दिल्ली ED हैरान : सवाल यह कि ब्याजखोरी के लिए इंदौर का RBL बैंक ही क्यों चुना?
By : डीबी न्यूज अपडेट | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Jabalpur Smart City Scam News: दिल्ली की ईडी टीम भी यह जानकर हैरान होगी कि जबलपुर स्मार्ट सिटी का खाता 600 किलोमीटर दूर इंदौर में आखिरकार क्यों खोला गया? बता दें कि जबलपुर स्मार्ट सिटी के जितने भी प्रोजेक्ट लॉन्च किए हैं, वे सब जबलपुर शहर के एबीडी (एरिया बेस्ड डेवलपमेंट) और शहर के इर्द-गिर्द हुए हैं, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि उन सभी प्रोजेक्टों का लेन-देन इंदौर बैंक से होता रहा और इस बात की भनक न तो वर्तमान सीईओ को लगी और न ही नगर निगम कमिश्नर को. क्योंकि स्मार्ट सिटी के कितने खाते खोले गए हैं? या किन बैंकों में खाता खोले गए हैं और उनका लेनदेन कहां से किया जा रहा है? इससे जबलपुर के अधिकारियों को कोई लेना-देना ही नहीं रहा. लिहाजा स्मार्ट सिटी के तत्कालीन सीईओ, अकाउंट ऑफिसर और स्मार्ट सिटी कार्यालय प्रबंधक की आपसी मिलीभगत से इंदौर मे बैंक खाता खोला गया और वहीं से लेनदेन होता रहा. इसके पीछे इन अधिकारियों की मंशा क्या थी? ये तो वही जानें, लेकिन स्मार्ट सिटी को करीब एक करोड़ 30 लाख रुपए का चूना लगा है, साथ मे आरबीएल बैंक इंदौर की शाखा मे एकमुश्त जमा 56 लाख की राशि भी डूब गई है. इन सभी बिन्दुओं पर जांच तो होना जरूरी है.
स्मार्ट सिटी की गबन राशि मे सब शामिल
इंदौर में बैंक खाता खोले जाने से लेकर बैंक से मिलने वाले ब्याज राशि की लंबे समय से हेराफेरी की जा रही है और स्मार्ट सिटी जबलपुर के अधिकारियों के मिलीभगत के बिना संभव ही नहीं है. इसका खुलासा बड़े स्तर से जब जांच कराई जाएगी, उसके बाद ही हो सकता है. क्योंकि जबलपुर में ऐसा कोई बैंक नहीं है, जिसकी ब्रांच यहां किसी कोने में न हो. इसके बाद भी इंदौर में जाकर बैंक खाता खोले जाने की स्मार्ट सिटी के अधिकारियों की क्या मंशा थी? और इसमें कौन लोग शामिल थे? यह सर्वविदित है. इस बैंक खाता खोले जाने से लेकर उसके लेन-देन की बारीकी से यदि जांच हो जाती है तो न जाने कितने अधिकारी जांच की जद में आ आएंगे.
एफआईआर कराकर भूल गए जिम्मेदार
स्मार्ट सिटी प्रबंधन ने अपने आप को बचाने के लिए आरबीएल बैंक के एक अधिकारी के खिलाफ जबलपुर में एफआईआर दर्ज कराई थी, जिसका खुलासा मदन महल थाने की एफआईआर के बाद नहीं हो पाया. फिलहाल आरबीएल बैंक का मामला दिल्ली ईडी के पास पहुंच चुका है. दिल्ली प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) बारीकी से जांच में जुट गई है. हालांकि जिस तरह से लेटलतीफी हो रही है, इसको देखते हुए इस पूरे मामले में लीपापोती होने की आशंका जताई जा रही है.
भोपाल से खुला मामला
बताया जा रहा है कि भोपाल के राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का फर्जी एफडी कांड में जब जबलपुर स्मार्ट सिटी का नाम आया, उसके बाद आरबीएल बैंक की जालसाजी का खुलासा हुआ. क्योंकि जुलाई 2022 को स्मार्ट सिटी ने आरबीएल बैंक खाते का जो विवरण भेजा गया, उसे चालू खाते में तब्दील कर दिया. इसके बाद ही बैंक प्रबंधन की प्रक्रिया पर संदेह हुआ.
हैरान कर देने वाला है कृत्य
सूत्रों की मानें तो स्मार्ट सिटी के अधिकारियों ने बैंक अधिकारियों द्वारा दिए जाने वाले नजराने के चक्कर में चाहे जहां बैंक अकाउंट खोलने के लिए तैयार रहते हैं. लिहाजा स्मार्ट सिटी के अधिकारी ने आरबीएल बैंक इंदौर में 56 लाख रुपए जमा कर खाता खुलवा लिया. इस तरह की आर्थिक लाभ की दिशा में किया गया यह कृत्य हैरान करने वाला है.
किस्तों मे जमा हुए 20 करोड़
स्मार्ट सिटी के प्रशासनिक अधिकारी रवि राव की मानें तो आरबीएल बैंक के तत्कालीन टास्क मैनेजर कुमार मयंक ने बैंक में खाता खोले जाने की पूरी प्रक्रिया कराई थी. तब अलग-अलग तिथियों में इंदौर के आरबीएल बैंक खाते में 20 करोड़ रुपए जमा कराए थे. स्मार्ट सिटी प्रबंधन का आरोप है कि बैंक में बचत खाता खोला गया था, जिसे बाद में बदलकर चालू खाता कर दिया गया, जिसकी जानकारी उन्हें नहीं दी गई.

