जन्माष्टमी का पर्व 16 अगस्त को मनाया गया. कृष्ण जन्मोत्सव के 6 दिन बाद कान्हा जी की छठी भी मनाई जाती है. मध्य प्रदेश के जबलपुर में बड़े उल्लास के साथ मनाया जाता है छठी महोत्सव.
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By : DB News Update | Edited By : प्रिंस अवस्थी
Krishna Ji Ki Chhathi 2025: भगवान श्रीकृष्ण के भक्तों और संतों द्वारा बड़े उल्लास और प्रेम के साथ देश भर के मठ-मंदिरों में श्रीकृष्ण के छठी महोत्सव मनाने की परंपरा है. यह उत्सव मनाने में सबसे ज्यादा महिला का रुझान होता है. आपको बतादें कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी यानी कृष्ण जन्मोत्सव के बाद भी कई त्योहार मनाए जाते हैं? जो कान्हा से जुड़े हुए होते हैं. जैसे दही हांडी, बछ बारस आदि. इन्हीं में से छठी पर्व भी सबसे महत्वपूर्ण पर्व है. जोकि जन्माष्टमी के छह दिन बाद मनाया जाता है.
जन्माष्टमी की तरह ही भक्तों को श्रीकृष्ण की छठी का भी बेसब्री से इंतजार रहता है. इस दिन भी लोग व्रत रखकर पूजा-पाठ करते हैं, मंदिरों को सजाया जाता है और भजन-कीर्तन होते हैं. साथ ही कान्हा को कई चीजों का भोग भी लगाया जाता है. लेकिन भक्तों में कान्हा जी की छठी की तिथि को लेकर असमंजस है.
बाल गोपाल की छठी कब मनाएं
हिंदू धर्म में जिस प्रकार से नवजात के जन्म पर छह दिन बाद छठी का पूजन किया जाता है. ठीक उसी प्रकार से कृष्ण जन्मोत्सव (जन्माष्टमी) के छह दिन कान्हा जी का भी छठी पूजन किया जाता है. मान्यता है कि, छठी पूजन करने से नवजात शिशु कई तरह की आपदाएं और नकारात्मकता से बचे रहते हैं.
जन्माष्टमी के बाद कान्हा जी की छठी गुरुवार 21 अगस्त 2025 को मनाई जाएगी. पंचांग के अनुसार श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है और छह दिन बाद यानी भाद्रपद कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को कान्हा की छठी मनाई जाती है.
नरसिंह मंदिर जबलपुर में महिलाओं ने मनाई छठी
भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के छठवें दिन भगवान श्रीकृष्ण की छठी जबलपुर शास्त्रीब्रिज गोरखपुर में बड़ी धूमधाम के साथ मनाई गई. इस आयोजन को महिला मंडली द्वारा आयोजित किया गया. महिलाओं ने भगवान श्रीकृष्ण का भोग लगाया और प्रसाद ग्रहण किया. इस अवसर पर जगद्गुरु डॉ. स्वामी नरसिंहदेवाचार्य जी महाराज ने सभी भक्तों को छठी महोत्सव की बधाई और शुभकामनाएं दी. यह आयोजन हर वर्ष भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के बाद मनाया जाता है. देश भर की सभी मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव और छठी पर्व मनाने की परंपरा है.
भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का किया गया मंचन
नरसिंह मंदिर शास्त्री ब्रिज गोरखपुर जबलपुर में भगवान श्रीकृष्ण के छठी महोत्सव के अवसर पर महिला मंडल, अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के तत्वावधान में भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का मंचन किया गया. भगवान श्रीकृष्ण के चरित्र का चित्रण किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में कलाकार शामिल हुए और इस आयोजन का आनंद उठाया. इस कार्यक्रम में बड़ा ही उल्लास देखने को मिला, जिसमें महिला मंडली ने भगवान श्रीकृष्ण का विभिन्न प्रकार की वेशभूषा और पोशाक से आकर्षक रूप देने का प्रयास किया.
इस विधि से करें कान्हा जी का छठी पूजन
- कान्हा जी की छठी के लिए अभिजीत मुहूर्त सबसे शुभ है, जोकि सुबह 11 बजकर 58 मिनट से दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगा. इस मुहूर्त में आप कान्हा जी का छठी पूजन कर सकते हैं. वहीं कुछ लोग शाम के समय भी छठी पूजन करते हैं.
- पूजा के लिए सबसे पहले स्वयं स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें. इसके बाद पंचामृत और शुद्ध जल से कान्हा को भी स्नान कराएं. कान्हा को सुंदर वस्त्र और आभूषण पहनाकर उनका विशेष श्रृंगार करें.
- पूजा में कान्हा को मौसमी फल, फूल, मिठाई, चंदन, अक्षत, रोली, सुपारी, धूप, दीप, तुलसी और नैवेद्य आदि अर्पित करें.
- साथ ही कान्हा को उनकी प्रिय चीजें जैसे माखन-मिश्री, मालपुआ, पंचामृत, खीर, कढ़ी चावल आदि का भोग भी लगाएं.
- पूजा के दौरान ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नम: या श्रीकृष्ण के मंत्रों का उच्चारण करते रहें.
- आखिर में आरती करें और भक्तों में प्रसाद का वितरण करें.
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