है और प्रदेश सरकार के मंत्रालय में बैठे अधिकारी इस ओर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रहे हैं।
राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होने से बजट में हो रही कटौती
जबलपुर का राजनीतिक रूप से हस्तक्षेप प्रदेश सरकार पर बिल्कुल भी नहीं है, जिसके कारण हर साल बजट में कटौती हो रही है। नगर निगम को अलग से बजट का प्रावधान भी नहीं रखा गया है, जिससे विकास कार्यों को गति मिल सके। इसके बावजूद शहर के जनप्रतिनिधियों की उदासीनता बनी हुई है। शहर विकास को लेकर जिम्मेदारों के पास किसी प्रकार का रोड मैप नहीं है।
