अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने को लेकर इस्लामाबाद में सोमवार को दूसरे दौर की बातचीत होने वाली है. इसी बीच ट्रंप ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है.
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By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
US Iran Conflict: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चिरपरिचत अंदाज में धमकी देते हुए कहा है कि ‘सुलह करो या तबाही झेलो…’ ईरान के पास आखिरी मौका है. अगर समझौता नहीं हुआ तो ईरान के इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़े हमले किए जाएंगे. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी डेलिगेशन सोमवार को बातचीत के लिए पाकिस्तान पहुंचेंगे. यहां बतादें कि अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने को लेकर इस्लामाबाद में सोमवार को दूसरे दौर की बातचीत होने वाली है. लेकिन इससे पहले ईरान ने वहां अपने प्रतिनिधियों को भेजने से इनकार कर दिया है.
ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी तस्नीम के मुताबिक जब तक ईरान पर नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहेगी, तब तक पाकिस्तान में बातचीत के लिए कोई डेलिगेशन नहीं भेजा जाएगा. ट्रम्प ने न्यूयॉर्क पोस्ट से बातचीत में पुष्टि की है कि उनके विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर इस्लामाबाद पहुंचेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस पाकिस्तान नहीं जाएंगे. वेंस ने 11-12 अप्रैल को ईरान से बातचीत में अमेरिकी डेलिगेशन का नेतृत्व किया था.
सीजफायर के उल्लंघन होने के बाद भड़के ट्रंप
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर गुस्सा दिखाते हुए ट्रंप ने ईरान पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने लिखा, “ईरान ने कल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में गोलियां चलाने का फैसला किया, यह हमारे संघर्षविराम समझौते का पूर्ण उल्लंघन है! उनमें से कई गोलियां एक फ्रांसीसी जहाज और ब्रिटेन के एक मालवाहक जहाज पर दागी गईं. यह अच्छा नहीं था, है ना?”
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में होगी वार्ता
दूसरे दौर की बातचीत में धमकियों के बीच ट्रंप ने कूटनीति का रास्ता खुला रखने के भी संकेत दिए हैं. उन्होंने बताया कि उनके प्रतिनिधि सोमवार (20 अप्रैल) शाम बातचीत के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पहुंच रहे हैं. ट्रंप ने लिखा कि वे वहां एक समझौते के लिए बातचीत करेंगे, जिसे उन्होंने “बहुत ही उचित और तर्कसंगत डील” करार दिया.
ब्लॉकेड और आर्थिक नुकसान का जिक्र किया
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप ने ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने की घोषणा पर तंज कसते हुए कहा कि अमेरिका की नाकेबंदी ने इसे पहले ही बंद कर दिया है. ट्रंप के अनुसार, ईरान कह रहा है कि वे रास्ता बंद कर रहे हैं, जो अजीब है क्योंकि हमारे ‘ब्लॉकेड’ ने इसे पहले ही बंद कर रखा है. वे अनजाने में हमारी मदद ही कर रहे हैं. इस रास्ते के बंद होने से ईरान को रोजाना $50 करोड़ का नुकसान हो रहा है, जबकि अमेरिका को कोई नुकसान नहीं है. बल्कि कई जहाज अब तेल भरने के लिए अमेरिका के टेक्सस, लुइसियाना और अलास्का जा रहे हैं.
‘नो मोर मिस्टर नाइस गाय’
ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ईरान इस समझौते को स्वीकार नहीं करता है, तो अंजाम बहुत बुरा होगा. उन्होंने लिखा, “मुझे उम्मीद है कि वे इसे स्वीकार कर लेंगे, क्योंकि अगर उन्होंने ऐसा नहीं किया, तो संयुक्त राज्य अमेरिका ईरान के हर एक पावर प्लांट और हर एक पुल को उड़ा देगा. अब कोई शराफत नहीं !” ट्रंप ने आगे बेहद आक्रामक लहजे में कहा कि पिछले 47 वर्षों में अन्य राष्ट्रपतियों ने जो नहीं किया, वह उसे पूरा करना अपना सम्मान समझेंगे. उन्होंने साफ कहा, “ईरान की किलिंग मशीन को खत्म करने का समय आ गया है!”
अमेरिकी और इजरायली हवाई हमलों के साथ शुरू हुआ था संघर्ष
यहां बताना जरूरी है कि अमेरिका-ईरान के बीच यह सीधा संघर्ष 28 फरवरी को तेहरान पर अमेरिकी और इजरायली हवाई हमलों के साथ शुरू हुआ था. पिछले से पिछले हफ्ते एक अस्थिर सीजफायर हुआ था, जिससे पहले ट्रंप ने पूरी ईरानी सभ्यता को खत्म करने की धमकी दी थी. पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुए दो सप्ताह के संघर्षविराम के तहत ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों को गुजरने देने पर सहमत हुआ था.
हालांकि, पिछले सप्ताहांत इस्लामाबाद में हुई पहले दौर की बातचीत बेनतीजा रही. वर्तमान में स्थिति यह है कि अमेरिका ने अपनी नाकेबंदी जारी रखी है, जबकि ईरान ने अमेरिका पर “विश्वासघात” का आरोप लगाते हुए शनिवार को फिर से प्रतिबंध लागू कर दिए हैं. अब सबकी नजरें सोमवार को इस्लामाबाद में होने वाली दूसरे दौर की बातचीत पर टिकी हैं.

