नवरात्रि के समय बोए हुए जवारों एक पारंपरिक प्रथा है. इसे मां दुर्गा के प्रसाद के रूप में माना जाता है.
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By : डीबी न्यूज अपडेट| Edited By: प्रिंस अवस्थी
Shardiya Navratri 2025: नवरात्रि पर प्रत्येक दुर्गा पण्डाल पर जवारे बोने की प्रथा है. इसके पीछे पौराणिक महत्व और जवार बोने की पारंपरिक प्रथा भी है. दरअसल जवार मां दुर्गा को अत्यंत प्रिय है, इसे प्रसाद के रूप में बोया जाता है. मातारानी जवारे देखकर प्रसन्न होती हैं, इसी कारण नवरात्रि के नौ दिनों तक जवार की विशेष रूप से देखभाल की जाती है, फिर दशमी के दिन जवार का पूरे रीति-रिवाज के साथ विसर्जिन किया जाता है.
नवरात्रि में जवार बोने से हमारे जीवन में सकारात्मकता और शुभ फल की प्राप्ति होती है. जबलपुर संस्करधानी में जवारे का जुलूस निकाले जाने की परंपरा है. ढोल नगाड़े के साथ जवारे का विसर्जन नदी-तालाब में करने की प्रथा है.
जवार जुलूस के साथ देखने को मिलती दैवीय शक्ति
जवार जुलूस में एक और प्रथा देखने को मिलती है. कई भक्त देवी भक्ति में इतने लीन हो जाते हैं कि वे अपने शरीर में कोड़े-जंजीर के बरसाते हैं. कई भक्त अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए जीभ और गाल के बीच से भाला निकालकर चलते रहते हैं. ऐसा प्रतीत होता है कि उन्हें किसी प्रकार का दर्द ही न होता हो. ऐसी दैवीय शक्तियां नवरात्रि के दिनों में अक्सर देखने को मिलती हैं. ऐसी देवी शक्ति स्वरूपा का दर्शन लाभ लेना भी देवी का आशिर्वाद माना गया है. चलिए जानते हैं कि जवारों का नवरात्रि के बाद क्या करना चाहिए और इसके क्या महत्व है?
जवारों का जीवन पर महत्व
- जवार को बोना नए जीवन के शुरूआत का प्रतीक है.
- जवारों के हरेपन से घर में सुख-शांति, समृद्धि और प्रगति की ओर बढ़ने के संकेत मिलते है.
- जवारों की वृद्धि को देखकर पूरे साल किसानी और व्यक्ति के जीवन के विकास का अंदाजा लगाया जाता है.
- नवरात्रि के बाद जवारों को मां के प्रसाद स्वरूप ग्रहण करना चाहिए. इससे मां का आशीर्वाद प्राप्त होता है.
नवरात्रि के बाद जवारों के उपाय
नवरात्रि के बाद जब जवारों सुखाकर किसी साफ कपड़े में बांधकर तिजोरी या धन रखने वाली जगह पर रखें. यह करने से घर पर लक्ष्मी मां का आशीर्वाद बना रहता है ओर बरकत भी होती है.
अगर कोई व्यक्ति ये उपाय नहीं करना चाहता तो जवारों को किसी पवित्र जगह पर रख दें. जैसे पीपल के पेड़ के पास या किसी नदी-तालाब में विसर्जित कर दें. वरना घर के आंगन के गमले में दबाकर भी रख सकते हैं.
जवारों को तिजोरी में रखने के फायदे
- नवरात्रि के बाद जवारों को मां दुर्गा का प्रसाद माना जाता है. इसलिए इसे तिजोरी में रखने से मां लक्ष्मी का घर में वास भी होता है.
- यह करने से तिजोरी में रखें धन की वृद्धि होती है और घर में कभी भी पैसों की कमी नहीं होती.
- इन चीजों का रखें ध्यान
- जवारों के विसर्जन के वक्त स्वच्छता और शुद्धता का पूरा ख्याल रखें.
- तिजोरी में रखने के बाद उसे हर थोड़े दिन पर साफ करें
- इसे किसी भी अशुद्ध जगह या नदी में न फेंके. यह करने से पाप लगता है और मां नाराज होती हैं.
जवारे बोने की परंपरा का पौराणिक और धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सृष्टि के निर्माण के समय ब्रह्मा जी द्वारा उत्पन्न की गई सबसे पहली फसल ‘जौ’ (जवारे) ही थी। यही कारण है कि हिंदू धर्म के सभी शुभ कार्यों, यज्ञों और धार्मिक अनुष्ठानों में जौ का उपयोग अनिवार्य माना गया है।
अन्नपूर्णा देवी का प्रतीक: जौ को केवल एक अनाज नहीं, बल्कि ‘पूर्ण अन्न’ माना जाता है। इसे बोकर हम माता दुर्गा के ‘अन्नपूर्णा’ रूप का आभार व्यक्त करते हैं, जिससे हमारे जीवन में कभी धन और धान्य की कमी न हो।
भविष्य के संकेतों का आधार: नवरात्रि में बोए गए जवारे किस गति से और किस रंग में उगते हैं, इससे आने वाले साल के सुख-समृद्धि का अनुमान लगाया जाता है।
यदि जवारे तेजी से बढ़ते हैं और उनका रंग नीचे से सफेद व ऊपर से हरा होता है, तो इसे अत्यंत शुभ माना जाता है। इसका अर्थ है कि आने वाला वर्ष आपके और आपके परिवार के लिए समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशियां लेकर आएगा।
यदि जवारे कमजोर, सूखे या काले उगते हैं, तो यह इस बात का संकेत माना जाता है कि भविष्य में कुछ बाधाएं या स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं आ सकती हैं, जिनके लिए ईश्वर से प्रार्थना की जाती है।
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