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Religion

जन्माष्टमी आज या कल ? पूजा मुहूर्त से लेकर सामग्री, पूजा विधि सबकुछ जानें…

DB News
Last updated: 10/09/2026 10:11 AM
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जन्माष्टमी इस साल दो दिन है 15 और 16 अगस्त 2025. ऐसे में मान्यता अनुसार कान्हा की पूजा के लिए मुहूर्त, सामग्री, विधि, मंत्र, भोग सभी यहां देखें.

Source : DB News Update

Contents
जन्माष्टमी इस साल दो दिन है 15 और 16 अगस्त 2025. ऐसे में मान्यता अनुसार कान्हा की पूजा के लिए मुहूर्त, सामग्री, विधि, मंत्र, भोग सभी यहां देखें.जन्माष्टमी पर नहीं है रोहिणी नक्षत्रक्यों लेना पड़ा भगवान को अवतार ?जन्माष्टमी व्रत का क्या है महत्वजन्माष्टमी पर दुर्लभ संयोगजन्माष्टमी पर पूजा सामग्री

By : DB News Update | Edited By : प्रिंस अवस्थी

Krishna Janmashtami 2025: हिंदू पंचांग की गणना के अनुसार इस साल जन्माष्टमी का उत्सव आज 15 और 16 अगस्त 2025 दो दिन मनाया जाएगा. क्योंकि अष्टमी तिथि 15 अगस्त को रात 11 बजकर 49 मिनट से शुरू होकर 16 अगस्त को रात 9 बजकर 34 मिनट पर समाप्त होगी. हालांकि इस साल जन्माष्टमी पर रोहिणी नक्षत्र नहीं बन रहा है. ये भगवान श्रीकृष्ण का 5252वां जन्मोत्सव होगा. परंपरा के अनुसार, अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग इस पर्व के लिए महत्वपूर्ण होता है, ऐसे में कान्हा का जन्मोत्सव रात्रि 12 बजे मनाया जाता है.

जन्माष्टमी स्मार्त यानि स्मृति और वैष्णव संप्रदाय के लोग अलग-अलग मनाते हैं. ऐसे में पंचांग के अनुसार आज स्मार्त संप्रदाय के लोग जन्माष्टमी मना रहे हैं. इस त्योहार की रौनक पूरे देश में दिखाई देती है। लोग अपने घरों में कान्हा की पूजा करते हैं और सार्वजनिक रूप से मटकी फोड़ का आयोजन करते हैं.

जन्माष्टमी पर नहीं है रोहिणी नक्षत्र

कान्हा का जन्मोत्सव मनाने के लिए रोहिणी नक्षत्र पर जरुर विचार किया जाता है लेकिन इस साल रोहिणी नक्षत्र जन्माष्टमी तिथि के खत्म होने के बाद शुरू हो रहा है. ऐसे में बाल गोपाल की पूजा बिना रोहिणी नक्षत्र में होगी.

  • रोहिणी नक्षत्र की शुरूआत 17 अगस्त, 2025 को सुबह 4.38 मिनट पर होगी.
  • रोहिणी नक्षत्र समाप्त 18 अगस्त, 2025 को सुबह 3.17 मिनट पर होगा.

क्यों लेना पड़ा भगवान को अवतार ?

द्वापर युग में कंस के अत्याचार से जगत को बचाने के लिए विष्णु जी ने कान्हा जी के रूप में जन्म लिया. श्रीकृष्ण कंस की बहन देवकी और वासुदेव की आठवीं संतान के रूप में भगवान ने अवतार लिया, इससे पहले कंस अपनी बहन की 7 संतानों को मृत्यु दण्ड दे चुका था. आठवीं संतान को कंस लेकर जाता उससे पहले ही चमत्कार हो गया और कारागार के द्वार अपनेआप खुल गए. प्रकाश से कारागार जगमगा उठा और सभी रास्ते खुद ही खुलते चले गए. इस संतान को वासुदेव ने नंद जी के यहां छोड़ दिया गया. नंद जी के यहां श्रीकृष्ण का पालन-पोषण हुआ. यशोदा मैया ने श्रीकृष्ण का नामकरण से लेकर उन्हें पुत्र प्रेम दिया. श्रीकृष्ण ने बचपन से ही धर्म की रक्षा और अधर्म के अंत के लिए कई लीलाएं करते रहे, जिससे सांसारिक लोग अचंभित भी हुए. इन्हीं चमत्कारों में से एक कंस वध प्रमुख था.

जन्माष्टमी व्रत का क्या है महत्व

श्रीकृष्ण हर संकट से उबारने वाले देवता माने जाते हैं. जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण के बाल रूप की पूजा के साथ इस दिन व्रत रखने की परंपरा है. मान्यता है इससे न सिर्फ आध्यात्मिक विकास होता है बल्कि जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता का आगमन होता है. जिसके चलते भक्त बड़ी संख्या में भगवान श्रीकृष्ण के मंदिर में जाकर भजन-कीर्तन और पूजा-पाठ करते हैं और मनोवांछित फल प्राप्त करने की आराधना करते हैं.

जन्माष्टमी पर दुर्लभ संयोग

इस साल 16 अगस्त को जन्माष्टमी पर इस दिन वृद्धि, ध्रुव, ध्वजा और श्रीवत्स नाम के शुभ योग रहेंगे. इनके अलावा बुधादित्य और गजलक्ष्मी नाम के राजयोग भी बनेंगे. ऐसे में जन्माष्टमी का महत्व दोगुना हो गया है.

जन्माष्टमी पर पूजा सामग्री

बाल गोपाल के वस्त्र, लड्डू गोपाल की प्रतिमा, गाय का दूध, माखन, गाय-बछड़े सहित प्रतिमा, मुरली, मोर पंख,शक्कर, मौसमी फल, पंचमेवा, कुश, गाय का दही, गाय का घी, छोटी इलायची, मिष्ठान, केले के पत्ते, औषधि, सिंहासन, मिश्री, खीरा, झूला, आसन, आभूषण, तुलसी की माला और कमलगट्टा. धूप बत्ती, अगरबत्ती, कपूर, रोली, सिंदूर, कुमकुम, दीपक और फूल, पंचामृत, नारियल, चंदन, यज्ञोपवीत 5, अक्षत, पान के पत्ते, सुपारी, हल्दी, पुष्पमाला, रुई, सप्तधान, गंगाजल, शहद, दूर्वा, तुलसी दल.

भगवान कृष्ण के रुचिकर भोजन का लगाएं भोग

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण के रुचिकर भोजन का भोग लगाने से भक्त की हर ईच्छाओं की पूर्ति होती है.  माखन-मिश्री का भोग लगाने के साथ-साथ 56 प्रकार के भोजन का भोग लगाने का भी विधान शास्त्रों में बताया गया है.

Disclaimer: यह सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि DBNewsupdate.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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