प्रेमानंद महाराज को लेकर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा चमत्कार उसको कहते हैं जो शास्त्रीय चर्चा पर साझगार हो वो राधा बल भी है, राधा सुधा की एक श्लोकार्थ भी ठीक से बता दें तो मैं मान जाउंगा.
By : DB News Update | Edited By : प्रिंस अवस्थी
Premanand Maharaj Controversy: प्रेमानंद महाराज को चैलेंज करना जगद्गुरु रामभद्राचार्य को महंगा पड़ता दिख रहा है. इलेक्ट्रानिक मीडिया पर संतों के बीच बहस शुरू हो गई और रामभद्राचार्य जी को कई संत चैलेंज करते देखे जा रहे हैं. वहीं सोशल मीडिया में कई लोग कह रहे हैं कि प्रेमानंद महाराज को कम पढ़ा लिखा कहकर अपमानित करने का प्रयास किया गया है. किसी यूजर ने लिखा है कि कोई बताओ वो खुद चमत्कार में विश्वास नहीं रखते और दूसरी बात ऐसे श्लोक का क्या करेंगे, जो जनता न पढ़ सके और न उसका अर्थ समझ सके. एक यूजर ने लिखा कि ये महराज जी को चुनौती दे रहे हैं. जब कोई शक्ति नहीं है तो वो 20 साल से दोनों किडनी फेल होने के बाद कैसे जी रहे हैं. ये बिना शक्ति के संभव नहीं है. कोई संत दूसरे संत से कैसे बोल सकते हैं.
एक यूजर ने दोनों में तुलना कर डाली
- प्रेमानंद महाराज जी कभी किसी के मंच पर नहीं गए. रामभद्राचार्य जी को लोग जगतगुरु कहते हैं, लेकिन वो (रामभद्राचार्य) जाकर मंच साझा करते हैं.
- नेताओं और अन्य तमाम लोगों के साथ. प्रेमानन्द महाराज ने कभी भी जातीय दम्भ की बात नहीं की. बल्कि खुद को संत कहते हुए जातीय नाम यश आदि से विरक्त ही बताया है.
- रामभद्राचार्य जी अक्सर जातिगत बात करते हुए मिल जाते हैं. ब्राह्मणों में भी भेद बताते हुए नीच और उच्च बताने लगते हैं.
- प्रेमानन्द जी ने कभी किसी महापुरुष पर कोई अभद्र टिप्पणी नहीं की है, न ही आहत करने वाली कोई बात कही हो.
- रामभद्राचार्य जी कथावाचन करते हुए मंच से ही वंचितों के मसीहाओं ( मुलायम सिंह जी, कांशीराम जी) पर अभद्र टिप्पणी की थी.
- प्रेमानन्द महाराज जी घूम घूमकर कथा करके पैसे कमाने का प्रयास नहीं करते हैं, लोगों को शिक्षा देते हैं, मार्ग दिखाते हैं और अपनी भक्ति करते हैं. धर्म के साथ सामाजिक तार्किक जीवन में आस्था रखते हैं.
- रामभद्राचार्य जी कथावाचक भी हैं, राजनीतिक दलों से संबंध रखते हैं, नेताओं से मिलते हैं, उनकी सराहना में बातें करते हुए मंच से जिताने की बात करते हैं.
- प्रेमानंद जी महाराज ने कभी किसी से कुछ नहीं मांगा है, और न ही कोई लोभ मोह है उन्हें. उन्होंने अहित नहीं किया है किसी का.
- रामभद्राचार्य जी ने मंच से कहा है कि एक बार उन्होंने किसी बड़े नेता या अधिकारी के यहां पर कथा करवाई थी, तो गुरु दक्षिणा में अपने एक शिष्य को समीक्षा
- अधिकारी बना देने की मांग रखी और बोले कि बनवा दिया. ये अहित नहीं तो क्या है?
- सवर्णों, दलितों, पिछड़ों और अन्य धर्म के लोगों द्वारा प्रेमानन्द के प्रति बड़ी आस्था और प्रेम है. जबकि, रामभद्राचार्य जी के प्रति केवल सवर्ण ही झुकाव रखते हैं. बाकी हम जैसे तमाम पिछड़ी जाति से आने वाले चाहकर भी आस्था नहीं रख पाते हैं. क्योंकि, वो ऊंच-नीच की बात करते हैं.
टीवी चैनल के इंटरव्यू में दिया था विवादित बयान
जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने एनडीटीवी को दिए गए इंटरव्यू में कई मुद्दों पर बात की थी. इस दौरान जब उनसे पूछा गया कि सोशल मीडिया में कई लोग ऐसे हैं जो वृंदावन आते हैं और प्रेमानंद जी महाराज के लिए कहते हैं कि वह चमत्कार हैं. इस पर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि कोई चमत्कार नहीं है. चमत्कार यदि है तो मैं चैलेंज करता हूं प्रेमानंद जी एक अक्षर मेरे सामने संस्कृत बोल कर दिखा दें बस या मेरे कहे हुए संस्कृत श्लोकों का अर्थ समझा दें, मैं आज खुलकर कह रहा हूं. उन्होंने कहा कि वो तो मेरे बालक के समान है, अवस्था में भी. शास्त्र जिसको आए वही चमत्कार है.
मेरे बालक जैसे हैं प्रेमानंद – जगद्गुरु रामभद्राचार्य
रामभद्राचार्य ने आगे कहा कि मैं फिर कहने जा रहा हूं, ये वृंदावन है, ब्रज अयोध्या है, सब तो हैं. मैं प्रेमानंद से द्वेष नहीं रखता हूं, फिर कह रहा हूं मेरे बालक जैसे हैं. मैं उनके उन्हें ना तो विद्वान कह रहा हूं, ना साधक ना चमत्कारी. चमत्कार उसको कहते हैं जो शास्त्रीय चर्चा पर साझगार हो वो राधा बल भी है, राधा सुधा की एक श्लोकार्थ भी ठीक से बता दें.
लोकप्रियता क्षणभंगुर की होती है- जगद्गुरु रामभद्राचार्य
इसके साथ ही जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने उनकी लोकप्रियता को लेकर ये लोकप्रियता क्षणभंगुर की होती है. थोड़े दिन के लिए होती है, अच्छा लग रहा है मुझे. पर ये ये कहना कि चमत्कार ये मुझे स्वीकार नहीं है. भजन करते हैं और पढ़े लिखें.

