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22 सितंबर से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत! जानें शुभ मुहूर्त, कलश स्थापना विधि

DB News
Last updated: 19/09/2025 11:41 PM
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8 Min Read
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माता रानी इस बार हाथी पर सवार होकर आ रही है. ऐसे में ज्योतिषाचार्य से जानिए नवरात्रि से जुड़ी तमाम जानकारियां.

By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा  | Edited By: प्रिंस अवस्थी

Shardiya Navratri 2025: हिंदू धर्मावलंबियों के आराधना का पर्व शारदीय नवरात्रि  पर मां दुर्गा पूजा 22 सितंबर 2025 से शुरू होने जा रहा है. 1 अक्टूबर को दुर्गा नवमी के साथ नवरात्रि का समापन भी होगा. इस बार ये पर्व 9 दिन नहीं बल्कि 10 दिनों का होगा. ज्योतिषीय गणना की मानें तो ये अद्भुत संयोग लगभग 9 साल बाद बनने जा रहा है.

Contents
माता रानी इस बार हाथी पर सवार होकर आ रही है. ऐसे में ज्योतिषाचार्य से जानिए नवरात्रि से जुड़ी तमाम जानकारियां.By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा  | Edited By: प्रिंस अवस्थीनवरात्रि में तृतीया तिथि रहेगी दो दिनदेवी चंद्रघंटा की दो दिन होगी पूजाइस साल हाथी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गाक्यों ज्ञान का प्रतीक हैं मां दुर्गानवरात्रि घटस्थापना मुहूर्तकलश स्थापनाकलश स्थापना की सामग्रीकलश स्थापना कैसे करें?शारदीय नवरात्रि तिथि

इससे पहले 2016 में भी नवरात्रि 10 दिनों की थी. ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा ने बताया कि इस बार 9 की बजाय 10 दिन की शारदीय नवरात्रि होगी, क्योंकि नवरात्रि की एक तिथि में वृद्धि होने के कारण शारदीय नवरात्रि 22 सितंबर से 2 अक्टूबर तक है.

बतादें कि इस बार तृतीया तिथि की वृद्धि हुई है. जिसकी वजह से 24 और 25 सितंबर को तृतीया तिथि रहेगी. इस कारण शारदीय नवरात्रि का समापन 2 अक्टूबर को होगा और इसी दिन दशहरा भी मनाया जायेगा.

नवरात्रि में तृतीया तिथि रहेगी दो दिन

ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा ने बताया कि इस साल नवरात्रि की चतुर्थी तिथि दो दिन की रहने वाली है. इस कारण देवी पूजा के लिए भक्तों को एक अतिरिक्त दिन मिलने वाले हैं और  मां दुर्गा के भक्त 10 दिनों तक नवरात्रि पर्व मना पाएंगे. पंचांग के अनुसार 24 और 25 सितंबर को दोनों दिन तृतीया तिथि है. दशहरा 2 अक्टूबर को मनाया जाएगा.

देवी चंद्रघंटा की दो दिन होगी पूजा

ज्योतिषाचार्य की मानें तो तृतीया तिथि दो दिन होने के कारण मां दुर्गा के तृतीया स्वरूप चंद्रघंटा की पूजा दो दिन की रहेगी.

नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करने का विधान हैं, इनमें शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्माण्डा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री देवी शामिल हैं.

इस साल हाथी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा

ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा की मानें तो इस वर्ष नवरात्रि की शुरुआत 22 सितंबर से शुरू हो रहे हैं, जिसमें मां दुर्गा के वाहन का विशेष महत्व बतलाया गया है. ये वाहन नवरात्रि के प्रारंभ होने वाले दिन (वार) पर निर्भर करता है. इस बार नवरात्रि की शुरुआत रविवार से हो रही है.

क्यों ज्ञान का प्रतीक हैं मां दुर्गा

नवरात्रि की शुरुआत रविवार या सोमवार को होती है, तो मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आती हैं. हाथी को सुख-समृद्धि, धन-धान्य और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है.

ऐसे में हाथी पर सवार होकर मां दुर्गा के आने से देश और समाज में सुख-समृद्धि और उन्नति के योग बनेंगे.

शनिवार या मंगलवार को नवरात्रि शुरू हो तो मां का वाहन अश्व (घोड़ा) पर, गुरुवार या शुक्रवार को डोली में और बुधवार को नौका से देवी मां दुर्गा का आगमन होता है. हिंदू शास्त्र में देवी के वाहनों के अलग-अलग फल बताए गए हैं. 

नवरात्रि घटस्थापना मुहूर्त

  • अमृत मुहूर्त : सुबह 6.19 से 7.49 बजे तक 
  • शुभ मुहूर्त : सुबह 9.14 से 10.49 बजे तक,
  • अभिजीत मुहूर्त : सुबह 11.55 से 12.43 बजे तक रहेगा

कलश स्थापना

ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा ने बताया कि, नवरात्रि में कलश स्थापना का विशेष महत्व है. कलश स्थापना को घट स्थापना भी कहा जाता है. नवरात्रि की शुरुआत घट स्थापना के साथ ही होती है. घट स्थापना शक्ति की देवी का आह्वान है.

मान्यता है कि गलत समय में घट स्थापना करने से देवी मां क्रोधित हो सकती हैं. रात के समय और अमावस्या के दिन घट स्थापित करने की मनाही है. घट स्थापना का सबसे शुभ समय प्रतिपदा का एक तिहाई भाग बीत जाने के बाद होता है.

अगर किसी कारणवश आप उस समय कलश स्थापित न कर पाएं, तो अभिजीत मुहूर्त में भी स्थापित कर सकते हैं. प्रत्येक दिन का आठवां मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त कहलाता है. सामान्यत: यह 40 मिनट का होता है. हालांकि इस बार घट स्थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त उपलब्ध नहीं है.

कलश स्थापना की सामग्री

ज्योतिषाचार्य ने बताया कि, मां दुर्गा को लाल रंग खास पसंद है, इसलिए लाल रंग का ही आसन खरीदें. इसके अलावा कलश स्थापना के लिए मिट्टी का पात्र, जौ, मिट्टी, जल से भरा हुआ कलश मौली, इलायची, लौंग, कपूर, रोली, साबुत सुपारी, साबुत चावल, सिक्के, अशोक या आम के पांच पत्ते, नारियल, चुनरी, सिंदूर, फल-फूल, फूलों की माला और श्रृंगार पिटारी भी चाहिए होते है.

कलश स्थापना कैसे करें?

ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा ने बताया कि नवरात्रि के पहले दिन यानी कि प्रतिपदा को सुबह स्नान कर लें. मंदिर की साफ-सफाई करने के बाद सबसे पहले गणेश जी का नाम लें और फिर मां दुर्गा के नाम से अखंड ज्योत जलाएं.

कलश स्थापना के लिए मिट्टी के पात्र में मिट्टी डालकर उसमें जौ के बीज बोएं. अब एक तांबे के लोटे पर रोली से स्वास्तिक बनाएं. लोटे के ऊपरी हिस्से में मौली बांधें. अब इस लोटे में पानी भरकर उसमें कुछ बूंदें गंगाजल की मिलाएं.

फिर उसमें सवा रुपया, दूब, सुपारी, इत्र और अक्षत डालें. इसके बाद कलश में अशोक या आम के पांच पत्ते लगाएं. अब एक नारियल को लाल कपड़े से लपेटकर उसे मौली से बांध दें. फिर नारियल को कलश के ऊपर रख दें.

अब इस कलश को मिट्टी के उस पात्र के ठीक बीचों बीच रख दें जिसमें आपने जौ बोएं हैं. कलश स्थापना के साथ ही नवरात्रि के नौ व्रतों को रखने का संकल्प लिया जाता है. आप चाहें तो कलश स्थापना के साथ ही माता के नाम की अखंड ज्योति भी जला सकते हैं.

शारदीय नवरात्रि तिथि

  • 22 सितंबर, सोमवार : प्रतिपदा तिथि
  • 23 सितंबर, मंगलवार : द्वितीय तिथि 
  • 24 सितंबर, बुधवार : तृतीया तिथि
  • 25 सितंबर, गुरुवार : तृतीया तिथि
  • 26 सितंबर, शुक्रवार : चतुर्थी तिथि
  • 27 सितंबर, शनिवार : पंचमी तिथि
  • 28 सितंबर, रविवार : षष्ठी तिथि
  • 29 सितंबर, सोमवार : सप्तमी तिथि
  • 30 सितंबर, मंगलवार : अष्टमी तिथि
  • 01 अक्टूबर, बुधवार : नवमी तिथि
  • 02 अक्टूबर, गुरुवार : दशहरा

Disclaimer: यह सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि DBNewsupdate.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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