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DB News Update | Divya Bhumi News > Blog > Religion > प्रकृति को संरक्षित करने का संदेश देता है गोवर्धन पर्व! जानिए मुहूर्त और महत्व
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प्रकृति को संरक्षित करने का संदेश देता है गोवर्धन पर्व! जानिए मुहूर्त और महत्व

DB News
Last updated: 05/10/2025 10:34 PM
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5 Min Read
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हिंदू धर्मावलंबी बड़ी धूम-धाम के साथ करते हैं गोवर्धन पूजा, दिवाली के अगले दिन मनाया जाने वाला है त्योहार.

By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By: प्रिंस अवस्थी

Contents
हिंदू धर्मावलंबी बड़ी धूम-धाम के साथ करते हैं गोवर्धन पूजा, दिवाली के अगले दिन मनाया जाने वाला है त्योहार.क्यों मनाया जाता है गोवर्धन पर्व?कब मनाया जाएगा गोवर्धन पूजा का पर्वसही तिथि और शुभ मुहूर्तगोवर्धन पूजा का धार्मिक महत्वभगवान कृष्ण की लीलाअहंकार पर विजय का प्रतीकसामाजिक और सांस्कृतिक महत्वसामुदायिक एकतासामाजिक बंधनगौ पूजा का महत्व

Govardhan Puja 2025: गिरिराज पर्वत को उठाकर भगवान श्रीकृष्ण ने संदेश देने की यह कोशिश की है कि प्रकृति का यदि संरक्षण किया जाए तो बारिश अवश्य होगी. प्राकृतिक रूप से हमें सबल रहने की जरूरत है. किसी के प्रति आश्रित रहने की जरूरत नहीं है. भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत के नीचे ब्रजवासियों को आश्रय देते हुए कुछ ऐसा ही संदेश दिया है. भगवान श्रीकृष्ण के द्वारा की गई यह लीला गोवर्धन पूजा के रूप में प्रचलित हो गई, जो हर वर्ष दिवाली के अगले दिन मनाने वाला प्रमुख त्योहार बन गया. कई लोग इसे अन्नकूट के नाम से भी जानते हैं. यह त्योहार भगवान कृष्ण के हाथों इंद्रदेव का घमंड तोड़े जाने की याद में मनाया जाने वाला त्योहार है.

ऐसी मान्यता है कि कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों को इंद्र देव द्वारा की जा रही मूसलाधार बारिश से बचाया था. इसी तारतम्य में कई लोग घर में गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत की प्रतिमा बनाते हैं और उसकी पूजा की जाती है और विभिन्न प्रकार के शाकाहारी व्यंजन का भोग लगाया जाता है.

इसका महत्व एकता, सामाजिक समरसता और प्रकृति के सम्मान में है, क्योंकि इस दिन अन्नकूट का भोग लगाकर प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है और गायों व बैलों की भी पूजा की जाती है.

क्यों मनाया जाता है गोवर्धन पर्व?

गोवर्धन का त्योहार भगवान कृष्ण द्वारा इंद्र देवता के प्रकोप से ब्रजवासियों को गोवर्धन पर्वत उठाकर बचाया था, इसकी याद में मनाया जाता है. इस दिन भगवान कृष्ण की पूजा की जाती है और उन्हें 56 भोग लगाए जाते हैं.

यह त्योहार प्रकृति और मानवता के रिश्ते को दर्शाता है और इसे ‘अन्नकूट’ के नाम से भी जाना जाता है.

कब मनाया जाएगा गोवर्धन पूजा का पर्व

हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष 2025 में बुधवार, 22 अक्टूबर को गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाएगा. यह कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा तिथि के अनुसार निर्धारित है, जिसकी शुरुआत 21 अक्टूबर 2025 को शाम 5:54 बजे से होकर 22 अक्टूबर को रात 8:16 बजे समाप्त होगी.

इस पर्व का मुख्य शुभ मुहूर्त सुबह 6:26 बजे से 8:42 बजे तक और शाम 3:29 बजे से 5:44 बजे तक है.

सही तिथि और शुभ मुहूर्त

दिनांक: बुधवार, 22 अक्टूबर 2025

प्रातःकाल मुहूर्त: सुबह 6:26 बजे से सुबह 8:42 बजे तक

सायंकाल मुहूर्त: दोपहर 3:29 बजे से शाम 5:44 बजे तक

गोवर्धन पूजा का धार्मिक महत्व

भगवान कृष्ण की लीला

इस त्योहार को लेकर श्रीमद् भागवत कथा में विस्तृत उल्लेख किया गया है. यह त्योहार भगवान कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों को इंद्रदेव की मूसलाधार बारिश से बचाने की कथा को याद दिलाता है.

अहंकार पर विजय का प्रतीक

इंद्रदेव के अहंकार को तोड़ने के लिए भगवान कृष्ण द्वारा की गई लीला विजय का प्रतीक है, जो सिखाता है कि धार्मिकता के सामने अहंकार और आत्मकेंद्रितता का कोई महत्व नहीं है.

सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व

सामुदायिक एकता

यह त्योहार समाज में एकता और प्रेम का संदेश देने वाला है, जहाँ लोग मिलकर सामूहिक रूप से भगवान को अन्नकूट का भोग लगाते हैं और आपस में मिल-बैठकर प्रसाद ग्रहण करते हैं.

सामाजिक बंधन

इस त्योहार के माध्यम से यह बताने की कोशिश की गई है कि विभिन्न समुदायों को एक साथ लाकर एक मंच पर खड़ा किया जा सकता है, जिससे सामाजिक बंधन मजबूत होते हैं. 

गौ पूजा का महत्व

अन्नकूट का यह पर्व गायों का वध, गोसेवा का प्रतीक भी माना गया है. इस दिन गौ माता की पूजा की जाती है, जो स्वास्थ्य और समृद्धि दोनों प्रदान करती है, क्योंकि गाय दूध और कृषि दोनों में योगदान देती हैं.

Disclaimer: यह सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि DBNewsupdate.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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