भारत सरकार का LPG प्रोडक्शन बढ़ाने के आदेश दिए हैं.मध्य प्रदेश के जबलपुर में 14.2 किलोग्राम की LPG गैस अब 919.50 रुपए में मिलेगी. पहले एक रसोई गैस सिलेण्डर की रिफिलिंग 859.50 रुपए की थी.
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By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
lpg cylinder price increased: केंद्र सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर के दाम बढ़ा दिए हैं और 60 रुपए महंगा कर दिया है. मध्य प्रदेश के जबलपुर में 859.50 पैसे मे रिफिलिंग सिलेण्डर मिलता था. वह 60 रुपये बढ़कर अब 919.50 पैसे में मिलेगा. वहीं दिल्ली में 14.2 किलोग्राम की LPG गैस अब 913 रुपए में मिलेगी. पहले एक रसोई गैस सिलेण्डर की रिफिलिंग 853 रुपए में होती थी. वहीं 19 किग्रा वाले कॉमर्शियल सिलेंडर में 115 रुपए का इजाफा किया गया है. यह सिलेण्डर अब 1883 रुपए का मिलेगा. बढ़ी हुई कीमतें 7 मार्च से लागू हो गई है.
इससे पहले सरकार ने 8 अप्रैल 2025 को घरेलू सिलेंडर के दामों में 50 रुपए का इजाफा किया था. यानी ये बढ़ोतरी करीब एक साल बाद की गई है. वहीं 1 मार्च 2026 को कॉमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम 31 रुपए तक बढ़ाए गए थे.
अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग के चलते देश में गैस किल्लत
सरकार ने गैस के दामों में बढ़ोत्तरी ऐसे वक्त की है जब अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग चल रही है और देश में गैस किल्लत की आशंका जताई जा रही है. यदि हालात काबू नहीं हुए तो रसोई गैस सिलेण्डर के दाम और भी बढ़ने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है. हलांकि सिलेंडर की किल्लत रोकने के लिए LPG उत्पादन बढ़ाने के आदेश दिए गए हैं.
सरकार ने इमरजेंसी पावर इस्तेमाल करते दिए आदेश
मीडिया रिपोर्ट से पता चल रहा है कि सरकार ने 5 मार्च को इमरजेंसी पावर इस्तेमाल करते हुए देश की सभी ऑयल रिफाइनरी कंपनियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया था.
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव से गैस की सप्लाई प्रभावित हो सकती है. इसी खतरे को देखते हुए सरकार ने यह आदेश जारी किया है. इसमें कहा गया है कि अब रिफाइनरियां प्रोपेन और ब्यूटेन का इस्तेमाल सिर्फ रसोई गैस बनाने के लिए करेंगी.
कंज्यूमर्स को बिना रुकावट गैस सिलेंडर की सप्लाई
बताया जा रहा है कि सभी कंपनियों को प्रोपेन और ब्यूटेन की सप्लाई सरकारी तेल कंपनियों को करनी होगी. सरकारी तेल कंपनियों में इंडियन ऑयल (IOC), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) शामिल है. इसका मकसद कंज्यूमर्स को बिना रुकावट गैस सिलेंडर की सप्लाई है.
सप्लाई संकट की 2 वजह
‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का लगभग बंद होना
मीडिया में चल रहीं खबरों से पता चला है कि भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का बंद होना है. ये करीब 167 किमी लंबा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है. ईरान जंग के कारण यह रूट अब सुरक्षित नहीं रहा है. खतरे को देखते हुए कोई भी तेल टैंकर वहां से नहीं गुजर रहा है.
दुनिया के कुल पेट्रोलियम का 20 प्रतिशत हिस्सा यहीं से गुजरता है. सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश भी अपने निर्यात के लिए इसी पर निर्भर हैं. भारत अपनी जरूरत का 50 प्रतिशत कच्चा तेल और 54 प्रतिशत एलएनजी इसी रास्ते से मंगाता है. ईरान खुद इसी रूट से एक्सपोर्ट करता है.
प्लांट पर ड्रोन हमले से LNG का प्रोडक्शन रुका
पिछले हफ्ते अमेरिका-इजराइल ने ईरान पर स्ट्राइक की थी. इसके जवाब में ईरान ने UAE, कतर, कुवैत और सऊदी जैसे देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और पोर्ट्स को निशाना बनाया है.
ईरान के ड्रोन हमले के बाद भारत को गैस सप्लाई करने वाले सबसे बड़े देश कतर ने अपने LNG प्लांट का प्रोडक्शन रोक दिया है. इससे भारत में गैस की सप्लाई घट गई है. भारत अपनी जरूरत की 40 प्रतिशत LNG (करीब 2.7 करोड़ टन सालाना) कतर से ही आयात करता है.
सरकार को NG कंपनियों ने लिखी चिट्ठी
गैस की किल्लत को देखते हुए ‘एसोसिएशन ऑफ सीजीडी एंटिटीज’ (ACE) ने सरकारी कंपनी गेल (GAIL) को पत्र लिखकर स्पष्टता मांगी है. कंपनियों का कहना है कि अगर कतर से आने वाली सस्ती गैस नहीं मिली, तो उन्हें ‘स्पॉट मार्केट’ से महंगी गैस खरीदनी पड़ेगी.
कीमतों में अंतर
स्पॉट मार्केट में गैस की कीमत फिलहाल 25 डॉलर प्रति यूनिट पहुंच गई है, जो कॉन्ट्रैक्ट वाली गैस से दोगुनी से भी ज्यादा है.
EV में शिफ्ट होंगे लोग
कंपनियों को डर है कि अगर CNG के दाम बढ़े, तो लोग परमानेंटली EV की ओर शिफ्ट हो जाएंगे, जिससे गैस सेक्टर को नुकसान होगा.

