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DB News Update | Divya Bhumi News > Blog > Religion > सर्वार्थ सिद्धि योग में है महाशिवरात्रि, जानें कब करें शिव का रुद्राभिषेक?
Religion

सर्वार्थ सिद्धि योग में है महाशिवरात्रि, जानें कब करें शिव का रुद्राभिषेक?

DB News
Last updated: 31/01/2026 9:36 PM
DB News
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9 Min Read
मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में गौरीघाट स्थित गीताधाम में विराजित भगवान पारदेश्वर महादेव.
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महाशिवरात्रि के दिन इस बार दो शुभ योग बन रहे हैं. जिसमें भगवान शिव का पूजन करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होगी. 15 फरवरी को है शिवरात्रि, पारद और स्फटिक के अलावा कौन से शिवलिंग की करें पूजा.

Source : DB News Update  

Contents
महाशिवरात्रि के दिन इस बार दो शुभ योग बन रहे हैं. जिसमें भगवान शिव का पूजन करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होगी. 15 फरवरी को है शिवरात्रि, पारद और स्फटिक के अलावा कौन से शिवलिंग की करें पूजा.2026 की महाशिवरात्रि के शुभ योगमहाशिवरात्रि पर क्या करें?चार प्रहर की पूजा का विधानचार प्रहर की पूजा का समयमहामृत्युंजय मंत्र का जप करने से भय-चिंता से मिलती है मुक्तिभगवान शिव का अभिषेक इन चीजों से करेंपूजन विधिमहाशिवरात्रि की पौराणिक कथा

By : एस्ट्रोलॉजर पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By:  प्रिंस अवस्थी

Mahashivratri 2026: भगवान भोलेनाथ फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि के दिन शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए. इस तिथि को महाशिवरात्रि के रूप में जाना जाने लगा. इस साल 2026 में महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी को पड़ रहा है. शिवपुराण के मुताबिक भगवान भोलेनाथ का शिवलिंग के रूप में अवतार  ब्रह्मा और विष्णु का विवाद शांत कराने के लिए हुआ था. मान्यता है कि इस पर्व पर भगवान शिव का पूजन करने से मनोवाच्छित फलों की प्राप्ति होती है. महाशिवरात्रि के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और त्रियोदशी युक्त चतुर्दशी जैसे दो शुभ योग बन रहे हैं. इस दिन व्रत, पूजा और विधि-विधान से रुद्राभिषेक करने से कई गुना फलों की प्राप्ति होती है.

ऐसी मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान भोलेनाथ पृथ्वी पर मौजूद सभी शिवलिंग में विराजमान रहते हैं, इसलिए महाशिवरात्रि के दिन की गई शिव की उपासना फलदायी है.

2026 की महाशिवरात्रि के शुभ योग

15 फरवरी महाशिवरात्रि के दिन शाम 5.06 बजे चतुर्दशी शुरू होगी, जो 16 फरवरी को शाम 5.35 बजे तक है. इस दिन सुबह 7.08 से शाम 7.48 बजे तक सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है. सर्वार्थ सिद्धि योग ज्योतिष में एक अत्यंत शुभ योग माना गया है. जिसका अर्थ है सभी इच्छाओं की पूर्ति करने वाला योग. यह विशेष वार (दिन) और निश्चित नक्षत्रों के संयोग से बनता है,  इस कारण 15 फरवरी को त्रियोदशी युक्त चतुर्दशी में महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा.

ऐसी मान्यता है कि इस दिन व्यापार, वाहन खरीदना, खरीदारी करने से निश्चित रूप से सफलता मिलती है. यह योग बाधाओं को दूर करता है और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है.

वहीं उत्तराषाढा और श्रवण नक्षत्र का शुभ संयोग बना रहेगा. व्यतीपात योग बनेगा, जो पूरे दिन रहने वाला है. कुंभ राशि में सूर्य, बुध, राहु और शुक्र का संयोग चतुर्ग्रही योग का निर्माण करेंगे.

महाशिवरात्रि पर क्या करें?

  • महाशिवरात्रि के दिन सुबह स्नान करने के बाद शिव मंदिर जाकर जल अभिषेक कराना चाहिए.
  • भक्तों को अपने  घर पर हाथ के अंगूठे के बराबर शिवलिं रखकर रुद्राभिषेक कराना चाहिए.
  • शिवलिंग में ओम नम: शिवाय मन में बोलते हुए बेलपत्र अर्पण करना चाहिए.
  • घर पर यदि शिवलिंग में स्थापना करना चाहते हैं तो उनके लिए महाशिवरात्रि का दिन शुभ है.
  • शिव मंदिरों में बड़े शिवलिंग की स्थापना की जाती है, जो शुभ है.
  • शिवलिंग के साथ गणेश जी, देवी पार्वती, कार्तिकेय स्वामी और नंदी की छोटी सी प्रतिमा रखकर पूजा करनी चाहिए.
  • शिवलिंग पत्थर, मिट्‌टी, सोना, चांदी, पीतल के शुभ माने जाते है.
  • पूजा-पाठ के लिए ये धातु शुभ नहीं मानी जाती हैं. इस कारण एल्युमीनियम, स्टील या लोहे के शिवलिंग की पूजा करने से बचना चाहिए.
  • स्फटिक और पारद के शिवलिंग भी घर में स्थापित कर सकते हैं.
  • शिव परिवार की पूजा एक साथ करने से पूजा का फल जल्द कई गुना मिलता है.

चार प्रहर की पूजा का विधान

  • शास्त्रीय मान्यता के अनुसार चार प्रहर की साधना का विशेष महत्व है. प्रत्येक प्रहर में भगवान शिव की उपासना के अलग-अलग प्रकार का वर्णन है.
  • पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यथा श्रद्धा, यथा प्रहर, यथा स्थिति और यथा उपचार के अनुसार साधना करनी चाहिए.
  • चार प्रहर की साधना से धन, यश, प्रतिष्ठा और समृद्धि प्राप्त होती है जिनके जीवन में संतान संबंधी बाधा हो रही हो, उन्हें भी यह साधना अवश्य करनी चाहिए.

चार प्रहर की पूजा का समय

प्रहर       पूजा का समय

प्रथम प्रहर : सायं 06:15 बजे से रात्रि 09:28 बजे तक

द्वितीय प्रहर : रात्रि 09:29 बजे से मध्यरात्रि 12:41 बजे तक

तृतीय प्रहर : मध्यरात्रि 12:42 बजे से 16 फरवरी  प्रातः03:54 बजे तक

चतुर्थ प्रहर : 16 फरवरी , प्रातः03:55 बजे से प्रातः 07:07 बजे तक

महामृत्युंजय मंत्र का जप करने से भय-चिंता से मिलती है मुक्ति

महाशिवरात्रि पर शिव पूजा करते समय में अपनी मनोकामना के अनुसार मंत्र जप करना चाहिए. इस मंत्र के जप से अनजाना भय और चिंता दूर होती है. महामृत्युंजय मंत्र की वजह से शिव जी की विशेष कृपा मिलती है, जिससे जीवन में सुख-शांति बनी रहती है.

महामृत्युंजय मंत्र- ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिंपुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।

भगवान शिव का अभिषेक इन चीजों से करें

  • महाशिवरात्रि पर्व के दिन शिवलिंग पर शहद से अभिषेक करना शुभ होता है.  ऐसा करने से श्रद्धालु के कार्य जीवन में आ रही सभी समस्याएं दूर हो जाती है और भगवान शिव की कृपा बनी रहती है.
  • दही से भगवान शिव का रुद्राभिषेक करने से आर्थिक क्षेत्र में आ रही सभी परेशानियां दूर हो जाती है.
  • गन्ने के रस से भगवान शिव का अभिषेक करने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं.
  • भगवान शिव का रुद्राभिषेक करते समय 108 बार ‘ॐ पार्वतीपतये नमः’ मंत्र का जाप करना चाहिए. ऐसा करने से जीवन में अकाल संकट नहीं आता है.

पूजन विधि

  • महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव को पंचामृत से स्नान करा कराएं.
  • केसर के 8 लोटे जल चढ़ाएं.
  • पूरी रात्रि का दीपक जलाएं.
  • चंदन का तिलक लगाएं.
  • बेलपत्र, भांग, धतूरा, गन्ने का रस, तुलसी, जायफल, कमल गट्टे, फल, मिष्ठान, मीठा पान, इत्र व दक्षिणा चढ़ाएं. 
  • सबसे बाद में केसर युक्त खीर का भोग लगा कर प्रसाद बांटें.

महाशिवरात्रि की पौराणिक कथा

शिवपुराण के मुताबिक एक बार ब्रह्मा-विष्णु के बीच विवाद हो गया. झगड़े की वजह ये थी कि दोनों ही देवता खुद को श्रेष्ठ बता रहे थे. जब दोनों देवता दिव्यास्त्रों से युद्ध शुरू करने वाले थे, ठीक उसी समय भगवान शिव लिंग रूप में इनके सामने प्रकट हो गए. शिव जी ने कहा कि आप दोनों में से जो भी इस लिंग का छोर (अंत) खोज लेगा, वही श्रेष्ठ माना जाएगा. ये बात सुनकर एक छोर की ओर ब्रह्मा जी और दूसरे छोर की ओर विष्णु जी चल दिए.

बहुत समय तक ब्रह्मा-विष्णु अपने-अपने छोर की ओर आगे बढ़ते रहे, लेकिन उन्हें लिंग का अंत नहीं मिला. उस समय ब्रह्मा जी खुद को श्रेष्ठ घोषित करने के लिए एक योजना बनाई. ब्रह्मा ने एक केतकी का पौधा लिया और उससे झूठ बोलने के लिए कहा कि वह शिव-विष्णु के सामने बोले कि ब्रह्मा जी ने लिंग का अंत खोज लिया है. ब्रह्मा केतकी के पौधे को लेकर शिव जी के पास पहुंचे, विष्णु जी भी वहां आ गए और उन्होंने कहा कि मैं इस लिंग का अंत नहीं खोज सका.

ब्रह्मा ने कहा कि मैंने इस लिंग का अंत खोज लिया है, ये बात आप केतकी के पौधे से भी पूछ सकते हैं. केतकी ने भी भगवान के सामने झूठ बोल दिया. ब्रह्मा जी का झूठ सुनते ही शिव जी क्रोधित हो गए. उन्होंने कहा कि आपने झूठ कहा है, इसलिए आज से आपकी कहीं भी पूजा नहीं होगी और केतकी ने आपके झूठ में साथ दिया, इसलिए इसके फूल मेरी पूजा में वर्जित रहेंगे. इसके बाद विष्णु जी सर्वश्रेष्ठ घोषित हो गए. ये घटना फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की ही मानी जाती है, इसलिए इस तिथि पर महाशिवरात्रि पर्व मनाने की परंपरा है.

Disclaimer: यह सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि DBNewsupdate.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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