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DB News Update | Divya Bhumi News > Blog > Religion > “रेवा के दर्शन मात्र से, नर भक्त हो त्रय आग से”
Religion

“रेवा के दर्शन मात्र से, नर भक्त हो त्रय आग से”

DB News
Last updated: 25/01/2026 12:02 AM
DB News
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9 Min Read
नर्मदा जी को नर्मदा पच्चीसी सुनाने से पापों का क्षय होता है.
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नर्मदा भक्तों को पूजा करने के बाद नर्मदा पच्चीसी का पाठ करना होता है, जिससे पापी मनुष्य को मुक्ति मिलती है.

Source : DB News Update  

Contents
नर्मदा भक्तों को पूजा करने के बाद नर्मदा पच्चीसी का पाठ करना होता है, जिससे पापी मनुष्य को मुक्ति मिलती है.नर्मदा पच्चीसी

By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी

Narmada Jayanti 2026: नर्मदा जयंती आज 25 जनवरी को मनाई जाएगी. इसकी तैयारी नर्मदा के घाटों देखने को मिलने लगी है. जगह-जगह भोग-भण्डारे का आयोजन किया जा रहा है और नर्मदा भक्त शहर के एमपी जबलपुर में जगह-जगह मां नर्मदा की प्रतिमा रखकर पूजा-अर्चना भी शुरू कर दी है. लेकिन बहुत कम भक्तों को इस बात की जानकारी होगी कि नर्मदा मां को पूजन करने के दौरान नर्मदा पच्चीसी सुनाने से मनोकामनाओं की पूर्ति होती है. आइए हम आज नर्मदा के उन पच्चीस पदों के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं, जो जगद्गुरु डॉ. स्वामी श्यामदेवाचार्य जी महाराज द्वारा लिखे गए हैं और मां नर्मदा की आराधना की गई है.

नर्मदा पच्चीसी

मानस भवन में भक्तजन आराधना जिसकी करें।

सलिला मां नर्मदा हरैं ।।

जो पुण्य मन-बुद्धि-काया- कलिमा को दूर करदे शर्मदे ।

नर्मदे हर, नर्मदे हर, नर्मदे हर नर्मदे ।।1।।

पाप क्षय संताप हरती शान्ति सुख की दायिनी ।

मन-बुद्धि निर्मल, हृदय कोमल, भक्ति दे अनपायिनी ।।

तेरी कृपा से भक्त से भक्तजन, भवसिन्धु तरते वर्मदे ।

नर्मदे हर, नर्मदे हर, नर्मदे हर नर्मदे ।।2 ।।

सरस्वती कुरुक्षेत्र में, हरिद्वार गंगा पावनी ।

हरक्षेत्र के हरघाट में रेवा पुनीत सुहावनी ।।

दस कोटि तीरथ सर्वदा रेवा के तट पर राजहीं ।

भक्त परिकरमा करत फल सर्व तीरथ पावहीं।।3।।

सप्त दिन यमुना नहावै, तीन दिन लौ सुरसती ।

दो दिवस लौ गोमती, गोदावरी से जो गती ।।

गंगा निमज्जन पाप हरती, जो सुलभ हो भाग से।

रेवा के दर्शन मात्र से, नर भक्त हो त्रय आग से ।। 4 ।।

त्रैलोक्य विजयी रावणा, उन्मुक्त लड़ने आ गया।

माहिष्मती में हारकर अपमान का फल पा गया ।।

मद चूर होता ही रहा, रेवा के तट पर सर्वदा ।।

शम्भु की पावन सुता, जय जयति जय-जय नर्मदा । 15 ।।

तेरी कृपा से नर्मदे, जो तीर तेरे रह रहे ।

ज्यों मातु अंचल में सुरक्षित, सुख कोई न रहे ।।

पाता है वांछित भोग वह, जो नर्मदे हर नित कहे ।

दुधमुहा शिशु ज्यों मातु से, भरपूर पावै जो चहै ।।6।।

आदि सरिता, दिव्य सरिता, नर्मदे सरितां वरा ।

मेकलसुता, शंकर प्रिया, जगदाम्बिका तनया परा ।।

सुरनाग मुनिजन सेविता, औ स्वामि गणपति अग्रजा ।

नर्मदे हर मंत्र पावन, जो कहै पावै मजा ।। 7 ।।

आदि शंकर भये जगदगुरु, नर्मदे हर जाप से ।

गौरी शंकर भी लहैं सुख, नर्मदे हर जाप से ।।

नर्मदे हर मंत्र पान, काटता भवजाल को ।

नर्मदा की छत्र छाया में, नहीं भय काल को ।।8 ।।

पुण्य सलिला नर्मदा के, भूरि पावन तीर में ।

राजा बली ने हरि चरण धोया था रेवा नीर में ।

आदि गंगा थी प्रगट वह, धरनि,-धारन बलि किया।

देव दुर्लभ पुण्यदा अनुराग से बलि ने लिया ।।9 । ।

शुक्ल पावन सप्तमी माधव महीना की छवि।

नर्मदा के तीर की शोभा कहैं अब को कवि ।।

तब से सदा ही जान्हवी, आती बड़े ही चाव से ।

अर्चनामय अंक लिती, पांव छूती भाव से ।।10।।

गंगा की महिमा है बड़ी, श्री नर्मदा आशीष से ।

जल शिव रहें, गंगा रहै शिव शीश पे ।।

नर्मदा जल वीचु पाहन, तुल्य शंकर मानिये ।

नर्मदा सरिता सनातन, सिद्धिदा पहचानिये ।।11 ।।

भव प्रचल भयभीत मुनिवर, भूख से व्याकुल हुए।

मां नर्मदा की छत्र छाया, पाइ मुनि हर्षित हुए ।।

कर शीश धरि आशीष दिये, अतिशय कृपा रेवा कियो ।

अतृप्त परमानन्दमय, चिरंजीव मुनि जब पद दियो ।।12 ।।

दुग्ध की धारा बही जब कपिल मुनि के सामने ।

मां का अनुग्रह देखि गदगद्, हस्त जोड़े राम थे ।।

ममता मयी मां नर्मदा जन वत्सला माने सभी ।

रेवा शरण जो जाएगा, आनन्द पायेगा अभी । । 13 ।।

त्रयशूल धृत त्रिपुरारि त्रिभुवन नाथ आज त्रिअम्बकम् ।

आसीन लीन स्वरूप शिव, शुचि भूमि सामरकण्टकम् ।।

स्वेद सीकर भाल से, शिव के विसर्जित जब हुआ ।

अति दिव्य कन्या भूमिजा, रेवा का उद्भव तब हुआ ।।14।।

सुरकाज हित बह-बह चली, जल बिन्दु धारा है गई।

धन्य धरती को करन, कन्या सुकरता बन गई ।

गिरिराज मेकल की सुता, पश्चिम दिशा को चल पड़ी।

जय जयति जय जय नर्मदे, महिमा तुम्हारी है बड़ी । ।15 ।।

अंग रक्षक की तरह, विन्ध्यादि दो पर्वत खड़े।

ओंकार नाथ सुमध्य में निज अंगजा हित पथ जड़े।।

निज बाचि कर उत्ताल जल निधि नर्मदा स्वागत कृतम् ।

जय जयति जय-जय नर्मदे, निज नाथ पद पंकज धृतम् ।।16 ।।

सुर नाथ मुनि गंधर्व साधक, सिद्ध जलचर जे बने ।

ते संग शिव के भंग माया दिव्य जल निर्मल बने ।।

ते कच्छ, मच्छ बिहाई भौतिक, देह पार्षद तनु धरै ।

दिव्य जीवन, दिव्य गति क्यों न तरैं ।।17 ।।

नर्मदा के तीर, नीर, समीर कीरति को कहै ।

जेहि कूल रहि अघमूल, तजि नर फूल पुन्नन को लहै ।।

नर्मदा की कीच लखि, मृत मीच साची मानिये ।

जय जयति जय-जय नर्मदे, मां का अनुग्रह जानिये ।। 18 ।।

नर्मदा के तीर बसि, स्नान करते नीर में ।

पाई न केहि गति पतित पावन, मुक्ति पाई पीर में ।।

गोविन्द पाद मुनीन्द्र प्रिय यह, नर्मदा का तीर है।

आदि शंकर को यहीं पर था पिलाया क्षीर है ।।19 ।।

नर्मदा जल आज बर्धक, बुद्धि बल सबको दिया ।

बहु काल गुरु ढिंग वास करि, आचार्य शंकर ने पिया।।

करिदिग्विजय आचार्य शंकर, जगद्गुरु सद्गुरु बने ।

श्री नर्मदा की ही कृपा से, धर्म धारक वे बने।।20।।

कल्याणदास उदास, अग्रिम पंक्ति संतन में सदा ।

सेवा, तपस्या, साधना की मूर्ति जीवित सर्वदा । ।

परमार्थ करने के लिये, थैली है दीन्ही नर्मदे ।

नर्मदे हर, नर्मदे हर, नर्मदे हर नर्मदे । । 21 ।।

श्रीराम ने जाबालि को अनुचित कथन कृत तर्जदा ।

तजि चित्रकूट मुनीश रेवा तीर करते अर्चदा ।।

जबालिपुर के पास ही भृगु कच्छ भेड़ाघाट है ।

संगमरमर की धरोहर नर्मदा के हाट है ।। 22 ।।

जाबालिपुर के पास ही ऊपर खिरैनी घाट है ।

पूर्व में आश्रम लिया जो नर्मदा का पाट है ।।

शीत वर्षा, वात से आघात जिसको हो रहा।

तजि आस मां की शरण में, अनजान में ही रो रहा । ।23 ।।

चारो दिशाओं में अंधेरा, राह कुछ सूझे नहीं ।

मां की कृपा का रूप हमने तब कहीं देखा सही ।।

मंत्र दीक्षा अभय मुद्रा, कर कमल सिर पर धरा ।

श्याम की बनि गई धरा पर, आज सब संकट टरा ।। 24।।

पर्णशाला राम की रेवा के तट पर थी बनी ।

है आज उस स्थान गीताधाम की शोभा बनी।।

जाबालिपुर की चेतना, चिंताहरण यह क्षेत्र है ।

कुम्भ मेला नर्मदा का, दिव्य दृश्य सुनेत्र है । । 25।।

दोहा

रेवा तट वास करि, नित्य करइ असनान ।

हर क्षण दर्शन जो करइ, तेहि कर मिटइ अयान ।।

श्रीनर्मदा को नाम जो, बोले सहित सनेह ।

ताकी सारी आपदा, मिटती निः संदेह ।।

रेवा सम इस जगत में और न तीरथ कोइ ।

भूखे को भोजन मिले, अन्त समय गति होइ ।।

नर्मदा पच्चीसी प्रेम से, पाठ करै जो कोइ ।

रेवा का दर्शन मिले, कृपा पात्र सो होइ ।।

संकलन- जगद्गुरु डॉ. स्वामी श्यामदेवाचार्य जी महाराज,

गीताधाम, ग्वारीघाट, जबलपुर मध्य प्रदेश

Disclaimer: यह सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि DBNewsupdate.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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