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DB News Update | Divya Bhumi News > Blog > Madhya Pradesh > नर्मदा नदी का 11000 लीटर से किया गया दुग्धाभिषेक!
Madhya Pradesh

नर्मदा नदी का 11000 लीटर से किया गया दुग्धाभिषेक!

DB News
Last updated: 10/04/2026 9:22 PM
DB News
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6 Min Read
नर्मदा में दुग्धाभिषेक किया गया.
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नर्मदा नदी में इतनी बड़ी मात्रा में दूध बहाए जाने को लेकर सोशन मीडिया में बहस छिड़ी, अपने आपको पर्यावरणविद् मानने वाले लोगों ने चिंता जताई. किसी ने पानी के ऑक्सीजन लेवल को लेकर चिंता जताई तो किसी ने कहा आस्था#

Source : DB News Update  

Contents
नर्मदा नदी में इतनी बड़ी मात्रा में दूध बहाए जाने को लेकर सोशन मीडिया में बहस छिड़ी, अपने आपको पर्यावरणविद् मानने वाले लोगों ने चिंता जताई. किसी ने पानी के ऑक्सीजन लेवल को लेकर चिंता जताई तो किसी ने कहा आस्था#41 टन हवन सामग्री से वायुमंडल को किया गया शुद्धपर्यावरणविद की अपनी रायचैत्र नवरात्रि के अवसर पर आयोजित हुआ था अनुष्ठानआयोजकों ने पानी की शुद्धता और समृद्धिकारक बतायानदी में पानी का ऑक्सीजन लेवल हो जाएगा कम!सोशल मीडिया में तरह-तरह की बयानबाजी

By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी

Narmada River Viral Video: एमपी के सीहोर जिले में 21 दिवसीय यज्ञ देश भर में चर्चा का विषय बन गया. पर्यावरण की शुद्धता और देश मे सुख समृद्धि बनी रहे इसी हेतु के लिए सातदेव स्थित पातालेश्वर महादेव मंदिर में 21 दिवसीय यज्ञ का यह आयोजन किया गया. लेकिन जैसे ही इस यज्ञ के समापन अवसर पर 11,000 लीटर दूध से नर्मदा नदी का दुग्धाभिषेक हुआ और सोशल मीडिया में वीडिया वायरल हुआ. उसके बाद से तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आना प्रारंभ हो गईं. किसी ने इस यज्ञ को पर्यावरण के लिए नुकसानदेय बताने की कोशिश की तो किसी ने भारत की धार्मिक मान्यता और परंपरा का हवाला देते हुए मान्यता प्रदान की. लेकिन यहां सवाल यह उठता है कि कोई व्यक्ति अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप काम न करे या फिर यज्ञ-अनुष्ठान पर प्रतिबंध लगा दे. यह किस प्रकार की धार्मिक स्वतंत्रता है? यह समझ से परे है. जबकि हर व्यक्ति को अपनी धार्मिक मान्यताओं को मानने और बोलने की आजादी का हवाला दिया जाता है. आखिरकार देश में इस प्रकार की बहस को हवा देने के पीछे कौन सी मानसिकता काम कर रही है? यह भी सोचनीय है.

41 टन हवन सामग्री से वायुमंडल को किया गया शुद्ध

वायु की शुद्धता को बनाए रखने के लिए सिहोर में आयोजित इस महायज्ञ में 41 टन हवन सामग्री का उपयोग किया गया. धार्मिक मान्यता है कि हवन करने से वायु मंडल शुद्ध होता है और बारिस अच्छी होती है. यह आयोजन शिवानंद महाराज के नेतृत्व में आयोजित हुआ, जो नर्मदा नदी में दुग्धाभिषेक करते ही यह धार्मिक अनुष्ठान सोशल मीडिया में वायरल हो गया और यूजर्स के बीच धार्मिक आस्था और दूध की बर्बादी पर बहस का हिस्सा बन गया.

पर्यावरणविद की अपनी राय

सोशल मीडिया में कई लोग अपने आप को पर्यावरणविद बताते हुए मध्य प्रदेश के सीहोर के इस धार्मिक अनुष्ठान को इकोसिस्टम के विपरीत बताने की कोशिश की. वहीं 11000 लीटर दुग्ध अभिषेक को धार्मिक अनुष्ठान करने वालों ने वैदिक परंपराओं के अनुरूप बताने की कोशिश की. वहीं एक सोशल मीडिया यूजर्स ने तो इस अनुष्ठान के संबंध बेहूदी टिप्पणी करते हुए नदी के पानी को दूषित किए जाने तक का जिक्र कर दिया.

चैत्र नवरात्रि के अवसर पर आयोजित हुआ था अनुष्ठान

सोशल मीडिया में वायरल हो रहे वीडियो के आधार पर जब अनुष्ठान के संबंध में जानकारी ली गई तो पता चला कि सिहोर जिला मुख्यालय से करीब 90 किलोमीटर दूर भेरुंडा क्षेत्र के सतदेव गांव में पातालेश्वर महादेव मंदिर है, जहां चैत्र नवरात्रि के दौरान 21 दिवसीय एक धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया गया था. इसके समापन अवसर पर नर्मदा नदी में करीब 11,000 लीटर दूध से दुग्धाभिषे किया गया.

आयोजकों ने पानी की शुद्धता और समृद्धिकारक बताया

इस आयोजन को लेकर जब मीडिया कर्मियों ने आयोजकों से मुलाकात करके जानकारी ली कि आखिरकार यह आयोजन किस उद्देश्य से किया गया था, तो आयोजकों का कहना था कि पानी की शुद्धता, श्रद्धालुओं की भलाई और समृद्धि के लिए अनुष्ठान और प्रार्थना के हिस्से के रूप में नदी में दूध चढ़ाया गया था. दूध को टैंकरों में नदी के किनारे लाया गया और बाद में भक्तों की भीड़ की उपस्थिति में मंत्रोंच्चारण के साथ दुग्धाभिषेक किया गया. वहीं पर्यावरणविदों ने इस प्रथा पर चिंता जताई और बुरे प्रभाव की चेतावनी दी.

नदी में पानी का ऑक्सीजन लेवल हो जाएगा कम!

वहीं पर्यावरणविद् का कहना है कि, ‘इतनी बड़ी मात्रा में कार्बनिक पदार्थ पानी में घुलित ऑक्सीजन को कम कर सकते हैं, जिससे नदी पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है.’

ये भी कहा कि, ‘ये पीने के पानी के लिए नदी पर निर्भर स्थानीय समुदायों को प्रभावित करते हैं और जलीय जीवन के साथ-साथ घरेलू जानवरों को भी खतरे में डालते हैं.’ ऐसे कार्यक्रम सचेत होकर प्रतीकात्मक रूप से भी किए जा सकते हैं.

सोशल मीडिया में तरह-तरह की बयानबाजी

नर्मदा में किए गए दुग्धाभिषेक को लेकर सोशल मीडिया में तरह-तरह की बयानबाजी की जा रही है. किसी ने 11,000 लीटर दूध एक महत्वपूर्ण कार्बनिक प्रदूषक के रूप में देखा तो किसी ने देश के गरीब बच्चों को दूध परोसकर पुण्य कमाने की सलाह दी. लेकिन जिन लोगों के द्वारा सलाह दी जा रही है. क्यो उन लोगों ने कभी किसी गरीब को दूध-रोटी देने की कोशिश की है या फिर किसी भण्डारे का आयोजन करके सार्वजनिक रूप से भोजन कराने का प्रयास किया है? यदि ऐसे लोग देश के धार्मिक अनुष्ठानों की कमियां देखने के बजाय गांव, गरीब और गो पालन पर ध्यान दिया होता तो उन्हें ऐसे सोशल मीडिया में कमेंट करने की जरूरत ही नहीं पड़ती.

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