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DB News Update | Divya Bhumi News > Blog > Religion > तुलसी विवाह के साथ प्रारंभ होंगे मांगलिक कार्य, जानें शुभ मुहूर्त और महत्व!
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तुलसी विवाह के साथ प्रारंभ होंगे मांगलिक कार्य, जानें शुभ मुहूर्त और महत्व!

DB News
Last updated: 10/09/2026 10:13 AM
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8 Min Read
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1 नवंबर 2025 को देवउठनी एकादशी व्रत रखा जाएगा. जानिए इसका महत्व, शुभ मुहूर्त, उपाय, प्रभाव, मंत्र और तुलसी विवाह से जुड़ी संपूर्ण जानकारी.

Source : DB News Update  

Contents
1 नवंबर 2025 को देवउठनी एकादशी व्रत रखा जाएगा. जानिए इसका महत्व, शुभ मुहूर्त, उपाय, प्रभाव, मंत्र और तुलसी विवाह से जुड़ी संपूर्ण जानकारी. चातुर्मास का होगा समापन एकादशी से भगवान विष्णु सम्हालेंगे सृष्टि इस साल तुलसी विवाह 2 नवंबर को शुभ मुहूर्त शुभ योग पूरे दिन पंचक, रात में भद्रा का साया देवउठनी एकादशी का महत्व ये सावधानी रखना जरूरी एकादशी के दिन करें ये काम देवउठनी एकादशी की पूजा विधि 

By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By : सुप्रिया

Devuthani Ekadashi 2025: देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु योग निद्रा से जागेंगे. इसके बाद तुलसी विवाह होगा. इसी दिन से वैवाहिक कार्यक्रम प्रारंभ होंगे. इस साल 1 नवंबर 2025 को देवउठनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा. एकादशी रवि योग पर पड़ रही है. इस योग में विष्णु भगवान की पूजा करने से साधक को मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती हैं. इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने का भी विधान है. भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी दोनों की साथ में पूजा करने से वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है.

 ऐसी मान्यता है कि देवउठनी एकादशी से मांगलिक कार्य भी शुरू हो जाते हैं और इसके अगले दिन तुलसी विवाह किया जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की तिथि 01 नवंबर को सुबह 09:11 मिनट पर शुरू होगी.

वहीं, इसका समापन 02 नवंबर को सुबह 07:31 मिनट पर होगा.

 चातुर्मास का होगा समापन

हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल देवउठनी एकादशी 01 नवंबर को मनाई जाएगी. इसी दिन जो वैष्णव साधु चातुर्मास करते हैं, उनका चातुर्मास भी खत्म होगा और शुभ कार्य प्रारंभ हो जाएंगे. मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं और शुभ कार्य करने के द्वार खुलते हैं. इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से समस्त पापों का नाश होता है. घर में सुख-समृद्धि आती है.

 एकादशी से भगवान विष्णु सम्हालेंगे सृष्टि

बतादें कि भगवान विष्णु सोकर उठने की खुशी में देवोत्थान एकादशी मनाने की मान्यता है. इसी दिन से भगवान विष्णु सृष्टि को संभालते हैं. इसी दिन तुलसी से उनका विवाह हुआ था. इस मान्यता के चलते महिलाएं व्रत रखती हैं. परम्परानुसार देव देवउठनी एकादशी में तुलसी जी विवाह संपन्न कराने का विधान है. तुलसी जी का विवाह भगवान विष्णु से वैदिक रीति-रिवाज से किया जाता है, उनका श्रंगार करके उन्हें चुनरी ओढ़ाई जाती है.

 उनकी परिक्रमा की जाती है. शाम के समय रौली से आंगन में चौक पूर कर भगवान विष्णु के चरणों को कलात्मक रूप से अंकित किया जाता है. रात्रि को विधिवत पूजन के बाद प्रात:काल भगवान को शंख, घंटा आदि बजाकर जगाया जाएगा और पूजा करके कथा सुनी जाएगी.

 इस साल तुलसी विवाह 2 नवंबर को

ज्योतिषाचार्य के अनुसार हिन्दू पंचांग में प्रत्येक वर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को तुलसी विवाह का आयोजन किया जाता है. इस पुण्य दिन को ‘देवउठनी एकादशी’ या ‘प्रबोधिनी एकादशी’ के नाम से भी जाना जाता है.

इस बार तुलसी विवाह 2 नवंबर को पड़ रहा है. हिंदू धर्म में तुलसी विवाह को विशेष महत्व दिया गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तुलसी विवाह के दिन माता तुलसी और भगवान शालिग्राम की पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और उनके वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि आती है.

 साथ ही पति-पत्नी के बीच उत्पन्न होने वाली समस्याएं भी दूर हो जाती हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विधि-विधान के साथ तुलसी विवाह कराने वालों पर भगवान विष्णु की विशेष कृपा रहती है. मान्यता है कि तुलसी विवाह करने से कन्यादान के समान पुण्य की प्राप्ति होती है.

 भगवान शालीग्राम और माता तुलसी का विवाह कराने से वैवाहिक जीवन सुखी रहता है. महिलाएं सुख-समृद्धि की प्राप्ति के लिए इस दिन व्रत-पूजन करती हैं.

 शुभ मुहूर्त

 हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की तिथि 01 नवंबर को सुबह 09:11 मिनट पर शुरू होगी. वहीं, इसका समापन 02 नवंबर को सुबह 07:31 मिनट पर होगा. पंचांग को देखते हुए इस साल देवउठनी एकादशी 01 नवंबर को मनाई जाएगी.

 शुभ योग

 देवउठनी एकादशी पर रवि योग बन रहा है. रवि योग सुबह में 6:33 मिनट से बनेगा, जो शाम 6:20 मिनट तक रहेगा. वहीं ध्रुव योग प्रात:काल से शुरू होगा और 2 नवंबर को तड़के 2:10 मिनट तक रहेगा. उसके बाद से व्याघात योग होगा. एकादशी पर शतभिषा नक्षत्र प्रात:काल से लेकर शाम को 6:20 मिनट तक है. उसके बाद से पूर्व भाद्रपद नक्षत्र है.

 पूरे दिन पंचक, रात में भद्रा का साया

इस साल देवउठनी एकादशी को पूरे दिन पंचक रहेगा. भद्रा रात में 08:27 मिनट से शुरू होगी और अगले दिन 2 नवंबर को सुबह 06:34 तक रहेगी. भद्रा के समय में शुभ कार्य वर्जित बतलाए गए हैं.

 देवउठनी एकादशी का महत्व

  • भगवान विष्णु शयनी एकादशी को सो जाते हैं. वह इस दिन जागते हैं.
  • देवउठनी एकादशी के दिन जातक सुबह जल्द उठकर स्वस्छ वस्त्र पहनते हैं.
  • भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करें.
  • शास्त्रों में वर्णित है कि भगवान विष्णुजी के अवतार भगवान श्रीकृष्ण ने एकादशी को देवी वृंदा (तुलसी) से शादी की थीं.
  • भगवान विष्णु चार माह की योग निद्रा के बाद इसी दिन जागते हैं.

 ये सावधानी रखना जरूरी

  1. एकादशी पर चावल का सेवन करने का विधान नहीं है.
  2. हिंदू धर्म में वैसे ही मांस-मंदिरा को तामसिक प्रवृत्ति बढ़ने वाला माना गया है. ऐसे में किसी पूजन में इन्हें खाने को लेकर मनाही है.
  3. एकादशी के दिन महिलाओं का भूलकर भी अपमान न करें. चाहें वे आपसे छोटी हो या बड़ी.
  4. एकादशी के दिन भक्त भगवान विष्णु की अराधना करते हैं ऐसे में माना जाता है कि इस दिन सिर्फ भगवान का गुणगान करना चाहिए.
  5. एकादशी के दिन भूलकर भी किसी पर क्रोध नहीं करना चाहिए और वाद-विवाद से भी दूरी बनाकर रखनी चाहिए.
  6. एकादशी के दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए. इस दिन भूलकर भी शारीरिक संबंध नहीं बनाने चाहिए.

 एकादशी के दिन करें ये काम

  • एकादशी के दिन दान करना उत्तम माना गया है.
  • एकादशी के दिन संभव हो तो गंगा स्नान करना चाहिए.
  • विवाह संबंधी बाधाओं को दूर करने के लिए एकादशी के दिन केसर, केला या हल्दी का दान करना चाहिए.
  • एकादशी का उपवास रखने से धन, मान-सम्मान और संतान सुख के साथ मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है.
  •  एकादशी का व्रत रखने से पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है.

 देवउठनी एकादशी की पूजा विधि

देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु को धूप, दीप, पुष्प, फल, अर्घ्य और चंदर आदि अर्पित करें. भगवान की पूजा करके मंत्रों का जाप करें.

 

Disclaimer: यह सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि DBNewsupdate.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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