रीवा, अमरपाटन, मैहर, कटनी, सिहोरा से लेकर जबलपुर जिले में भव्य स्वागत, जनप्रतिनिधियों में भी दिखा उत्साह, जबलपुर में मंदिर के पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, धार्मिक-सामाजिक संस्थाओं, मातृ शक्तियों द्वारा भव्य स्वागत किया गया.
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By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
MP News, Jabalpur. प्रयागराज महाकुंभ मेला 2025 में श्रीरामरंगी द्वाराचार्य जगद्गुरु के पद पर नरसिंह मंदिर के महंत डॉ. स्वामी नृसिंहदास जी महाराज विभूषित हुए. जिनकी आगवानी रीवा से लेकर जबलपुर तक उनके भक्तों द्वारा की गई. इस दौरान जबलपुर में मंदिर के पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, धार्मिक-सामाजिक संस्थाओं, मातृ शक्तियों द्वारा भव्य स्वागत किया गया. गढ़ा जबलपुर सूपाताल से लेकर नरसिंह मंदिर तक विशाल शोभायात्रा निकाली गई. इस शोभायात्रा में शहर के जनप्रतिनियों ने हिस्सा लिया और उनमें शामिल पदाधिकारियों में काफी उत्साह भी देखने को मिला. जगद्गुरु डॉ. स्वामी नृसिंहदेवाखचार्य जी महाराज को वही आदर और सम्मान दिया गया जो आज तक जो जगद्गुरु डॉ. स्वामी श्यामदेवाचार्य जीी महारा को दिया.
रीवा एपीएस यूनिवर्सिटी के कुलगुरु ने किया स्वागत
रीवा अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ राजेन्द्र कोररिया द्वारा स्वागत किया गया. इस अवसर पर रीवा के भक्तों ने भी स्वागत वंदन किया. तत्पश्चात अमरपाटन और मैहर में भी भव्य स्वागत हुआ. कटनी बाल ब्रम्ह बजरंग उत्सव समिति द्वारा स्वागत किया गया. सिहोरा के बाबाताल मंदिर में भक्तों ने भव्य स्वागत किया. तत्पश्चात गांधीग्राम में जगद्गुरु का स्वागत हुआ. पनागर में विधायक इंदू तिवारी के पुत्र हर्ष तिवारी की टीम ने भव्य स्वागत किया. महाराजपुर में भक्तों और जनप्रतिनिधियों द्वारा स्वागत किया गया.
अंधमूक बाईपास में जनप्रतिनिधियों ने की अगवानी
भेड़ाघाट चौराहा अंधमूक बाईपास के पास शहर के जनप्रतिधि पहुंचे और जगद्गुरु की अगवानी की और उनका शॉल श्रीफल-फूलमाला से स्वागत किया. उसके बाद वाहन रैली सूपाताल स्थित हनुमान मंदिर पहुंची. जहां अनेक सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक संगठनों द्वारा स्वागत किया गया. मंदिर प्रांगण से पूजन-अर्चन करने के पश्चात यह रैली शोभायात्रा के रूप में तब्दील हो गई, जो नरसिंह मंदिर शास्त्रीब्रिज गोरखपुर में विशाल कार्यक्रम के रूप में परिवर्तित हो गई. यहां पर सभी भक्तों और मंदिर पदाधिकारियों द्वारा चरण पादुका पूजन किया गया.
अगवानी के माध्यम से संस्कारधानी ने दिया नया संदेश
संस्कारधानी जबलपुर तपस्वी संत जाबालि ऋषि की भूमि है. यहां संतों का सम्मान, स्वागम भव्यता के साथ ही होता है. लिहाजा तपस्वी संत जगद्गुरु डॉ. स्वामी श्यामदेवाचार्य जी महाराज के गोलोक गमन के पश्चात संस्कारधानी में सूनापन महसूस हाे रहा था. ऐसे तपस्वी संत विरले ही मिलते हैं. लेकिन नरसिंग पीठ में उनके शिष्य डॉ. स्वामी नृसिंहदेवाचार्य जी महाराज को जगद्गुरु की उपाधि मिलने के बाद पहली बार जब संस्कारधानी जबलपुर में आगमन हुआ और संस्कारधानी वासियों ने भव्य अगवानी करते हुए अपने संस्कारों का निर्वहन बखूबी किया. जिसमें सामाजिक, धार्मिक, व्यवसायी, जनप्रतिनिधि सभी एकजुट होकर स्वागत सत्कार किया. इससे साबित होता है कि संस्कारधानी जबलपुर ने यह संदेश तो जरूर दिया है कि जबलपुर संस्कारधानी तपस्वी संतों से कभी खाली नहीं होगी और उन्हें वही आदर और सम्मान दिया जाएगा, जो आदर और सम्मान महर्षि महेश योगी, आचार्य रजनीश, महामण्डलेश्वर स्वामी रामचन्द्रदास शास्त्री, जगद्गुरु डॉ. स्वामी श्यामदेवाचार्य जी महाराज को देते आई है.
प्रत्येक संत को मिलता है जबलपुर में सम्मान
तपस्वी संतों की पावन भूमि पर प्रत्येक संत -महात्मा को आदर व सम्मान मिलता ही है. जगद्गुरु डॉ. स्वामी नृसिंहदेवाचार्य जी महाराज मध्य प्रदेश जबलपुर के लिए एक बड़ा पद जो श्रेष्ठ संतों द्वारा दिया गया है. उसे लेकर जबलपुर पधारे थे, ऐसे संत का यदि आदर और सम्मान जबलपुर वासियों द्वारा नहीं मिलता और लोग उन्हें स्वीकार न किए होते ताे समाजिक बुराई संस्कारधानी वासियों को झेलनी पड़ती. लिहाजा अपना कलंक आसपास के जिले और प्रदेश में न फैले, इसके लिए संस्कारधानी का प्रत्येक नागरिक आदर और सम्मान देने में पीछे नहीं रहा.
इन्होंने की अगवानी
शोभायात्रा मार्ग पर विधायक अशोक रोहाणी, नीरज सिंह, अभिलाश पाण्डे, सुशील इंदू तिवारी, लेखराम सिंह मुन्ना, रिंकू विज, रत्नेश सोनकर, राजमणि सिंह बघेल, हर्ष तिवारी, अभय सिंह, कौशल सूरी, संजय यादव, पंडित वासुदेव शास्त्री, पं. रोहित तिवारी, पं. राघवेन्द्र तिवारी, डॉ. संदीप मिश्रा, अशोक मनोध्या, पंडित प्रदीप मिश्रा, योगेन्द्र दुबे, सोनू बचवानी, दिनेश सिंगरौल, नीरज पारासर, सहित नरसिंह मंदिर, गीताधाम व सनातन धर्म महासभा के पदाधिकारी उपस्थित रहे.



