2026 में गंगा दशहरा का पर्व सोमवार 25 मई से प्रारंभ है. वर्षों बाद इस साल गंगा दशहरा पर कई शुभ योग बन रहा है. आइए जानते हैं इस दिन क्या करना चाहिए?
Source : DB News Update
By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Ganga Dussehra 2026: सनातन धर्म की परंपराएं और तीज-त्योहार वैज्ञानिक प्रमाणिकता से प्रमाणित हो रहे हैं. भीषण गर्मी के दिनों में शरीर को ठंडा रखना जरूरी है. इसके लिए ठंडे पानी का इस्तेमाल करने की सलाह डॉक्टर भी देते हैं और ठंडे पानी से स्नान करने से शरीर की गर्मी भी शांत होती है. जैसा कि आप सभी को पता है कि गर्मी के दिनों में नदी-तालाब का पानी ठंडा रहता है. नदी के पवित्र जल में स्नान करने से शरीर में ताजगी का एहसास होता है. वहीं पौराणिक कथाओं में भी नदी के पवित्र जल में स्नान करने का महत्व बताया गया है. जिससे न केवल शरीर में ताजगी आती है. अपितु पवित्र नदियों का पानी पहाड़ की कंदराओं से होते हुए व नदी के बीच खड़े पेड़-पौधों की जड़ों से होकर जो पानी गुजरता है, उस पानी में औषधि गुण मिल जाते हैं. ऐसे औषधीय गुणों से युक्त बहते पानी में स्नान करने से शरीर के कीटाणु तो नष्ट होते ही हैं. साथ ही रोग-दोष से मुक्ति भी मिलती है. हमारे भारतीय वेद-पुराणों में ऐसी पवित्र नदियों में स्नान करने की विस्तृत व्याख्या की गई है. मां गंगा में समय-समय पर स्नान करने का महत्व बताया गया है, जिससे मनुष्य को पुण्य लाभ अर्जित होता है. ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर गंगा दशहरा पर पवित्र नदियों में स्नान करने का महत्व कुछ इन्हीं मान्यताओं से जुड़ा हुआ है. वर्ष 2026 में गंगा दशहरा के अवसर पर अधिक मास और नौतपा का संयोग भी बन रहा है, जिससे इस तिथि पर स्नान करने का महत्व धार्मिक दृष्टि से कई गुणा अधिक है.
गंगा दशहरा का पर्व केवल आस्था से जुड़ा हुआ नहीं है. बल्कि, आत्मशुद्धि, दान-पुण्य, मोक्ष प्राप्ति और मां गंगा अवतरण दिवस से जुड़ा हुआ है. ऐसी धार्मिक मान्यता है गंगा दशहरा पर गंगा स्नान के दस प्रकार के पाप नष्ट हो जाते हैं, इसलिए इसे गंगा दशहरा के नाम से जाना जाता है.
गंगा दशहरा को लेकर धार्मिक मान्यता
पौराणिक कथा में उल्लेख मिलता है कि, राजा भगीरथ ने अपने पूर्वजों की आत्मा को मोक्ष दिलाने के उद्देश्य से कठोर तपस्या की थी. उनकी तपस्या से मां गंगा प्रसन्न हो गईं और मां गंगा पृथ्वी पर आने के लिए तैयार हो गईं. लेकिन मां गंगा के तेज प्रवाह (वेग) को संभालना आसान नहीं था. तब भगवान शिव ने गंगा को अपनी जटाओं में धारण किया और धीरे-धीरे पृथ्वी पर प्रवाहित किया.
इसी घटना की स्मृति में गंगा दशहरा मनाने की परंपरा बन गई. मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान करने से मनुष्य के पाप कट जाते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है. साथ ही जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है.
गंगा दशहरा 2026 कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ अधिक मास शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 25 मई सुबह 04 बजकर 28 मिनट से लग जाएगी और 26 मई सुबह 05 बजकर 11 मिनट तक रहेगी. उदयातिथि के अनुसार गंगा दशहरा इस वर्ष सोमवार 25 मई 2026 को मनाई जाएगी. इस दिन गंगा स्नान के लिए हरिद्वार, प्रयागराज, वाराणसी और ऋषिकेश जैसे तीर्थों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है. जो लोग गंगा स्नान के लिए इन स्नानों पर नहीं पहुंच पाते हैं, वे नर्मदा, यमुना जैसी पवित्र नदियों में भी स्नान करते हैं. मां गंगा की आराधना, पूजा-अर्चना करते हैं.
गंगा दशहरा 2026 स्नान-दान का मुहूर्त
कल सोमवार 25 मई को गंगा दशहरा पर स्नान-दान के लिए ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना सबसे शुभ माना गया है. सुबह 4 बजकर 30 मिनट से लेकर 5 बजकर 30 मिनट तक का समय स्नान दान के लिए समय शुभ है. अगर किसी कारण ब्रह्म मुहूर्त में स्नान न कर पाएं तो आप इन अन्य मुहूर्त में भी स्नान और दान का कार्य कर सकते हैं.
अमतृ चौघड़िया- सुबह 05 बजकर 25 मिनट से 07 बजकर 08 मिनट तक
शुभ चौघड़िया- सुबह 08 बजकर 51 मिनट से 10 बजकर 34 मिनट तक.
गंगा स्नान और पूजा मंत्र
गंगा दशहरा पर स्नान के दौरान मंत्रों का स्मरण जरूर करना चाहिए, ऐसा पद्म पुराण में वर्णन मिलता है. मंत्र जाप से गंगा स्नाना का पुण्य मिलता है जाने-अनजाने में किए पाप दोष नष्ट हो जाते हैं और मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है. इसलिए स्नान और पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप जरूर करें-
स्नान मंत्र- गंगा गंगेति यो ब्रूयाद् योजनानां शतैरपि, मुच्यते सर्वपापेभ्यो विष्णुलोकं स गच्छति।
‘यत्संस्मृतिः सपदि कृन्तति दुष्कृतौघं, पापवलीं जयति योजनलक्षतोअपि। यन्नाम नाम जगदुच्चरितं पुनाति दिष्ट्या हि सा पथि दृशोर्भविताद्या गंगा।’
पूजा मंत्र- ‘द्रवीभूतं परं ब्रह्म परमानन्ददायिनी, अर्घ्यं गृहाण में गंगे पापं हर नमोस्तुते।’
गंगा दशहरा पर करें ये पुण्यकारी कार्य
- गंगा दशहरा पर स्नान के साथ ही दान अवश्य करना चाहिए.
- गरीब-असहाय की मदद और परोपकार जरूर करना चाहिए.
- इस दिन जरूरतमंदों को जल से भरे घड़े, पंखा, छाता, फल, वस्त्र और सत्तू आदि का दान करना शुभ माना गया है.
- गर्मी के मौसम में किए गए ये दान पुण्यदायी माने जाते हैं.
- पशु-पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था कराना चाहिएङ
- गरीबों को भोजन कराना भी शुभ फलदायी माना गया है.
- व्यक्ति को गंगा तट पर जाकर आस्था और विश्वास के साथ गंगा में 10 डुबकी लगाकर स्नान करना चाहिए.
- अगर किसी कारणवश गंगा तट पर न जा पाएं तो घर में नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें.
- प्यासे लोगों को शर्बत बनाकर पिलाना चाहिए.
- मां गंगा के मंत्रों का जप और उनके स्तोत्र या चालीसा का पाठ करना चाहिए.
- गंगा दशहरा पर व्यक्ति को पेट को ठंडक पहुंचाने वाली चीजें जैसे शरबद, सत्तू, खरबूजा, पानी भरा कलश आदि के साथ धन का दान करना चाहिए.
- गंगा दशहरा के दिन मां की पूजा करते समय शुद्ध घी का दीपक गंगा नदी में प्रवाहित करें.
- जिस गंगा को राजा भगीरथ अपने पुरखों का तारने के लिए पृथ्वी पर लाए थे, उस गंगा से जुड़े महापर्व वाले दिन पितरों की विशेष रूप से पूजा और उनके लिए तर्पण अवश्य करना चाहिए.
अधिकमास में गंगा दशहरा का शुभ संयोग
‘ज्येष्ठे मलमासे सति तत्रैव दशहरा कार्या, न तु शुद्धे । दशहरासु नोत्कर्षः चतुर्व्वपि युगादिषु’
शास्त्रों के अनुसार, ज्येष्ठ अधिक मास में गंगा दशहरा पर्व में गंगा स्नान, दान, पूजा आदि करना शुद्ध ज्येष्ठ की अपेक्षा अधिक फलप्रदायक होता है.
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