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DB News Update | Divya Bhumi News > Blog > Religion > सनातन धर्म की रक्षा के लिए तैयार की गई थी नागा साधुओं की फौज!
Religion

सनातन धर्म की रक्षा के लिए तैयार की गई थी नागा साधुओं की फौज!

DB News
Last updated: 25/02/2026 11:52 AM
DB News
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8 Min Read
नागा साधुओं की परंपरा और त्याग
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8वीं शताब्दी में मिलता है नागा साधुओं का उल्लेख, आदिगुरु शंकराचार्य ने नागा साधुओं की फौज तैयारी की थी.

 Source : DB News Update  

Contents
8वीं शताब्दी में मिलता है नागा साधुओं का उल्लेख, आदिगुरु शंकराचार्य ने नागा साधुओं की फौज तैयारी की थी.अखाड़े का कैसे पड़ा नाम?शिव के साधक होते हैं नागा साधुकाशी विश्वनाथ मंदिर की रक्षा के लिए नागा साधु जंग में उतरेनागा साधु बनने की प्रक्रियानागा साधुओं के पंच संस्कारसाधुओं के अखाड़ेशैव अखाड़े (7)वैष्णव अखाड़े (3)

By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी

Naga Sadhu History News: नागा साधुओं की परंपरा कोई आज की नहीं है बल्कि हजारों सालों से चली आ रही है. इस परंपरा के चिन्ह हमें मोहनजोदड़ो के सिक्कों और तस्वीरों में मिलते हैं, जहाँ नागा साधु पशुपति नाथ के रूप में भगवान शिव की पूजा करते हुए मिलते हैं. कहा जाता है ऐलेक्ज़ेंडर और उसके सिपाही जब भारत आए थे तब उनकी मुलाकात नागा साधुओं से हुई थी. यही नहीं नागा साधुओं की तपस्या और मातृभूमि के प्रति समर्पण से भगवान बुद्ध और भगवान महावीर भी काफी प्रभावित थे.

नागा साधुओं को धर्मरक्षक भी कहा जाता है जो हिंदू धर्म और भारत के संस्कृति को विदेशी आक्रांताओं से बचाने के लिए जाना जाता है. नागा साधुओं को सबसे पहले 8वीं शताब्दी में आदि गुरु शंकराचार्य ने सनातन धर्म की रक्षा के लिए एक फौज के रूप में इकट्ठा किया था.

इसके बाद आदि शंकराचार्य ने दशनामी सन्यासी पंथ का निर्माण किया जो सात अखाड़ों- निरंजनी, जूना महानिर्वानी, अटल, अग्नि आनंद और आवाहन से मिल कर बना था.

अखाड़े का कैसे पड़ा नाम?

साधुओं के पंथ को अखाड़ा इसलिए कहा जाता था क्योंकि इनके सदस्य हथियार बंद होते थे जो अपने देश और धर्म के लिए अपने प्राण न्योछावर करने के लिए हर वक्त तैयार रहते हैं. नागा साधु ज़्यादातर हिमालय की गुफाओं में रहते हैं और इन्हें कुंभ के दौरान ही देखा जा सकता हैं. ये धर्म की रक्षा के लिए हर वक्त त्रिशूल, तलवार और अन्य घातक हथियारों से लैस रहते हैं.

नागा साधु आम तौर पर अर्धनग्न होते हैं और इनकी जटाएँ (सिर के बाल) लंबी होती हैं. ये पूरे शरीर पर लाशों की राख लपेटे रहते हैं.

शिव के साधक होते हैं नागा साधु

लगभग सभी नागा साधु भगवान शिव के साधक होते हैं लेकिन अपने आराध्य को पूजने का तरीका अलग अलग होता है. कुछ नागा तो भगवान शिव की ही तरह अपने गले में नाग या साँप लपेटे होते हैं और कुछ नागा पूरी तरह से नग्न रहना पसंद करते हैं जबकि कुछ हनुमान जी की तरह लंगोट में रहते हैं.

जो भाला नागा अपनाते हैं वो उनके अखाड़ों का प्रतीक चिन्ह होता है जिसकी पूजा नागा कुंभ में गंगा स्नान से पहले भी करते हैं.

काशी विश्वनाथ मंदिर की रक्षा के लिए नागा साधु जंग में उतरे

नागाओं ने कई लड़ाईयों में हिंदु सेना के तौर पर हिस्सा लिया है. 1664 में औरंगज़ेब के सेनापति मिर्ज़ा अली तुरंग ने काशी पर हमला किया तो काशी विश्वनाथ मंदिर की रक्षा के लिए हजारों नागा साधु मैदान-ए-जंग में उतर गए. यही नहीं 1666 जब औरंगजेब की सेना ने जब हरिद्वार पर हमला किया तब नागा मुगलों के सामने दीवार बन कर खड़े हो गए.

नागा साधु बनने की प्रक्रिया

नागा बनने की प्रकिया बेहद कठिन, कठोर और असहनीय होती है और किसी सामान्य इंसान के लिए नागा बनना लगभग असंभव है.

पिछले कुछ सालों में जैसे-जैसे आध्यात्म में प्रगति हुई है नागा अपने अपने अखाड़ों में ऊपर उठ रहे हैं. नागा पदोन्नति के बाद पहले महंत, फिर महामंडलेश्वर और आखिर में आचार्य महामंडलेश्वर बनते हैं जो सबसे बड़ी पदवी होती है.

जो लोग हिंदू धर्म और उसके रीति- रिवाज़ों का मज़ाक उड़ाते हैं दरअसल वो हिंदू भक्ति और उसकी परंपराओं से अनजान हैं, उन्हें ये पता भी नहीं है कि साधु किस तरह से असाधारण तपस्या करते हैं जो किसी आम इंसान की सोच से भी परे है.

नागा बनने की शुरुआत दीक्षा से शुरु होती है जो सालों ब्रह्मचर्य का पालन करने के बाद शुरु होती है और उसके अतरंगत शरीर और मतिष्क का एकाग्र करने की प्रक्रिया होती है.

नागा साधुओं के पंच संस्कार

जब कोई नागा बनने की शुरुआत करता है तो सबसे पहले ‘पंच संस्कार’ दिया जाता है जिसमें पांच गुरु मिल कर अलग अलग विधि का निष्पादन करते हैं.

पंच संस्कारों में प्रमुख गुरु शिखा काटतें हैं, भगवा गुरु गेरुआ वस्त्र प्रदान करते हैं, रुद्राक्ष गुरु रुद्राक्ष मोती देते हैं, विभूति गुरु शरीर पर राख लपेटते हैं और दिगंबर नागा बनने जा रहा व्यक्ति अपना आखिरी वस्त्र त्याग देता है.

इसके बाद आखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर वैराग्य गृह संस्कार करवाते हैं. इस संस्कार में नागा बनने की दीक्षा लेने वाले को स्वयं अपना पिंड दान और श्राद्ध करना होता है और साथ ही अपने माता और पिता दोनों के पूर्वजों का भी श्राद्ध करना होता है. यह एक प्रतीकात्मक प्रक्रिया है जिसका अर्थ होता है कि अब वह उस संसार से मुक्त हो चुके हैं जहां उनका जन्म हुआ था और अब वो उस संसार में दोबारा नहीं लौटेंगे. अंत में छठवें गुरु नागा अखाड़ा ध्वज के नीचे दिक्षा प्रदान करते हैं जिसके बाद नागा बनने की घोषणा हो.

साधुओं के अखाड़े

शैव अखाड़े (7)

1. निरंजनी अखाड़ा

स्थापना: 904 ईस्वी में.

मुख्यालय: हरिद्वार.

विशेषता: भगवान शिव की पूजा और कठोर तपस्या पर आधारित.

साधना: योग, ध्यान और वैदिक कर्मकांड.

2. जूना अखाड़ा

स्थापना: प्राचीनतम अखाड़ों में से एक.

मुख्यालय: वाराणसी.

विशेषता: इसमें सबसे अधिक साधु और नागा साधु शामिल हैं.

3. महानिर्वाणी अखाड़ा

स्थापना: आदि शंकराचार्य द्वारा.

मुख्यालय: हरिद्वार.

विशेषता: ध्यान और आध्यात्मिक साधना के लिए प्रसिद्ध.

4. अटल अखाड़ा

स्थापना: 16वीं शताब्दी.

मुख्यालय: हरिद्वार.

विशेषता: भगवान शिव की आराधना और धर्म प्रचार.

5. आह्वान अखाड़ा

विशेषता: तपस्या और योग पर केंद्रित.

मुख्यालय: वाराणसी.

6. आनंद अखाड़ा

विशेषता: शैव और वैष्णव परंपरा का मिश्रण.

7. पंचाग्नि अखाड़ा

विशेषता: कठोर तपस्या के लिए प्रसिद्ध.

वैष्णव अखाड़े (3)

वैष्णव अखाड़े भगवान विष्णु की पूजा और वैदिक परंपराओं का पालन करते हैं। ये अखाड़े भक्ति और कर्म योग पर आधारित हैं.

1. नागपंथी गोरखनाथ अखाड़ा

विशेषता: भगवान विष्णु और गोरखनाथ जी की परंपरा का पालन.

मुख्यालय: गोरखपुर.

साधना: ध्यान, योग और भक्ति.

2. निर्मोही अखाड़ा

विशेषता: भगवान राम की पूजा.

मुख्यालय: अयोध्या.

भूमिका: राम जन्मभूमि आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका.

3. वैष्णव अखाड़ा

विशेषता: यह भगवान विष्णु और उनके विभिन्न अवतारों की पूजा करता है.

मुख्यालय: हरिद्वार.

उदासीन अखाड़े (3)

उदासीन अखाड़े गुरु नानक और सिख परंपराओं से प्रेरित हैं.

1. उदासीन पंचायती बड़ा अखाड़ा

विशेषता: गुरु नानक और वैदिक धर्म का समन्वय.

मुख्यालय: हरिद्वार.

2. उदासीन नया अखाड़ा

विशेषता: आध्यात्मिक साधना और धर्म प्रचार.

3. निर्मल पंचायती अखाड़ा

विशेषता: सिख और वैदिक परंपरा का मिश्रण.

Disclaimer: यह सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि DBNewsupdate.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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