विजयादशमी पर मां दुर्गा का किया जाएगा विसर्जन. विदाई से पहले जबलपुर की दुर्गा प्रतिमाओं का करें दर्शन
By : डीबी न्यूज अपडेट | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Vijayadashmi 2025: नवरात्रि के पावन पर्व पर देश भर में मां दुर्गा पूजा और भण्डारे का आयोजन किया जा रहा है. इस पर्व को उत्सव के रूप में मनाने में जबलपुर संस्कारधानी कैसे पीछे रह सकता है. यहां मां दुर्गा ने कई रंग-रूप में भक्तों को दर्शन दिए. उनकी आभा और शक्ति का एहसास हर किसी को हुआ. शहर के उपनगरी, ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में करीब 1845 मां दुर्गा प्रतिमाएं रखी गई हैं, जिनक दर्शन करने के लिए शहरभर के श्रद्धालु सड़कों पर आ गए. हर झांकी का दर्शन करने की लालसा प्रत्येक श्रद्धालु के मन में रही. लेकिन ज्यादा भीड़ की वजह से कई जगह लोग जाकर दर्शन भी प्राप्त नहीं कर सके. आइए हम कुछ देवी प्रतिमाओं का दर्शन कराने की कोशिश करते हैं.

कन्या पूजन और हवन के साथ मां दुर्गा की विदाई
नवमी के दिन कन्या पूजन और हवन की पूर्णाहुति दी गई. आज विजय दशमी के दिन मां दुर्गा को विदाई दी जा रही है. जगह-जगह दुर्गा प्रतिमाओं का जुलूस निकाला जा रहा है. आज मुख्य चल समारोह बस स्टैण्ड से प्रारंभ होगा. जिसमें शहर की मुख्य देवी प्रतिमाएं शामिल होंगी.
सड़कों पर उमड़ी भीड़
देवी प्रतिमा देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे. गढ़ा, यादव कॉलोनी, विजय नगर, गढ़ाफाटक, फुहारा, सुनरहाई, नुनहाई, घमापुर, रांझी, गौरीघाट सहित उपनगरीय क्षेत्र में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा. लोग दर्शन करने के लिए लालायित रहे. लेकिन भीड़ ज्यादा होने की वजह से कई श्रद्धालुओं को वापिस लौटना पड़ा.
परंपरा का करें निर्वहन
नवरात्रि के बाद विजयादशमी आज 2 अक्टूबर 2025 को है. इस दिन मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन किया जाएगा. मां दुर्गा की विदाई से पहले कई तरह की परंपराएं निभाई जाती हैं. उन परंपराओं का निर्वहन हम सभी श्रद्धालुओं को करना चहिए.

इन परंपराओं का करें निर्वहन
नवरात्रि में मां को विदाई देने से पहले उन्हें दही चूड़ा का भोग लगाया जाता है. आइये जानते हैं इसके पीछे का महत्व क्या है?
मां दुर्गा को दही-चूड़ा का भोग लगाने के पीछे ऐसी मान्यता है कि, दही और चूड़ा शुभता का प्रतीक होता है. विदाई से पहले मां को इसका भोग लगाना शुभ और फलदायी होता है.
कहा जाता है कि, नवरात्रि के दिनों में मां दुर्गा अपने मायके आती है. 9 दिनों तक ठहरने के बाद 10वें दिन उन्हें विदाई दी जाती है. विदाई से पहले लोग दही-चूड़ा भोग की रस्म पूरी करते हैं.
शास्त्रों में भी कहा गया है कि, जब हम किसी यात्रा के लिए घर से निकलते हैं तो दही खाकर निकलना शुभ होता है. इसी तरह जब मां यात्रा पर निकलती हैं तो उन्हें भी दही-चूड़ा का भोग लगाया जाता है.
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