कार्तिक मास के कृष्णन पक्ष की चतुर्थी के दिन महिलाएं अपने पति की लम्बी आयु के लिए निर्जला व्रत रखती है इस दिन को करवाचौथ कहते हैं.
By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Karva Chauth 2025: इस वर्ष 2025 में करवा चौथ सर्वार्थ सिद्धि और शिव योग में मनाया जाने वाला है. यह पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के दिन है, इस दिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु के लिए निर्जला व्रत रखेंगी. करवाचौथ के दिन रात में चांद का दीदार करने और चलनी से पति का चेहरा देखने के बाद महिलाएं यह व्रत तोड़ेगीं.
करवा चौथ व्रत का शुभ मुहूर्त
2025 में चतुर्थी तिथि 9 अक्टूबर 2025 को रात 10:54 मिनट पर प्रारंभ होगी. जिसका समापन अगले दिन यानी 10 अक्टूबर 2025 को शाम 07:38 मिनट पर होगा.
उदया तिथि के अनुसार करवा चौथ का व्रत 10 अक्टूबर 2025 को रखा जाएगा.
करवा चौथ पर शुभ संयोग
इस साल करवा चौथ पर सिद्धि योग का शुभ संयोग बन रहा है. साथ ही चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में विराजमान रहेंगे. इस संयोग में करवा माता की आराधना करने से वैवाहिक जीवन में चल रही समस्याएं समाप्त होंगी, और रिश्तों में मिठास बनी रहेगी. ये व्रत जीवन साथी के लिए समर्पण, प्रेम और त्याग का भाव दिखाता है.
महिलाएं पति के सुखी जीवन, सौभाग्य, अच्छी सेहत और लंबी उम्र के लिए दिनभर निराहार और निर्जला रहती हैं. इस रिश्ते में जब तक एक-दूसरे के बीच विश्वास है, तब तक प्रेम बना रहता है. अगर जीवनसाथी पर अविश्वास का भाव जाग जाता है तो ये रिश्ते में खटास आ जाती है.
करवा चौथ शुभ मुहूर्त
करवा चौथ का व्रत शुक्रवार 10 अक्टूबर 2025
चतुर्थी तिथि आरंभ- 9 अक्टूबर 2025 को रात 10:54 मिनट से
चतुर्थी तिथि समाप्त- 10 अक्टूबर 2025 को शाम 07:38 मिनट पर
उदया तिथि के अनुसार करवा चौथ का व्रत शुक्रवार 10 अक्टूबर 2025 को रखा जाएगा.
करवा चौथ पूजा मुहूर्त
पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 05:57 बजे से शाम 07:11 बजे तक.
चंद्र दर्शन का समय
मान्यता है करवा चौथ के दिन चंद्र दर्शन मनवांछित फल प्रदान करने वाला होता है. इस बार करवा चौथ को यानि 10 अक्टूबर को चांद रात 08:13 मिनट पर निकलेगा. ऐसे में इसी समय व्रतधारी महिलाएं चंद्र दर्शन कर सकती हैं. वहीं चंद्र दर्शन के बाद व्रती महिलाएं व्रत खोलेगी.
लाल रंग के कपड़े माने जाते हैं शुभ, मिलेगा पति का प्यार
ऐसी मान्यता है कि करवाचौथ के दिन व्रत रखने वाली महिलाएं यदि लाल रंग के कपड़े पहनती हैं तो उन्हें जिंदगी भर पति का प्यार मिलता है. माना जाता है कि लाल रंग गर्मजोशी का प्रतीक है और मनोबल भी बढ़ाता है. साथ ही लाल रंग प्यार का प्रतीक भी माना जाता है.
लाल रंग में महिलाएं अधिक सुंदर और आकर्षित दिखती हैं एवं सबके आकर्षण का केंद्र बनती हैं. नीले, भूरे और काले रंग के कपड़े पहनने की मनाही होती है. क्योंकि ये अशुभता के प्रतीक माना गया है.
छलनी की ओट से चंद्रदर्शन
करवा चौथ को लेकर मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा की किरणें सीधे नहीं देखना होती हैं, उसके मध्य किसी पात्र या छलनी द्वारा देखे जाने की परंपरा है, क्योंकि चंद्रमा की किरणें अपनी कलाओं में विशेष प्रभाव डालती हैं.
लोक परंपरा के अनुसार चंद्रमा पति-पत्नी के संबंध को उजास से भर देती हैं. चूंकि चंद्र के तुल्य ही पति को भी माना गया है, इसलिए चंद्रमा को देखने के बाद तुरंत उसी छलनी से पति को देखा जाता है. इसका एक और कारण बताया जाता है कि चंद्रमा को भी नजर न लगे और पति-पत्नी के संबंध में भी मधुरता बनी रहे.
करवा चौथ की पूजन सामग्री
पूजन सामग्री इस प्रकार है- मिट्टी का टोंटीदार करवा व ढक्कन, पानी का लोटा, गंगाजल, दीपक, रूई, अगरबत्ती, चंदन, कुमकुम, रोली, अक्षत, फूल, कच्चा दूध, साथ ही दही, देसी घी, शहद, चीनी, हल्दी, चावल, मिठाई, चीनी का बूरा, मेहंदी, महावर, सिंदूर, कंघा, बिंदी, चुनरी, चूड़ी, बिछुआ, गौरी बनाने के लिए पीली मिट्टी, लकड़ी का आसन, छलनी, आठ पूरियों की अठावरी, हलुआ और दक्षिणा के पैसे आदि एक जगह पर रख देना चाहिए.
करवा चौथे के दिन की पूजा विधि
- करवा चौथ पर दिनभर व्रत रखा जाता है और रात में चंद्रमा की पूजा की जाती है.
- पूजा-स्थल को खड़िया मिट्टी से सजाया जाता है और पार्वती की प्रतिमा की भी स्थापना की जाती है.
- पारंपरिक तौर पर पूजा की जाती है और करवा चौथ की कथा सुनाई जाती है.
- करवा चौथ का व्रत चांद देखकर खोला जाता है, उस मौके पर पति भी साथ होता है.
- दीए जलाकर पूजा की शुरुआत की जाती है.
- करवा चौथ की पूजा में जल से भरा मिट्टी का टोंटीदार कुल्हड़ यानी करवा, ऊपर दीपक पर रखी विशेष वस्तुएं, श्रंगार की सभी नई वस्तुएं जरूरी होती है.
- पूजा की थाली में रोली, चावल, धूप, दीप, फूल के साथ दूर्बा अवश्य रखना चाहिए. शिव, पार्वती, गणेश, कार्तिकेय की मिट्टी की मूर्तियों को भी पाट पर दूर्बा में बैठाते हैं.
- बालू या सफेद मिट्टी की वेदी बनाकर भी सभी देवताओं को विराजित करने का विधान है.
- अब तो घरों में चांदी के शिव-पार्वती पूजा के लिए रख लिए जाते हैं.
- थाली को सजाकर चांद को अर्घ्य दिया जाता है. फिर पति के हाथों से मीठा पानी पीकर दिन भर का व्रत खोला जाता है. उसके बाद परिवार सहित खाना होता है.
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