CJI ने कहा- ‘ऐसा मत कीजिए, हम पीछे जा रहे हैं…’ केंद्र को नया ड्राफ्ट तैयार करने के निर्देश, देशभर में नियमों का हो रहा है विरोध
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By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
UGC New Rules 2026: यूजीसी के नियमों पी सुप्रीम रोक लग गई है. कोर्ट ने आज गुरुवार 29 जनवरी 2026 को यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों को लेकर सुनवाई की थी. जिस पर अगले आदेश तक रोक लगा दी गई है. CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या की बेंच ने कहा कि इसके प्रावधान स्पष्ट नहीं हैं और इनका गलत इस्तेमाल हो सकता है. याचिकाकर्ताओं ने कहा कि नया नियम भ्रम पैदा करता है.
कोर्ट ने यह टिप्पणी मृत्युंजय तिवारी, एडवोकेट विनीत जिंदल और राहुल दीवान की याचिकाओं पर की, जिनमें आरोप लगाया गया है कि नए नियम जनरल कैटेगरी के छात्रों के साथ भेदभाव करते हैं. UGC ने 13 जनवरी को अपने नए नियमों को नोटिफाई किया था. इनका देशभर में विरोध हो रहा है.
यूजीसी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा
सुप्रीम कोर्ट ने अब केंद्र सरकार और UGC को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. साथ ही नियमों का ड्राफ्ट फिर से तैयार करने का निर्देश दिया. कोर्ट ने कहा कि इस मामले में अगली सुनवाई अब 19 मार्च को होगी. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि फिलहाल 2012 के UGC नियम देशभर में लागू रहेंगे.
नए नियमों का गलत इस्तेमाल हो सकता है
यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों पर अगले आदेश तक रोक लगाते हुए CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या की बेंच ने कहा कि इसके प्रावधान स्पष्ट नहीं हैं और इनका गलत इस्तेमाल हो सकता है.
सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख कमेंट्स
- कोर्ट ने पूछा कि जब ‘भेदभाव’ की परिभाषा पहले से सभी तरह के भेदभाव को कवर करती है, तो ‘जाति-आधारित भेदभाव’ को अलग से परिभाषित करने की जरूरत क्यों पड़ी?
- कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि रेगुलेशंस में रैगिंग को क्यों शामिल नहीं किया गया, जबकि यह कैंपस में एक बड़ी समस्या है.
- CJI ने कहा- अनुसूचित जातियों में भी कई लोग अब आर्थिक रूप से समृद्ध हो चुके हैं. हमने अब तक जो जातिविहीन समाज की दिशा में प्रगति की है, क्या हम अब फिर से पीछे जा रहे हैं?
- CJI ने अलग-अलग जातियों के लिए अलग हॉस्टल बनाने के प्रस्ताव पर कड़ी आपत्ति जताई. उन्होंने कहा- भगवान के लिए ऐसा मत कीजिए. हम सब साथ रहते थे, आज इंटर-कास्ट मैरिज भी होती हैं. भारत की एकता शैक्षणिक संस्थानों में भी दिखनी चाहिए.
पहले इस पूरे मामले को समझें
UGC के नए कानून का नाम है- ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन्स, 2026.’ इसके तहत कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में SC, ST और OBC छात्रों के खिलाफ जातीय भेदभाव रोकने के लिए कई निर्देश दिए गए थे.
UGC नए नियमों के तहत, कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में विशेष समितियां, हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग टीमें बनाने का निर्देश दिया गया. ये टीमें SC, ST और OBC छात्रों की शिकायतों को देखेंगी. सरकार का कहना है कि ये बदलाव उच्च शिक्षा संस्थानों में निष्पक्षता और जवाबदेही लाने के लिए किए गए हैं.
हालांकि, सवर्ण जाति के स्टूडेंट्स का आरोप है कि UGC ने जाति आधारित भेदभाव की गैर-समावेशी परिभाषा अपनाई है और इससे कॉलेजों में अराजकता पैदा होगी. सवर्ण जाति के स्टूडेंट्स का आरोप है कि नए नियमों में सवर्ण छात्र ‘स्वाभाविक अपराधी’ बना दिए गए हैं. इनसे उनके खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा मिलेगा.
क्या हैं UGC के नए नियम?
- हर कॉलेज में ईक्वल अपॉर्च्यूनिटी सेंटर यानी EOC बनेगा.
- EOC पिछड़े और विंचित छात्रों को पढ़ाई, फीस और भेदभाव से जुड़ी मदद देगा.
- हर कॉलेज में समता समिति बनानी होगी, जिसके अध्यक्ष कॉलेज के प्रमुख होंगे.
- कमेट में SC, ST, OBC, महिलाएं और दिव्यांग शामिल होंगे. इस कमेटी का कार्यकाल 2 साल होगा.
- कॉलेज में इक्वलिटी स्क्वाड भी बनेगा, जो भेदभाव पर नजर रखेगा.
- भेदभाव की शिकायत पर 24 घंटे में मीटिंग जरूरी होगी. 15 दिन में रिपोर्ट कॉलेज प्रमुख को देनी होगी.
- कॉलेज प्रमुख को 7 दिन में आगे की कार्रवाई शुरू करनी होगी.
- EOC हर 6 महीने में कॉलेज को रिपोर्ट देगा.
- कॉलेज को जातीय भेदभाव पर हर साल UGC को रिपोर्ट भेजनी होगी.
- UGC राष्ट्रीय निगरानी कमेटी बनाएगा. नियम तोड़ने पर कॉलेज की ग्रांट रोकी जा सकती है.
- कॉलेज के डिग्री, ऑनलाइन और डिस्टेंस कोर्स पर रोक लग सकती है.
- गंभीर मामलों में UGC की मान्यता भी रद्द हो सकती है.

