ग्रहण लगना एक खगोलीय घटना होती है. जनवरी में सौरजक ग्रहण और अगस्त में पूर्ण सूर्य ग्रहण लगेगा.
Source : DB News Update
By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Surya Grahan 2026: सूर्य ग्रहण एक खगोलीय घटना है. जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच में आता है तो सूर्य की रोशनी को पूर्ण या आंशिक रूप से ढक लेता है. इसी को सूर्य ग्रहण कहते हैं. हिंदू पंचाग की गणना के अनुसार साल 2026 में कुल 2 सूर्य ग्रहण की खगोलीय घटना घटेगी. जिसमें एक आंशिक तो एक पूर्ण ग्रहण होगा. आइए जानते हैं उनकी तारीख और समय के बारे में.
17 फरवरी 2026 को पहला गोल सूर्य ग्रहण
साल 2026 में दो सूर्य ग्रहण लगेंगे. जिसमें 17 फरवरी 2026 को पहला गोल सूर्य ग्रहण लगेगा. जिसका समय करीब 12 बजकर 13 मिनट पर लगने की संभावना है.
हालांकि 17 फरवरी 2026 को लगने वाला सूर्य ग्रहण अंगूठी के आकार में दिखाई देगा. क्योंकि चंद्रमा पूरी तरह से सूर्य को ढक नहीं पाएगा.
17 फरवरी को लगने वाला गोल सूर्य ग्रहण पूर्ण रूप से अंटार्कटिका और आंशिक रूप से दक्षिण अफ्रीका में दिखाई देगा.
12 अगस्त 2026 को भी लगेगा सूर्य ग्रहण
हिंदू पंचाग के अनुसार साल 2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण, पूर्ण ग्रहण होने वाला है. जो 12 अगस्त 2026 को लगेगा. हालांकि स्थानीय समय क्षेत्र के मुताबिक सूर्य ग्रहण अलग-अलग समय पर दिखाई देगा. उत्तरी अटलांटिक और यूरोप में पूर्ण सूर्य ग्रहण शाम 5 से 6 बजे के करीब दिखाई देगा.
12 अगस्त 2026 को लगने वाला दूसरा पूर्ण सूर्य ग्रहण पूर्ण रूप से आइसलैंड, ग्रीनलैंड, उत्तरी स्पेन और आंशिक रूप से कई देशों में दिखाई देगा.
भारत में सूतक लगेगा या नहीं?
चूंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहां सूतक काल भी मान्य नहीं होगा. इसका मतलब है कि मंदिरों के कपाट सामान्य समय के अनुसार ही खुलेंगे और बंद होंगे. ग्रहण का मंदिरों की दिनचर्या पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा.
ज्योतिषीय प्रभाव
यह सूर्य ग्रहण कर्क राशि और आश्लेषा नक्षत्र में लग रहा है. इसलिए कर्क राशि के लोगों और आश्लेषा नक्षत्र में नक्षत्र में जन्मे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है. हालांकि यह ग्रहण सभी 12 राशियों को किसी न किसी रूप में प्रभावित करेगा.
सूर्य ग्रहण के प्रकार
पूर्ण सूर्य ग्रहण – चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह से कवर कर लेता है, और दिन में अंधेरा छा जाता है.
आंशिक सूर्य ग्रहण – चंद्रमा सूर्य का कुछ भाग ही ढकता है.
सौरजक ग्रहण – चंद्रमा सूर्य के मध्य आता है, लेकिन चंद्रमा का आकार छोटा होने के कारण सूर्य का किनारा किसी अंगूठी की तरह लगता है.
हाइब्रिड सूर्य ग्रहण – सूर्य ग्रहण कुछ जगहों से पूर्ण तो कुछ जगहों से सौरजक ग्रहण जैसा दिखता है.
सूर्य ग्रहण शुभ है या अशुभ
धार्मिक दृष्टि से ग्रहण लगना अशुभ माना जाता है, इसलिए इस दौरान किसी भी तरह के शुभ कार्य नहीं किये जाते हैं. कहते हैं ग्रहण के समय सूर्य का शुभ प्रभाव और शक्तियां कम हो जाती हैं. इसी कारण से इस दौरान किए गए शुभ कार्यों का अच्छा फल नहीं मिल पाता. सूर्य ग्रहण के समय पूजा-पाठ, शादी-ब्याह, नए कार्य की शुरुआत, गृह प्रवेश समेत सभी शुभ और मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है.
सूर्य ग्रहण क्या होता है?
सूर्य ग्रहण वह स्थिति है जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीध में होते हैं और चंद्रमा सीधे सूर्य और पृथ्वी के बीच से गुजरता है, जिससे हमारे ग्रह पर छाया पड़ती है और सूर्य के कुछ प्रकाश को अवरुद्ध कर देता है. वैज्ञानिकों द्वारा इन तीनों खगोलीय पिंडों की स्थिति को सिज़ीजी कहा जाता है.
वलयाकार सूर्य ग्रहण क्या होता है?
वलयाकार सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी से अपनी सबसे दूर की स्थिति में होता है. चूंकि यह सूर्य से छोटा है, इसलिए यह उसे पूरी तरह से नहीं ढक पाता है, जिससे सूर्य के प्रकाश का एक पतला, चमकीला बाहरी वलय दिखाई देता है जिसे ‘अग्नि वलय’ कहा जाता है.
सूर्य ग्रहण में क्या करना चाहिए और क्या नहीं?
- सूर्य ग्रहण में ईश्वर की मन ही मन आराधना करनी चाहिए.
- इस दौरान भगवान शिव और सूर्य देव के मंत्रों का जाप करना चाहिए.
- ग्रहण के दौरान भोजन नहीं करना चाहिए और न ही सोना चाहिए.
- ग्रहण काल के बाद घर की सफाई करनी चाहिए और पूरे घर में गंगाजल छिड़कना चाहिए.
- ग्रहण के बाद दान जरूर करना चाहिए.
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