हिंदू धर्म में महिलाओं के आभूषण और उनके 16 श्रृंगार का खास महत्व बताया गया है. मगर आपको पता है कि ज्योतिष में इन श्रृंगार को ग्रहों से जुड़ा है, जो महिलाओं के जीवन पर गहरा असर डालते हैं.
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
16 Shringar: हिंदू धर्म में अक्सर देखा गया है कि महिलाएं किसी भी पर्व, व्रत, त्योहार, विवाह और समारोह आदि में सजती-संवरती हैं और 16 श्रृंगार करती हैं. ज्योतिष शास्त्र में भी महिलाओं के श्रंगार को लेकर विस्तार से बताया गया है. हर श्रृंगार का संबंध अलग-अलग ग्रह से जोड़कर देख गया है, जिसका प्रभाव महिलाओं और उसके परिवार पर सकारात्मक रूप से पड़ता है. आज हम उन्हीं 16 श्रृंगार के संबंध में बताने जा रहे हैं. आइए जानते हैं 16 श्रृंगार का संबंध किस ग्रह से है.
महिलाओं के श्रृंगार ग्रह के प्रतीक
16 श्रृंगार (सोलह श्रृंगार) भारतीय परंपरा में सौंदर्य, सौभाग्य और स्त्रीत्व का प्रतीक हैं, जो सिर्फ बाहरी सजावट नहीं, बल्कि नौ ग्रहों (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु) के शुभ प्रभावों को शरीर और मन पर संतुलित करने का ज्योतिषीय उपाय भी माने जाते हैं, जिससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है और दांपत्य सुख, आत्मविश्वास तथा समृद्धि बढ़ती है.
16 श्रृंगार और उनके ग्रहों से संबंध
- 1. बिंदी: चंद्रमा (मन की शांति).
- 2. सिंदूर: मंगल (ऊर्जा, शक्ति).
- 3. काजल (अंजन): राहु (नकारात्मकता दूर करना).
- 4. श्रृंगार (हार, चूड़ियाँ): बुध (बुद्धि, निर्णय क्षमता).
- 5. महेंदी (अंगराग): शुक्र (सौंदर्य, प्रेम).
- 6. पाउडर/सुगंध: गुरु (समृद्धि, संतुलन).
- 7. महावर/आलता (चरणराग): शनि (स्थिरता, धैर्य).
- 8. पायल (नूपुर): केतु (अध्यात्म, बाधा निवारण).
- 9. बिछिया (पैर की अंगूठी): शुक्र (सौभाग्य).
- 10. कमरबंद (करधनी): सूर्य (आत्मविश्वास, तेज).
- 11. बाजूबंद: मंगल (सुरक्षा, ऊर्जा).
- 12. कान की बाली (कुंडल): सूर्य (तेज, सामाजिक स्थिति).
- 13. नथ (नासामुक्ता): चंद्रमा (सौंदर्य, स्त्रीत्व).
- 14. चोली/कंचुक (बलाउज): चंद्र (शीतलता, भावनात्मक संतुलन).
- 15. केशविन्यास (बालों का संवारना): राहु (आध्यात्मिक शक्ति).
- 16. आरसी (अंगूठी जिसमें शीशा हो): सभी ग्रहों का संतुलन (आत्म-दर्शन
महिलाओं के लिए श्रृंगार का महत्व
देवी स्वरूप:
स्त्री को देवी लक्ष्मी और गृहलक्ष्मी का रूप माना जाता है.
सौभाग्य:
अखंड सौभाग्य और पति की लंबी आयु का प्रतीक है.
आत्मबल:
आंतरिक शक्ति और आत्मविश्वास को बढ़ाता है.
सांस्कृतिक जुड़ाव:
हरियाली तीज, करवा चौथ जैसे अवसरों पर इसका विशेष महत्व है.
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