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DB News Update | Divya Bhumi News > Blog > Madhya Pradesh > दम तोड़ रही प्रदेश स्तरीय सॉइल टेस्टिंग लैब
Madhya Pradesh

दम तोड़ रही प्रदेश स्तरीय सॉइल टेस्टिंग लैब

DB News
Last updated: 25/12/2025 8:52 PM
DB News
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4 Min Read
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MP जबलपुर पचपेढ़ी स्थित जल संसाधन विभाग में रखीं टेस्टिंग मशीनें भी खा रहीं जंग, अधिकारी भी रहते हैं गायब

Source : DB News Update  

Contents
MP जबलपुर पचपेढ़ी स्थित जल संसाधन विभाग में रखीं टेस्टिंग मशीनें भी खा रहीं जंग, अधिकारी भी रहते हैं गायबआधुनिक मशीनें पॉलीथिन में कैदअपनी मर्जी से आते-जाते हैं अधिकारी, कर्मचारीप्रयोगशाला का उद्देश्य

By : DB News Update  | Edited By: प्रिंस अवस्थी

MP Water Resources Department News: सिविल लाइन पचपेढ़ी स्थित मध्यप्रदेश जल संसाधन विभाग की प्रदेश स्तरीय लैब स्टाफ की कमी से जंग खा रही है. यहां न तो सरकारी प्रोजेक्टों का स्थल, जल परीक्षण हो रहा है और न बांध-नहर बनाने वाले प्रोजेक्टों के आसपास की मिट्‌टी और धातु की जांच हो रही है, जबकि इस कार्यालय से जबलपुर, रीवा, होशंगाबाद (नर्मदापुरम) तक चलने वाले प्रोजेक्टों की मिट्‌टी-जल और धातुओं का परीक्षण किया जाता था, जिससे जल संसाधन विभाग के अंतर्गत होने वाले सभी विकास कार्यों की सुरक्षा, स्थिरता और उस प्रोजेक्ट की आयु सुनिश्चित हो सकती है. इसी कारण इन सभी प्रोजेक्टों की मिट्‌टी-धातु और जल परीक्षण सरकारी प्रयोगशाला में कराए जाने का प्रावधान था, जिससे जल संसाधन के अंतर्गत बनने वाले बांध-नहर मजबूत बन सकें, क्योंकि इन कामों में गलत सामग्री और अनुपयुक्त मिट्‌टी का उपयोग किए जाने से परियोजना पर सीधे असर पड़ता है.

आधुनिक मशीनें पॉलीथिन में कैद

जल संसाधन विभाग के अंतर्गत हिरण जल संसाधन का भूजल विद संभागीय, भू-जल सर्वेक्षण और मिट्‌टी परीक्षण प्रयोगशाला का कार्यालय संचालित है. यहां उपसंचालक और कार्यपालन यंत्री स्तर तक के अधिकारी बैठते हैं, लेकिन अब जिस प्रयोगशाला में मिट्‌टी और धातु का परीक्षण होता था, उस प्रयोगशाला की आधुनिक मशीनों को पॉलीथिन के अंदर कैद कर दिया गया है. कई मशीनें जंग खा रही हैं, जिन्हें कबाड़ की तरह एक जगह पर रख दिया गया है. यही हालत जल परीक्षण प्रयोगशाला की भी है. पड़ताल के दौरान इस प्रयोगशाला की मशीनें बंद पड़ी मिलीं. यहां आने वाले पानी के सैंपल की जांच रीवा की प्रयोगशाला से कराई जा रही है.

अपनी मर्जी से आते-जाते हैं अधिकारी, कर्मचारी

इन दोनों दफ्तरों में उपसंचालक, कार्यपालन यंत्री और टेक्नीशियन व अन्य कर्मचारी कब आते हैं और कब नहीं आते, इसकी मॉनिटरिंग नहीं हो रही है. इन दोनों दफ्तरों के अधिकांश कर्मचारी सेवानिवृत्त हो गए हैं और जो बचे हैं, उनमें भी काम करने की लालसा देखने को नहीं मिल रही है. कार्यालय केवल रजिस्टर में हस्ताक्षर करने दफ्तर आते हैं, इसके अलावा उनके पास कोई काम देखने को नहीं मिल रहा है.

प्रयोगशाला का उद्देश्य

  • >   प्रयोगशाला यह सुनिश्चित करती है कि सभी निर्माण कार्य सुरक्षित, कुशल और पर्यावरण के अनुकूल तरीके से किए जाएं.
  • > परीक्षणों के माध्यम से प्रयोगशाला जल संसा -धन परियोजनाओं की सुरक्षा, स्थिरता और दीर्घायु सुनिश्चित करने में मदद करती है.
  • > गलत सामग्री या अनुपयुक्त मिट्टी का उपयोग परियोजना के विफलता का कारण बन सकती है.
  • >  जल संसाधन से संबंधित परियोजनाओं, जैसे कि बांधों, नहरों और अन्य बुनियादी ढांचों के निर्माण के लिए उपयोग की जाने वाली मिट्टी (मृदा) और सामग्रियों की गुणवत्ता और उपयुक्तता सुनिश्चित करती है.
  • >  निर्माणस्थलों से मिट्टी के नमूनों का विश्लेषण करना ताकि उनकी भौतिक और रासायनिक विशेषताओं (जैसे कि pH स्तर, नमी की मात्रा, पोषक तत्व की स्थिति) का पता लगाया जा सके.
  • >   नींव या तटबंधों के लिए क्या मिट्टी विशिष्ट इंजीनियरिंग उद्देश्यों के लिए उपयुक्त है.
  • >  समस्याग्रस्त मिट्टी (जैसे क्षारीय या अम्लीय मिट्टी) की पहचान करना और उन्हें सुधारने के तरीके सुझाना.

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