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DB News Update | Divya Bhumi News > Blog > Religion > होलाष्टक में शादी की भूलकर भी न करें चर्चा, जीवनभर पति-पत्नी को सहना पड़ेगी पीड़ा
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होलाष्टक में शादी की भूलकर भी न करें चर्चा, जीवनभर पति-पत्नी को सहना पड़ेगी पीड़ा

DB News
Last updated: 04/09/2026 12:13 PM
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8 Min Read
होलाष्टक के दिनों में हवन-पूजन करने का विधान बताया गया है.
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होलिका दहन 2 मार्च 2026 को होगा, इसलिए होलाष्टक होली से आठ दिन पहले यानी 24 फरवरी से लग जाएंगे. होलाष्टक में विवाह, मुंडन भले ही न करें लेकिन पूजा-पाठ अवश्य करें.

Source : DB News Update  

Contents
होलिका दहन 2 मार्च 2026 को होगा, इसलिए होलाष्टक होली से आठ दिन पहले यानी 24 फरवरी से लग जाएंगे. होलाष्टक में विवाह, मुंडन भले ही न करें लेकिन पूजा-पाठ अवश्य करें.16 में से कोई संस्कार मान्य नहींहोलाष्टक पर आठ ग्रहों की अवस्थाहोलाष्टक को क्यों माना जाता है अशुभहोलाष्टक का महत्वहोलाष्टक में क्या नहीं करना चाहिएहोलाष्टक में क्या करना चाहिएहोलाष्टक में करें ये उपायसंतान प्राप्ति के लिएकरियर में सफलताधन प्राप्ति के लिएस्वास्थ्य के लिएसुखमय जीवन के लिए

By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा  | Edited By : प्रिंस अवस्थी:

Holashtak 2026: होलाष्टक लगने की तारीख नजदीक आ गई है. इस दौरान जातक को बहुत ही सतर्क रहने की  जरूरत है. क्योंकि इस दौरान ग्रहों की नकारात्मक शक्तियां बढ़ जाती है, जिसके कारण मुंडन, विवाह, व्रतबंध, ग्रह प्रवेश जैसे धार्मिक अनुष्ठानों पर विराम लग जाता है. ग्रह-नक्षत्र की कमजोर दशा के कारण जातक की निर्णायक क्षमता में कमी आ जाती है. ऐसी स्थिति में जातक को पूजा-पाठ करने में मन लगाने का विधान बताया गया है. दिनचर्या में बदलाव करते हुए अनुशासित जीवन जीने की सीख दी गई है.

वर्ष 2026 में होलाष्टक 24 फरवरी मंगलवार से 3 मार्च तक है. फाल्गुन अष्टमी से होलिका दहन तक आठ दिनों तक होलाष्टक के दौरान मांगलिक और शुभ कार्यों पर रोक है. इन आठ दिनों में भले ही शुभ कार्य नहीं किए जाते, लेकिन देवी-देवताओं की अराधना के लिए ये दिन श्रेष्ठ हैं. लेकिन इन दिनों भूलकर भी विवाह की चर्चा न करें, नहीं तो जातक को जिंदगीभर कष्टमय रहेगा.

16 में से कोई संस्कार मान्य नहीं

हिंदू धर्म के अनुसार जीवन में 16 प्रकार के संस्कार बताए गए हैं, इन संस्कारों में से होलाष्टक के दौरान किसी भी संस्कार को करने का विधान नहीं है. होलाष्टक के समय विशेष रूप से विवाह, वाहन खरीद, नए निर्माण व नए कार्यों को आरंभ नहीं करना चाहिए. ऐसा ज्योतिष शास्त्र का कथन है.

अर्थात् इन दिनों में किए गए कार्यों से कष्ट, अनेक पीड़ाओं की आशंका रहती है तथा विवाह आदि संबंध विच्छेद और कलह का शिकार हो जाते हैं या फिर अकाल मृत्यु का खतरा या बीमारी होने की आशंका बढ़ जाती है. होलिका दहन 2 व 3 मार्च को है. इसके बाद होली खेली जाएगी.

होलाष्टक पर आठ ग्रहों की अवस्था

  • अष्टमी तिथि को चन्द्रमा
  • नवमी को सूर्य
  • दशमी तिथि पर शनि
  • एकादशी पर शुक्र
  • द्वादशी पर गुरु
  • त्रयोदशी तिथि पर बुध
  • चतुर्दशी पर मंगल
  • पूर्णिमा तिथि के दिन राहु उग्र स्थिति में रहते हैं.

होलाष्टक को क्यों माना जाता है अशुभ

होलाष्टक के दौरान शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं. माना जाता है कि होलाष्टक की अवधि में किए शुभ और मांगलिक कार्यों पर इन ग्रहों का बुरा असर पड़ता है, जिसका असर सभी राशियों के जीवन पर भी पड़ सकता है. इस वजह से जीवन में कई प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं. यही कारण है कि होली से पहले इन आठ दिनों में सभी मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है.

होलाष्टक का महत्व

धार्मिक मान्यता है कि होलाष्टक के दौरान भगवान हनुमान, भगवान विष्णु और भगवान नरसिंह की पूजा करनी चाहिए. माना जाता है कि पूजा करने से सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं. साथ ही होलाष्टक के इन आठ दिनों में व्यक्ति निरंतर महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी कर सकता है.

होलाष्टक में क्या नहीं करना चाहिए

  • होलाष्टक के 8 दिनों तक शादी-विवाह जैसे मांगलिक कार्य नहीं करना चाहिए.
  • भूमि, भवन और वाहन आदि की खरीदारी को भी शुभ नहीं माना जाता है.
  • नवविवाहिताओं को इन दिनों मायके में रहने की सलाह दी जाती है.
  • दुर्भाग्यवश इन दिनों किसी की मौत होती है तो उसके अंत्येष्टि संस्कार के लिये भी शांति पूजन करवाई जाती है.
  • होलाष्टम में किसी भी प्रकार का हवन, यज्ञ कर्म भी नहीं किये जाते हैं.

होलाष्टक में क्या करना चाहिए

  • होलाष्टक में पूजा-पाठ का विशेष फल मिलता है.
  • इस दौरान मौसम में तेजी बदलाव होता है इसलिए अनुशासित दिनचर्या को अपनाने की सलाह दी जाती है.
  • होलाष्टक में स्वच्छता और खानपान का ध्यान रखना चाहिए.
  • इन दिनों भगवान विष्णु की पूजा करने का विधान है.
  • शुभ कार्य भले ही न करें लेकिन इन दिनों अपने आराध्य देव की पूजा-अर्चना जरूर करें.
  • व्रत-उपवास करने से भी आपको पुण्य फलों की प्राप्ति होती है.
  • होलाष्टक पर धर्म-कर्म, वस्त्र, अनाज व इच्छा और  सामर्थ्य के अनुसार जरुरतमंदों को दान करें.

होलाष्टक में करें ये उपाय

संतान प्राप्ति के लिए

यदि किसी कपल को संतान की प्राप्ति नहीं हो रही है तो वह होलाष्टक में लड्डु गोपाल की विधि विधान से पूजा-पाठ करें. इस दौरान हवन भी करें जिसमें गाय का शुद्ध घी और मिश्री का इस्तेमाल करें. इन उपायों को करने से निसन्तान को भी संतान प्राप्त हो जाती है.

करियर में सफलता

जातक यदि अपने करियर में तरक्की करना चाहते हैं तो होलाष्टक में यह उपाय अवश्य करें. घर या ऑफिस में जौ तिल और शक्कर से हवन करवाएं. ऐसा करने से आपके करियर में आने वाली सभी बाधाएं खत्म हो जाएगी. आप जिस भी फील्ड में काम स्टार्ट करेंगे उसमें आसानी से सफलता मिलेगी.

धन प्राप्ति के लिए

यदि कोई जातक आर्थिक रूप से कमजोर है या अत्यधिक धन की चाहत रखते हैं तो होलाष्टक में यह उपाय जरूर करना चाहिए. कनेर के फूल, गांठ वाली हल्ती, पीली सरसों और गुड़ के द्वारा अपने घर में हवन करें. ऐसा करने से पैसों से जुड़ी सभी समस्याएं दूर हो जाएगी. इतना ही नहीं संपत्ति से जुड़े मामलों में भी लाभ मिलेगा.

स्वास्थ्य के लिए

कोई जातक यदि लंबे समय से सेहत को लेकर परेशान है और वह स्वस्थ्य होना चाहता है तो अच्छी सेहत के लिए आपको होलाष्टक में महामृत्युंजय मंत्र का जाप अवश्य करना चाहिए. ये जाप करने के बाद गुग्गल से हवन भी करना चाहिए. मान्यता के अनुसार ऐसा करने से असाध्य रोग से मुक्ति मिलती है.

सुखमय जीवन के लिए

किसी के जीवन में अत्यधिक कष्ट है तो होलाष्टक में हनुमान चालीसा और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना शुरू कर देना चाहिए. इससे आपके सभी दुखों का नाश होगा. जीवन में खुशियां ही खुशियां होगी. आपकी लाइफ सुख सुविधाओं से चमक उठेगगी.

Disclaimer: यह सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि DBNewsupdate.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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