नर्मदा के दोनों तट पर असख्यं साधु-संत तपस्या में लीन हैं और नर्मदा अष्टक के माध्यम से नर्मदा की आराधना कर रहे हैं. आज नर्मदा जयंती के अवसर पर उसी नर्मदा अष्टक के रहस्य का गायन करने के लिए हम बताने जा रहे हैं.
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By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Narmada Jayanti 2026: हिंदू धर्म में नर्मदा नदी को जीवित नदी का दर्जा दिया गया है. इनकी आराधना करने से भक्तों को मनचाहे फल की प्राप्ति होती है. नर्मदा के 5 किमी दूरी का क्षेत्र पवित्र क्षेत्र घोषित है. जिसके कारण नर्मदा के तट पर मांस-मदिरा का बिक्रय प्रतिबंधित है. नर्मदा नदी की इसी पवित्रता के चलते शासन-प्रशासन के द्वारा स्वच्छता, शुद्धता बनाए रखने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है. ग्रन्थों में ऐसी मान्यता है कि नर्मदा के दोनों तट पर विलुप्त अवस्था में बड़ी संख्या में तपस्वी साधु-संत तपस्या करने में लीन हैं. उनकी भक्ति में साधु-संतों द्वारा जिस नर्मदा अष्टक का गायन प्रतिदिन किया जाता है, आज हम उसी नर्मदा अष्टक से आपको अवगत कराने करा रहे हैं. जिससे नर्मदा जयंती के दिन आप नर्मदा मां की आराधना कर सकें और आप भी नर्मदा अष्टक से नर्मदा मां को पुकार सकें. आइए नर्मदा अष्टक के माध्यम से नर्मदा मां को पुकारते हैं.
।। नर्मदाष्टक ।।
सविन्दु सिंधु सुस्खलत्रंग भंग-रंजितं,
द्विषत्सु पापाजात-जातकारि वारि संयुतम् ।
कृतान्त – दूतकालभूत-भीतिहारि वर्मदे,
त्वदीय पाद पंकजं नमामि देवी नर्मदे ।।
त्वदम्बुलीन- दीन-मीन दिव्यसम्प्रदायकं
कलौ मलौघ-भारहारि सर्वतीर्थनायकम,
सुमत्स्य कच्छ नक्र चक्र चक्रवाक शर्मदे ।
त्वदीय पाद पंकजं नमामि देवी नर्मदे ।।
महागभीर नीरपूर पापधूत भूतलं,
ध्वनत् समस्त पातकारि दरितापदाचलम्,
जगल्लये महाभये मृकण्डुसूनु हर्म्यदे ।
त्वदीय पाद पकंजं नमामि देवी नर्मदे ।।
गतं तदैव में भयं त्वदम्बुवीक्षितं यदा,
मृकण्डसुनु शौनकासुरारि सेवि सर्वदा,
पुनर्भवाब्धि जन्मजमभवाब्धि दुःख वर्मदे ।
त्वदीय पाद पंकजं नमामि देवी नर्मदे ।।
अलक्ष लक्ष किन्नरामरासुरादि पूजितं,
सुलक्ष नीरतीर धीर पक्षि लक्षकूजितं,
वशिष्ठशिष्ट पिप्पलाद कर्दमादि शर्मदे ।
त्वदीय पाद पंकजं नमामि देवी नर्मदे ।।
सनत्कुमार- नाजिकेत कश्यपात्रि-षटपदै,
धृतं स्वकीयमानसेषु नारदादि षट्पदैः,
रवीन्दु – रन्तिदेव – देवराज-कर्म-शर्मदे ।
त्वदीय पाद पंकजं नमामि देवी नर्मदे ।।
अलक्षलक्ष- लक्षपाप-लक्षसार सायुधं,
ततस्तु जीव जन्तु-तन्तु भुक्ति मुक्ति दायकं,
विरंचि विष्णु शंकरं स्वकीयधाम वर्मदे ।
त्वदीय पाद पंकजं नमामि देवी नर्मदे ।।
अहोऽमृदं स्वनंश्रुतं महेश केशजा तटे,
किरात सूत वाडवेषु पंडिते शठे नटे,
दुरन्त पाप ताप हारि सर्वजन्तु शर्मदे ।
त्वदीय पाद पंकजं नमामि देवी नर्मदे ।।
इदन्दु नर्मदाष्टकं त्रिलाकमेव ये सदा,
पठन्ति ते निरन्तरं न यान्ति दुर्गतिं कदा
सुलभ्य देह दुर्लभं महेशधाम गौरवं,
पुनर्भवा नरा न वैं विलोकयन्ति रौरवम् ।
त्वदीय पाद पंकजं नमामि देवी नर्मदे ।।
।। इति नर्मदा अष्टकम् ।।
॥ नर्मदा मां की आरती ॥
ॐ जय जगदानन्दी, मैया जय आनंद कन्दी।
ब्रह्मा हरिहर शंकर रेवा, शिव हरि शंकर रुद्री पालन्ती॥
ॐ जय जगदानन्दी…॥
देवी नारद शारद तुम वरदायक,अभिनव पदचण्डी।
सुर नर मुनि जन सेवत,सुर नर मुनि शारद पदवन्ती॥
ॐ जय जगदानन्दी…॥
देवी धूमक वाहन राजत, वीणा वादयन्ती।
झूमकत झूमकत झूमकत, झननन झननन रमती राजन्ती॥
ॐ जय जगदानन्दी…॥
देवी बाजत ताल मृदंगा, सुरमण्डल रमती।
तोड़ीतान तोड़ीतान तोड़ीतान, तुरड़ड़ तुरड़ड़ तुरड़ड़ रमती सुरवन्ती॥
ॐ जय जगदानन्दी…॥
देवी सकल भुवन पर आप विराजत, निशदिन आनन्दी।
गावत गंगा शंकर, सेवत रेवाशंकर तुम भव मेटन्ती॥
ॐ जय जगदानन्दी…॥
मैया जी को कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
अमरकंठ में विराजत, घाटन घाट कोटी रतन जोती॥
ॐ जय जगदानन्दी…॥
मैया जी की आरती निशदिन पढ़ि गावें, हो रेवा जुग जुग नर गावें।
भजत शिवानंद स्वामी, जपत हरि मन वांछित फल पावें॥
ॐ जय जगदानन्दी…॥
।। दैनिक प्रार्थना ।।
अब सौंप दिया इस जीवन का, सब भार तुम्हारे हाथों में ।
है जीत तुम्हारे हाथों में, और हार तुम्हारे हाथों में ।।
मेरा निश्चय बस एक यही, इक बार तुम्हारे हाथों में।
अर्पण कर दूं दुनिया भर का, सब प्यार तुम्हारे हाथों में ।।
जो जग में रहूं तो ऐसे रहूं, ज्यों जल में कमल का फूल रहे।
मेरे सब गुण-दोष समर्पित हों, करतार तुम्हारे हाथों में ।।
मेरे सब गुण-दोष समर्पित हों, भगवान तुम्हारे हाथों में ।।
यदि मानव का मुझे जन्म मिले, तब चरणों का पुजारी बनूं।
इस पूजक की इक-इक रग का, हो तार तुम्हारे हाथों में।।
जब-जब संसार का कैदी बनूं, निष्काम भाव से कर्म करूं।।
फिर अंत समय में प्राण तजूं, निराकार तुम्हारे हाथों में।
फिर अन्त समय में प्राण तजूं, साकार तुम्हारे हाथों में ।।
हममें और तुझमें बस भेद यही, मैं नर हूं तुम नारायण हो ।
मैं हूं संसार के हाथों में, संसार तुम्हारे हाथों में।
अब सौंप दिया इस जीवन का, सब भार तुम्हारे हाथों में ।
है जीत तुम्हारे हाथों में, और हार तुम्हारे हाथों में ।।
Disclaimer: यह सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि DBNewsupdate.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

