हिंदू पंचांग में कार्तिक मास का आठवां महीना होता है. इस मास में श्रीहरि लंबे समय के बाद निद्रा से जागते हैं. कार्तिक मास के दौरान क्या करना चाहिए और क्या नहीं?
Source : DB News Update
By : पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By : प्रिंस अवस्थी
Kartik Month 2025: हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास साल का आठवां महीना होता है. हिंदू धर्म में यह महीना विशेष महत्वपूर्ण रखता है, क्योंकि भगवान विष्णु लंबे समय के बाद नींद से जागते हैं. हिंदू धर्म में ऐसी धार्मिक मान्यता है कि इस माह में श्रीहरि और श्रीकृष्ण की पूजा करने से जातक को विशेष फलों की प्राप्ति होती है. आइए जानते हैं इस साल कार्तिक मास का महीना कब से शुरू हो रहा है? और क्या महत्व रखता है?
कार्तिक मास 2025
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल कार्तिक माह की शुरुआत 8 अक्टूबर 2025 से लेकर 5 नवंबर 2025 तक है. इस एक माह में व्रत, त्योहार, दान, स्नान और पूजन का विशेष महत्व बतलाया गया है.
धार्मिक महत्व क्या है?
कार्तिक मास में प्रतिदिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नानादि करने का विधान बतलाया गया है, क्योंकि इसे कार्तिक स्नान भी कहा गया है. माना जाता है कि इन दिनों प्रमुख पवित्र नदियों में स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है.
इसके साथ ही इस पवित्र माह में भजन, कीर्तन, दीपदान और तुलसी पूजा का भी महत्व है. कार्तिक मास में करवा चौथ, दिवाली, छठ समेत कई अहम पर्व भी इसी माह मनाए जाते हैं.
कार्तिक मास की पौराणिक कथाएं
शास्त्रों के अनुसार, कार्तिक मास भगवान विष्णु को सबसे प्रिय है. इसी माह में भगवान विष्णु चार महीने की योग निद्रा से जागते हैं, जिसे ‘देवउठनी एकादशी’ कहा जाता है. उनके जागने के साथ ही सभी मांगलिक कार्यों जैसे विवाह, गृह प्रवेश आदि की शुरुआत हो जाती है.
माँ लक्ष्मी की कृपा: यह महीना धन और समृद्धि की देवी माँ लक्ष्मी की पूजा के लिए भी विशेष है. दीपावली, जो इस माह का सबसे प्रमुख पर्व है, मुख्य रूप से माँ लक्ष्मी की पूजा के लिए ही जाना जाता है. मान्यता है कि इस माह में की गई पूजा से घर में सुख-समृद्धि और धन-धान्य की कभी कमी नहीं होती.
तुलसी भगवान विष्णु की प्रिय मानी गई हैं. कार्तिक में प्रतिदिन तुलसी के पौधे के नीचे घी का दीपक जलाना शुभ होता है. देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी विवाह का आयोजन किया जाता है, जिससे घर में शांति और मंगल ऊर्जा आती है.
इस माह की सबसे प्रमुख परंपरा ‘कार्तिक स्नान’ है. श्रद्धालु सूर्योदय से पहले उठकर गंगा, यमुना जैसी पवित्र नदियों या तालाबों में स्नान करते हैं. यह स्नान पूरे महीने चलता है और कार्तिक पूर्णिमा पर इसका समापन होता है. मान्यता है कि कार्तिक स्नान करने से व्यक्ति को राजसूय यज्ञ के समान पुण्य फल प्राप्त होता है और उसके सभी पाप धुल जाते हैं.
कार्तिक माह में दीपदान और दान का विशेष महत्व है. मंदिरों, नदियों व तुलसी के पास दीप जलाने से जीवन का अंधकार मिटता है और माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है. इस महीने अन्न, वस्त्र, धन या आंवले का दान करने से अक्षय पुण्य प्राप्त होता है.
आषाढ़ माह की देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु चार महीने के लिए शयन काल में चले जाते हैं, जिसे ‘चतुर्मास’ कहते हैं. कार्तिक माह की देवउठनी एकादशी पर वे जागते हैं और इसी के साथ चतुर्मास का समापन होता है.
क्य हैं कार्तिक मास के नियम
- मान्यताओं के मुताबिक कार्तिक मास में श्रीहरि जल मे वास करते हैं. इस माह में श्रीहरि और माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करनी चाहिए.
- इस पूरे माह में तुलसी की उपासना करने के साथ सुबह और शाम को घी का दीपक जलाना चाहिए.
- प्रतिदिन विधिवत श्रीमद् भगवत गीता का पाठ करना चाहिए.
इन विसंगतियों से रहें दूर
- कार्तिक मास में तामसिक चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए.
- इस दौरान किसी भी तरह से अभद्र या गलत शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.
- तन और मन से शुद्धता और पवित्रता बनाए रखें.
- किसी भी तरह से पशु या पक्षी को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए.
कार्तिक मास इन 5 चीजों को जरूर करें
- कार्तिक मास के दौरान आपको प्रतिदिन तुलसी की पूजा और परिक्रमा जरूर करनी है. माना जाता है कि इस महीने में तुलसी की पूजा करने भाग्य की रेखा संवर जाती है.
- कार्तिक मास में दामोदर अष्टकम का पाठ जरूर करना चाहिए. दामोदर अष्टकम को कार्तिक मास में सुनने से पिछले कई जन्मों के पापों का नाश होता है.
- इसके अलावा कार्तिक मास में भगवत गीता का पाठ करना चाहिए.
- इसके अलावा प्रतिदिन भगवान दामोदर को दिया दिखाना चाहिए.
- कार्तिक मास में श्री हरि मंत्र के नाम का जाप करना चाहिए. जो भी लोग इस माह में एक बार भी हरि नाम का जाप करते हैं, उनकी सभी इच्छाएं पूरी होती है.
Disclaimer: यह सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि DBNewsupdate.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
