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By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
भारत माता की जय और जय जगन्नाथ से बात शुरू की। उन्होंने कहा- इस आशीर्वाद के लिए मैं समस्त देश वासियों का ऋणी हूं। भारतीय जनता पार्टी का गठन 6 अप्रैल, 1980 को हुआ.
दिल्ली. भाजपा मुख्यालय में प्रधानमंत्री ने कहा कि 1962 के बाद पहली बार कोई सरकार अपने दो कार्यकाल पूरा करने के बाद तीसरी बार सत्ता में आई है। उन्होंने आगे कहा कि तेलंगाना में हमारी संख्या दोगुनी हो गई है, मध्यप्रदेश, दिल्ली, गुजरात, छत्तीसगढ़, हिमाचल में लगभग क्लीन स्वीप किया है. इसी के साथ मोदी सरकार एक बार फिर बनने जा रही है।
लोकसभा चुनाव में तीसरी बार सरकार बनाने के बीच पीएम मोदी दिल्ली के भाजपा मुख्यालय पहुंचे। भारत माता की जय और जय जगन्नाथ से बात शुरू की। उन्होंने कहा- इस आशीर्वाद के लिए मैं समस्त देश वासियों का ऋणी हूं। आज बड़ा मंगल है। इस पावन दिन एनडीए की लगातार तीसरी बार सरकार बननी तय है। हम सभी जनता जर्नादन के बहुत आभारी हैं।
देशवासियों ने भाजपा पर एनडीए पर पूर्ण विश्वास जताया है। आज की ये विजय दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की जीत है। ये भारत के संविधान पर अटूट निष्ठा की जीत है। ये विकसित भारत के प्रण की जीत है। ये सबका साथ, सबका विकास मंत्र की जीत है।
भारत के इतिहास में एक ऐतिहासिक उपलब्धि
भाजपा दफ्तर पहुंचने से पहले पीएम ने X पर पोस्ट किया। उन्होंने लिखा- जनता ने लगातार तीसरी बार NDA पर भरोसा जताया है। यह भारत के इतिहास में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।
उन्होंने लिखा- मैं इस स्नेह के लिए जनता जनार्दन को नमन करता हूं और उन्हें विश्वास दिलाता हूं कि हम जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए पिछले दशक में किए गए अच्छे कार्यों को जारी रखेंगे। मैं अपने सभी कार्यकर्ताओं को उनकी कड़ी मेहनत के लिए भी सलाम करता हूं। शब्द कभी भी उनके असाधारण प्रयासों के साथ न्याय नहीं कर पाएंगे।
इतिहास भारतीय जनसंघ से जुड़ा हुआ है
भारतीय जनता पार्टी का गठन 6 अप्रैल, 1980 को हुआ, परन्तु इसका इतिहास भारतीय जनसंघ से जुड़ा हुआ है। स्वतंत्रता प्राप्ति तथा देश विभाजन के साथ ही देश में एक नई राजनीतिक परिस्थिति उत्पन्न हुई। गांधीजी की हत्या के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर प्रतिबंध लगाकर देश में एक नया राजनीतिक षड्यंत्र रचा जाने लगा। सरदार पटेल के देहावसान के पश्चात् कांग्रेस में नेहरू का अधिनायकवाद प्रबल होने लगा। गांधी और पटेल दोनों के ही नहीं रहने के कारण कांग्रेस ‘नेहरूवाद’ की चपेट में आ गई तथा अल्पसंख्यक तुष्टिकरण, लाइसेंस-परमिट-कोटा राज, राष्ट्रीय सुरक्षा पर लापरवाही, राष्ट्रीय मसलों जैसे कश्मीर आदि पर घुटनाटेक नीति, अंतर्राष्ट्रीय मामलों में भारतीय हितों की अनदेखी आदि अनेक विषय देश में राष्ट्रवादी नागरिकों को उद्विग्न करने लगे। ‘नेहरूवाद’ तथा पाकिस्तान एवं बांग्लादेश में हिन्दू अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार पर भारत के चुप रहने से क्षुब्ध होकर डॉ श्यामा प्रसाद मुकर्जी ने नेहरु मंत्रिमंडल से त्यागपत्र दे दिया। इधर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कुछ स्वयंसेवकों ने भी प्रतिबंध के दंश को झेलते हुए महसूस किया कि संघ के राजनीतिक क्षेत्र से सिद्धांततः दूरी बनाये रखने के कारण वे अलग-थलग तो पड़े ही, साथ ही संघ को राजनीतिक तौर पर निशाना बनाया जा रहा था। ऐसी परिस्थिति में एक राष्ट्रवादी राजनीतिक दल की आवश्यकता देश में महसूस की जाने लगी। फलतः भारतीय जनसंघ की स्थापना 21 अक्टूबर, 1951 को डॉ श्यामा प्रसाद मुकर्जी की अध्यक्षता में दिल्ली के राघोमल आर्य कन्या उच्च विद्यालय में हुई।
भारत-चीन युद्ध में भी भारतीय जनसंघ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई
भारतीय जनसंघ ने डॉ श्यामा प्रसाद मुकर्जी के नेतृत्व में कश्मीर एवं राष्ट्रीय अखंडता के मुद्दे पर आंदोलन छेड़ा तथा कश्मीर को किसी भी प्रकार का विशेषाधिकार देने का विरोध किया। नेहरू के अधिनायकवादी रवैये के फलस्वरूप डॉ श्यामा प्रसाद मुकर्जी को कश्मीर की जेल में डाल दिया गया, जहां उनकी रहस्यपूर्ण स्थिति में मृत्यु हो गई। एक नई पार्टी को सशक्त बनाने का कार्य पण्डित दीनदयाल उपाध्याय के कंधों पर आ गया। भारत-चीन युद्ध में भी भारतीय जनसंघ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा राष्ट्रीय सुरक्षा पर नेहरू की नीतियों का डटकर विरोध किया। 1967 में पहली बार भारतीय जनसंघ एवं पंडित दीनदयाल उपाध्याय के नेतृत्व में भारतीय राजनीति पर लम्बे समय से बरकरार कांग्रेस का एकाधिकार टूटा, जिससे कई राज्यों के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की पराजय हुई।

