रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर को राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद द्वारा मिला ग्रेड !
Source : DB News Update
Written By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी.
RDVV Jabalpur News : मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश लगातार उच्च शिक्षा में नए आयाम स्थापित कर रहा है प्रदेश के जबलपुर स्थित रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) द्वारा निर्धारित मानकों पर ए ग्रेड दिया गया है.
नैक की टीम ने 18 से 20 जुलाई तक विश्वविद्यालय का निरीक्षण कर विश्वविद्यालय में पाठ्यक्रम गुणवत्ता, शिक्षण, प्रशिक्षण एवं मूल्यांकन, शोध, कंसल्टेंसी, आधारभूत ढांचा, विद्यार्थी सहयोग, गवर्नेंस, लीडरशिप मैनेजमेंट, इनोवेशन आदि मानकों के आधार पर परखा था।.
रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर को पूर्व में नैक द्वारा वर्ष 2002 एवं वर्ष 2015 में बी ग्रेड प्रदान किया गया था. इस बार नैक द्वारा विश्वविद्यालय को ए ग्रेड मिलने पर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय का उच्च शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद द्वारा निर्धारित मानकों पर खरा उतरना सराहनीय है.
पहले आरडीवीवी को मिला था B ग्रेड
रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर को पूर्व में राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) द्वारा वर्ष 2002 एवं वर्ष 2015 में ‘बी’ ग्रेड प्रदान किया गया था. उच्च शिक्षा में गुणवत्ता के लिये केन्द्रीय स्तर पर स्थापित संस्थान नेशनल एसिसमेंट एण्ड एक्रीडिटेशन काउंसल (NAAC) के साथ राज्य स्तर पर भी स्टेट लेवल नेक सेल (SLNC) संचालित है.
मध्यप्रदेश उच्च शिक्षा विभाग के राज्य स्तरीय नैक प्रकोष्ठ द्वारा महाविद्यालयों को गुणवत्तायुक्त बनाने के लिये निर्धारित मापदण्डों के आधार पर प्रशिक्षण, तकनीकी आवश्यकताओं के लिये हैण्ड होल्डिंग, महाविद्यालय की प्रगति की समीक्षा और समस्याओं का समाधान, आर्थिक सहयोग नैक से समन्वय करने तक हर चरण की तैयारी कराकर सभी शासकीय महाविद्यालयों को नैक प्रत्यायन एवं NIRF से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है.
कैसे निर्धारित होता है ग्रेड?
राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद की टीम ने 18 से 20 जुलाई 2024 तक विश्वविद्यालय का निरीक्षण कर विश्वविद्यालय में पाठ्यक्रम गुणवत्ता, शिक्षण, प्रशिक्षण एवं मूल्यांकन, शोध, कंसल्टेंसी, आधारभूत ढांचा, विद्यार्थी सहयोग, गवर्नेंस, लीडरशिप मैनेजमेंट, इनोवेशन आदि मानकों के आधार पर परखा था. राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) द्वारा रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय को निर्धारित मानकों पर “A” ग्रेड दिया गया है.
कुलपति से कुलगुरु का सफर और अब इंडिया से भारत
कुछ समय पहले ही कुलपति की जगह कुलगुरु शब्द यूनिवर्सिटी में प्रचलन में आया है. वहीं, अब इंडिया की जगह भारत शब्द का उपयोग किया जाएगा, जिससे हिंदी शब्द भारत को प्राथमिकता मिलेगी. यूनिवर्सिटी के फैसले को लेकर स्टूडेंट भी काफी खुश हैं. स्टूडेंट का कहना है कि भारत और इंडिया में हालांकि कोई फर्क नहीं है. लेकिन, हम भारतीय हैं और भारत लिखने पर हमें गर्व होता है.
2026 में RDVV में राष्ट्रपति का आगम
रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का आगमन हुआ. इस अवसर उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षण संस्थान केवल डिग्री देने के केंद्र नहीं, बल्कि नवाचार, अनुसंधान, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और रचनात्मक सोच के विकास के प्रमुख केंद्र होते हैं. विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति, परंपरा और भाषाओं के प्रति सम्मान का भाव विकसित करना भी विश्वविद्यालयों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है. आधुनिकता और परंपरा के संतुलन से ही देश का समग्र विकास संभव है. राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु रविवार को रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के 36वें दीक्षांत समारोह में शामिल हुईं थीं.
20 छात्रों को मिले स्वर्ण पदक
इस अवसर पर राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने विभिन्न संकायों में एक से अधिक स्वर्ण पदक अर्जित करने वाले 20 छात्र-छात्राओं को अपने करकमलों से स्वर्ण पदक प्रदान किया तथा उपाधियों का वितरण किया. कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के 141 विद्यार्थियों को 240 स्वर्ण पदकों का वितरण किया गया. साथ ही 182 शोधार्थियों को पीएचडी सहित विभिन्न उपाधियां प्रदान की. मंचीय कार्यक्रम के पूर्व महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने विश्वविद्यालय परिसर स्थित वीरांगना रानी दुर्गावती की प्रतिमा पर पुष्पांजली अर्पित की.
युवाओं के भारत को बड़ी अपेक्षाएं
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि आज का भारत युवाओं का भारत है और देश को उनसे बड़ी अपेक्षाएं हैं. केंद्र और राज्य सरकारें युवाओं को उनकी योग्यता के अनुरूप अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं. विश्वविद्यालयों को चाहिए कि वे शिक्षा, शोध, नवाचार और कौशल विकास के माध्यम से युवाओं को आत्मनिर्भर और राष्ट्रनिर्माण के लिए सक्षम बनाएं.
